
Metropolitan City news: मध्यप्रदेश के उज्जैन-इंदौर और भोपाल मेट्रोपोलिटन रीजन का नोटिफिकेशन जारी हो चुका है। इन रीजन की सीमाएं तय कर दी हैं, अब दोनों क्षेत्रों के लिए अलग-अलग मेट्रोपोलिटन अथॉरिटी का गठन होगा। साथ ही दोनों क्षेत्रों के विकास के लिए प्लान बनाने की A प्रक्रिया शुरू होगी। सरकार का फोकस भोपाल को मप्र का स्टेट कैपिटल रीजन और उज्जैन-इंदौर को सेंट्रल इंडिया का आर्थिक इंजन बनाने पर है।
उसी अनुसार दोनों क्षेत्रों के कुल 28 हजार वर्ग किमी क्षेत्र के विकास की योजना तैयार की जाएगी। क्योंकि दोनों रीजन आष्टा और सोनकच्छ में एक-दूसरे से मिल भी रहे हैं।
इस संबंध में जल्द उच्चस्तरीय बैठक होगी। अधिकारियों के अनुसार मेट्रोपॉलिटन रीजन का उद्देश्य केवल शहरों का विस्तार नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र को एकीकृत आर्थिक और शहरी क्षेत्र के रूप में विकसित करना है। इसके लिए अलग-अलग मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी बनाकर परिवहन, उद्योग, आवास, जल प्रबंधन और निवेश के लिए एक साथ प्लान किया जाएगा। इसके लिए वर्तमान और भविष्य के आर्थिक विकास के केन्द्रों को चिन्हित कर उनका विकास किया जाएगा। मेट्रोपोलिटन एक्ट में तय की गई व्यवस्था भी जल्द बनाई जाएगी।
इंदौर, उज्जैन, देवास, धार, शाजापुर और रतलाम
कुल क्षेत्रफल- 1600 वर्ग किमी.
गांव-2781
तहसील-38
कुल आबादी- 75 लाख
-राजधानी क्षेत्र का विकास
-प्रशासनिक और संस्थागत विस्तार को बढ़ावा
-नए सरकारी और कॉर्पोरेट निवेश क्षेत्र विकसित करना
-आसपास के क्षेत्रों में मेट्रो और रीजनल ट्रांसपोर्ट विकसित करना
-भोपाल मेट्रो का मंडीदीप, सीहोर आदि तक विस्तार
-मंडीदीप, ओबैदुल्लागंज, सीहोर, विदिशा जैसे क्षेत्रों को विकास केंद्र बनाना ताकि आबादी का दबाव केवल भोपाल पर न पड़े।
-भोपाल की बड़ी झील और क्षेत्र के जल स्रोतों का संरक्षण
-भोपाल-इंदौर, भोपाल-नागपुर और भोपाल-झांसी कॉरिडोर के आसपास लॉजिस्टिक हब विकसित करना।
भोपाल, सीहोर, रायसेन, विदिशा, राजगढ़ नर्मदापुरम
कुल क्षेत्रफल- 12098 वर्ग किमी.
गांव- 2510
तहसील-30
कुल आबादी - 28 लाख