7 नवंबर 2026,

शनिवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

एमपी में कर्ज माफी में अड़ंगा, 12 जिलों के किसानों को बड़ी राहत दे सकती है सरकार

MP Farmers : सरकार दो विकल्पों पर करेगी काम; जिले बनाएंगे प्लान, राज्य करेगा मदद, 12 जिलों में सूखे जैसे हाल, राहत में गाइडलाइन की बाधा
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

भोपाल

•

image

deepak deewan

•

Updated: 7 Nov 2026, 9:37 AM IST

Farmers news

किसानों को राहत में गाइडलाइन की बाधा - प्रतीकात्मक तस्वीर

MP Farmers : मध्यप्रदेश में किसानों के कल्याण पर सरकार का फोकस है। दो दिन पूर्व सीएम मोहन यादव ने पांढुर्णा ​के किसानों से बातचीत कर किसानों के हित में काम करने का संकल्प दोहराया। इधर मध्यप्रदेश के 12 जिलों में सामान्य से काफी कम बारिश होने के बावजूद उन्हें सूखाग्रस्त घोषित करने में केंद्र और राज्य सरकार की गाइडलाइन आड़े आ रही है। बहुत कम पानी गिरने के बावजूद सरकार इन्हें सूखाग्रस्त घोषित करने की स्थिति में नहीं है। इसकी प्रमुख वजह सूखा आकलन के निर्धारित मापदंड हैं। इनमें बारिश की कमी के साथ बुवाई के रकबे में गिरावट और फसलों की वास्तविक स्थिति भी आधार हैं। किसानों की कर्ज माफी में अड़ंगे आ रहे हैं पर इन 12 जिलों के किसानों को सरकार किसी अन्य रूप में बड़ी राहत देने पर विचार कर रही है।

एमपी में सबसे खराब स्थिति आलीराजपुर जिले की है, जहां सामान्य से 51 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। यहां सामान्य औसत से आधी बारिश हुई। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के गृह जिले उज्जैन में भी 27 प्रतिशत और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के गृह जिले बैतूल में 31 प्रतिशत कम पानी बरसा। इनके अलावा धार, झाबुआ, रतलाम, नर्मदापुरम, हरदा, इंदौर, पांढुर्णा, शाजापुर और छिंदवाड़ा भी कम बारिश की मार झेल रहे हैं।

ये विकल्प अभी बाकी

  1. खरीफ फसलों की कटाई और रबी की बुवाई का काम जारी है। इनके रकबे में अन्य वर्षों की तुलना में कोई बड़ा अंतर आता है तो उसे आधार बनाया जा सकता है।
  2. केंद्र सरकार भी राज्यों में कम बारिश पर गंभीर है। कई स्तर पर बैठकें हो चुकी है, राज्यों से डेटा मंगवाए जा चुके हैं। दिल्ली सूत्रों के मुताबिक केंद्र भी औसत से कम बारिश वाले जिलों व राज्यों के लिए अलग आर्थिक इंतजाम कर सकता है।
  3. आने वाले समय में राज्य सरकार औसत से कम बारिश वाले इन 12 जिलों में पीने के पानी से जुड़ी योजनाओं के लिए अलग से अतिरिक्त राशि जारी कर सकती है।

ये बड़े जोखिम

इन जिलों को सूखा घोषित किया तो सबसे बड़ा खर्च किसानों के लिए उठाना होगा। इन्हें फसल नुकसानी पर अतिरिक्त आर्थिक मदद दिलानी होगी। ऐसे जिलों में किसानों द्वारा फसलों के लिए उठाए कर्ज को या तो पूरा माफ करना पड़ेगा या ब्याज की राशि व प्रीमियम में पूरी तरह छूट देनी पड़ेगी।

इन दो स्तर पर तैयारी

पहला, सभी 12 जिलों से कम बारिश के कारण पैदा हुई समस्याओं और उनसे निपटने के लिए जरूरी खर्च का आकलन करते हुए विस्तृत कार्ययोजना मांगी गई है। दूसरा, राज्य और केंद्र स्तर पर ऐसे विकल्प तलाशे जा रहे हैं, जिनसे सूखा घोषित किए बिना भी जिलों को अधिकतम आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जा सके।