
Rajyasabha Chunav- मध्यप्रदेश में राज्यसभा की तीसरी सीट पर 18 जून को होने वाला चुनाव रोचक मोड़ पर पहुंच गया है। पहले दो बार हार चुकी भाजपा ने इस बार फिर तीसरी सीट पर चुनाव लडऩे का ऐलान कर दिया। खाली हो रही अपनी दोनों सीट पर पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ व प्रदेश मंत्री रजनीश अग्रवाल शनिवार को ही नामांकन दाखिल कर चुके हैं। रविवार को देर रात बीजेपी ने अपना दांव चलते हुए तीसरी सीट पर मप्र मछुआ कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष महेश केवट को प्रत्याशी बना दिया। खास बात यह है कि 4 साल पहले उन्हें 6 साल के लिए भाजपा से निकाला गया था। महेश केवट की उम्मीदवारी के साथ ही कांग्रेस की राज्यसभा प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन की मुश्किलें बढ़ गई हैं। पार्टी में क्रॉस वोटिंग का खतरा बढ़ गया है।
राज्यसभा की तीसरी सीट कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह के कारण खाली हो रही है। वे पहले ही इस बार चुनाव लडऩे से इंकार कर चुके थे। सीट पर अनेक वरिष्ठ कांग्रेसियों ने दावा जताया पर हाईकमान ने राहुल गांधी की बेहद खास और भरोसेमंद मीनाक्षी नटराजन को उम्मीदवार घोषित कर दिया। इससे दिग्गज दावेदार नाराज हैं और पार्टी में भीतरघात की आशंका है।
भाजपा ने विधायकों के संख्या बल और कांग्रेस की अंदरुनी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए तीसरी सीट पर भी अपनी उम्मीदवारी जता दी है। पार्टी ने देर रात महेश केवट को राज्यसभा के लिए प्रत्याशी घोषित कर दिया। वे संघ की पृष्ठभूमि के हैं। महेश केवट ओरछा के रहने वाले हैं। वे बीजेपी में अनेक अहम पदोें पर कार्य कर चुके हैं।
बीजेपी द्वारा महेश केवट के नाम के ऐलान के साथ ही कांग्रेस मीनाक्षी नटराजन के लिए विधायकों की क्रॉस वोटिंग का खतरा बढ़ गया है। तीसरी सीट पर वे सोमवार को कांग्रेस से नामांकन फॉर्म भरने वालीं हैं।
मप्र भाजपा ने तीसरी सीट पर जीत का भरोसा दिलाया है। इसके बाद केंद्रीय नेतृत्व ने प्रत्याशी उतारने की सहमति दी। बताते हैं, तीसरी सीट जीतने की कमान सीएम डॉ. मोहन यादव और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल को मिली है। रविवार शाम दोनों नेताओं ने सीएम हाउस पर रणनीति बनाई। केंद्रीय नेतृत्व भी इसकी निगरानी करेगा।
महेश केवट को 4 साल पहले जून 2022 में भाजपा ने पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में निकाल दिया था। आरोप है, उनके साथ 11 भाजपा कार्यकर्ताओं ने निवाड़ी नगर परिषद चुनाव में 27 जून 2022 को तत्कालीन मंत्री भूपेंद्र सिंह की मौजूदगी में कांग्रेस के पक्ष में वोटिंग की थी। बाद में आदेश को प्रभावहीन कर मुख्यधारा में लाए। केवट को मछुआ कल्याण बोर्ड का अध्यक्ष बनाया।