
भोपाल। किसी एक ही मोहल्ले- क्षेत्र से शहर को तीन सांसद, एक राष्ट्रपति मिल जाए तो वह खास हो जाता है। भोपाल का वार्ड क्रमांक 20 और 21 में शामिल क्षेत्र से शहर को तीन सांसद मिले हैं और इनमें से एक तो उपराष्ट्रपति-राष्ट्रपति के पद तक भी पहुंचे। मुख्यतौर पर चौक, कुम्हारपुरा, गुलियादाई का मोहल्ला और यहां से करीब 500 मीटर दायरे में पूर्व सांसदों के मूल घर हैं। इस बार भाजपा ने अपना लोकसभा प्रत्याशी भी इसी क्षेत्र के व्यक्ति को बनाया है। इसी क्षेत्र के आलोक शर्मा 2024 के चुनाव में भाजपा के प्रत्याशी है। चौक का नगर निगम में प्रतिनिधित्व कर चुके वात्सायन जैन का कहना है कि यह शहर का सबसे पुराना हिस्सा है। इसे राजनीति की नर्सरी भी कहा जाए तो बड़ी बात न होगी।
डॉ. शंकरदयाल शर्मा: गुलियादाई के मोहल्ले में इनका मूल निवास रहा है। डॉ. शर्मा 1971 में भोपाल के सांसद बने। कांग्रेस अध्यक्ष भी रहे। 1952 में वे भोपाल राज्य के पहले युवा मुख्यमंत्री भी बने। 1980 में फिर लोकसभा का चुनाव जीतकर सांसद बने। साल 1992 में डॉ शर्मा भारत के नवें राष्ट्रपति चुन लिए गए।
केएन प्रधान: केएन प्रधान 1984 से 1989 तक भोपाल के सांसद रहे। वे भी चौक से जुड़े कायस्थपुरा, गुर्जरपुरा की गलियों में ही रहे। प्रधान मप्र सरकार में केबिनेट मंत्री भी बने। बाद के सालों में उनका परिवार नर्मदापुरम रोड से लगे क्षेत्र में शिफ्ट हुआ।
मैमूना सुल्तान: शहर की पहली सांसद मैमूना सुल्तान चौक पीरगेट-फतेहगढ़ क्षेत्र में ही निवास करती थी। मैमूना सुल्तान 1957 से 1962 और 1962 से 1967 तक शहर की सांसद रही।
अभी भोपाल 85 वार्ड में बंटकर आनंदनगर से मिसरोद, कोलार से बैरागढ़ और आगे तक फैल गया है। पहले ये लक्ष्मी टॉकीज से लेकर कमलापार्क के पहले तक सीमित था। बसाहट काफी कम थी। वनक्षेत्र था। शाम ढलने के बाद कमलापार्क से पॉलीटेक्निक की ओर वाले क्षेत्र में आने से लोग बचते थे। ऐसे में छोटे क्षेत्र में सीमित भोपाल में सभी लोग एक तय दायरे में रहते थे। अब ये काफी विस्तारित हो चुका है।