भोपाल

कांग्रेस में बड़ों को जीत, भाजपा में बुजुर्गों को समन्वय का जिम्मा

- दिल्ली फतह की रणनीति : दोनों प्रमुख सियासी दलों ने अपने अनुभवी नेताओं को सौपी बड़ी जिम्मेदारी

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Mar 05, 2019
madhyapradesh-election

भोपाल. सियासी चौसर पर चुनावी गोटियां फिट करने में जुटी कांग्रेस और भाजपा ने अपने बड़े-बुजुर्गों का हाथ थामा है। उनके सियासी कौशल का फायदा लेकर लोकसभा चुनाव फतह करने की रणनीति बनाई है। कांग्रेस ने बड़े नेताओं को घमासान वाली सीटें जिताने का जिम्मा दिया है। दूसरी ओर भाजपा ने बुजुर्ग नेताओं को कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय की जिम्मदारी सौंपी है। भाजपा पिछले दिनों सतह पर आए पार्टी के अंदरूनी विवादों को लेकर सतर्क हो गई है।

कांग्रेस के दिग्गजों को दो-दो सीटें जिताने का जिम्मा
कांग्रेस मिशन 29 के तहत वे सीटें भी जीतने की रणनीति बना है, जो उसे पिछले कई सालों से नसीब नहीं हुई हैं। पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रदेश के सभी दिग्गज नेताओं को जीत की जिम्मेदारी दे दी है। ये नेता अपने अंचल में सीटें जिताने के अलावा यह काम करेंगे। मुख्यमंत्री कमलनाथ, सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के पास भी यह जिम्मा है। कांग्रेस को लगता है कि ये सीटें जीत लीं तो प्रदेश में 20 से ज्यादा सीटें जीतने से कोई नहीं रोक सकता। इनमें भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर जैसे बड़ी सीटें शामिल हैं।
- दिग्गजों को इन सीटों की जिम्मेदारी
कमलनाथ अपनी परंपरागत सीट छिंदवाड़ा के साथ महाकौशल अंचल की बालाघाट सीट का जिम्मा दिया है। उनके पास महाकौशल का प्रभार भी है। सिंधिया को उनकी सीट गुना के साथ ग्वालियर जिताने का जिम्मा भी सौंपा गया है। ग्वालियर-चंबल अंचल का प्रभार भी उनके पास है। उत्तर प्रदेश का प्रभार मिलने के बाद सिंधिया ने अपनी पत्नी प्रियदर्शनी राजे को इस रणनीति के तहत काम में जुटा दिया है। दिग्विजय को भोपाल और इंदौर की जिम्मेदारी सौंपी गई है। घरेलू सीट होने के कारण राजगढ़ और मध्यभारत का प्रभार भी उनको दिया गया है। राज्यसभा सदस्य विवेक तन्खा को जबलपुर और खजुराहो का जिम्मा दिया गया है। सांसद कांतिलाल भूरिया को छह आदिवासी सीटों के साथ उनकी रतलाम सीट और मंडला जिताने की जवाबदारी दी गई है। अरुण यादव निमाड़ की खंडवा और खरगौन सीट का विशेष प्रभार संभालेंगे। अजय सिंह को सीधी और सतना की जिम्मेदारी दी गई है। बघेलखंड का प्रभार भी अजय के पास है। वहीं, सुरेश पचौरी को होशंगाबाद का जिम्मा दिया गया है।
- उम्मीदवार चयन में भी ली जाएगी राय
दिग्गजों की राय उम्मीदवार के चयन में भी ली जा रही है। उनसे अपनी जिम्मे वाली सीटों पर जिताऊ उम्मीदवारों के नाम भी मांगे गए हैं। उनको इन सीटों पर तैयारी और योजना के लिए फ्री हैंड भी दिया गया है।

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प्रदेश के सभी बड़े नेताओं के समन्वय से ही कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव में जीत हासिल की है। उसी तर्ज पर इन दिग्गज नेताओं के प्रभाव का उपयोग करते हुए लोकसभा चुनाव में विशेष जिम्मा सौंपा गया है।
- दीपक बावरिया, प्रदेश प्रभारी, कांग्रेस

नेताओं की आपसी खींचतान खत्म करेंगे बुजुर्ग
भाजपा ने सांसदों-विधायकों में मची खींचतान और नेताओं की गुटबाजी को थामने का जिम्मा अपने चार बुजुर्गों को दिया है। इनमें से तीन बुजुर्ग प्रदेश संगठन महामंत्री जैसे अहम और अनुशासन से जुड़े पद पर रहे हैं। एक पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं। इन नेताओं को संभाग स्तर पर पार्टी के नेताओं और पदाधिकारियों के साथ बैठकें कर समन्वय बनाने के लिए कहा गया है।
- हर संभाग में गुटबाजी, खींचतान
विधानसभा चुनाव में भाजपा की हार के बाद लगभग हर संभाग में बड़े नेताओं के बीच विवाद और गुटबाजी की स्थिति है। खंडवा लोकसभा क्षेत्र में सांसद नंदकुमार सिंह चौहान और पूर्व मंत्री अर्चना चिटनीस आमने-सामने हैं। सीधी में सांसद रीती पाठक और विधायक केदार शुक्ला के बीच का विवाद सड़कों पर आ चुका है। दमोह में सांसद प्रहलाद पटेल की शिकायत विधानसभा चुनाव के दौरान गोपाल भार्गव ने की थी। इंदौर में उषा ठाकुर और कैलाश विजयवर्गीय के बीच की खींचतान जगजाहिर है। इसका लोकसभा चुनाव में असर पड़ सकता है।
- विधानसभा चुनाव में उठे थे सवाल
विधानसभा चुनाव के दौरान विक्रम वर्मा को छोड़कर तीनों अन्य नेताओं को कोई अहम जिम्मेदारी नहीं सौंपी गई थी। सत्ता गंवाने के बाद हुई समीक्षा बैठकों मेंं भी यह विषय उठा था कि माखन सिंह और भगवत शरण माथुर जैसे वरिष्ठ नेताओं के अनुभव का लाभ संगठन ने क्यों नहीं उठाया।
- किस जिम्मेदार की क्या खूबी
माखन सिंह : प्रदेश के पूर्व प्रदेश संगठन महामंत्री। संघ से सीधे कनेक्शन के साथ ही कार्यकर्ताओं पर प्रभाव। अनुशासन एवं सादगी के दम पर लोगों से काम कराने की क्षमता।
कृष्ण मुरारी मोघे : प्रदेश संगठन महामंत्री रहे। खरगौन से सांसद और इंदौर के महापौर रहे। संघ के साथ ही भाजपा के जमीनी नेताओं तक सीधे संबंध। मालवा में अच्छी पकड़।
भगवत शरण माथुर : पूर्व सह संगठन महामंत्री। संघ का चेहरा। कई इलाकों में संभागीय संगठन मंत्री रहने के कारण वहां के नेताओं से अच्छे संबंध। विंध्य में अच्छी पकड़।
विक्रम वर्मा : पूर्व केंद्रीय मंत्री और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष रहे। मालवा-निमाड़ में वर्चस्व। अनुशासन एवं गंभीर छवि के नेता हैं।

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Updated on:
04 Mar 2019 09:34 pm
Published on:
05 Mar 2019 05:25 am
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