Wheat- किसानों की समस्याओं को लेकर 9 अप्रेल को कांग्रेस भरेगी हुंकार, गेहूं खरीदी में देरी व मुआवजे को लेकर प्रदर्शन
Wheat- मध्यप्रदेश में गेहूं खरीदी में देरी और ओलावृष्टि के मुआवजे को लेकर कांग्रेस ने राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कांग्रेस ने 9 अप्रेल को प्रदेशव्यापी आंदोलन का ऐलान किया है। इसके तहत सभी जिलों में कलेक्टर कार्यालयों का घेराव किया जाएगा। कांग्रेस ने सरकार पर आरोप लगाया है कि बिचौलियों को लाभ पहुंचाने गेहूं खरीदी में जानबूझकर देरी की है। प्रदेश किसान कांग्रेस के अध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह चौहान ने सोमवार को पीसीसी में आयोजित पत्रकार वार्ता में मुख्यमंत्री और केंद्रीय कृषि मंत्री पर किसानों को बिचौलियों के हवाले करने का आरोप लगाया। उन्होंने गेहूं खरीदी में विलंब को किसानों के साथ विश्वासघात बताया।
किसान कांग्रेस के अध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह चौहान ने बताया, प्रदेशाध्यक्ष जीतू पटवारी के आह्वान पर 9 अप्रेल को सरकार की वादाखिलाफी के विरोध में कलेक्टर कार्यालयों का घेराव किया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि मंडियों में बारदाने के पुख्ता इंतजाम और तुरंत खरीदी शुरू नहीं की तो कांग्रेस प्रदेशभर में उग्र प्रदर्शन करेंगी और केंद्रीय कृषि चौहान के भोपाल निवास के समक्ष उपवास पर बैठेंगे।
चुनाव के समय भाजपा द्वारा 2700 प्रति क्विंटल गेहूं खरीदने के वादे का भी किसान कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष ने जिक्र किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में गेहूं पर अब मात्र 40 रुपए का बोनस दिया जा रहा है जबकि राजस्थान में 150 रुपए का बोनस दिया जा रहा है। प्रदेश में ओलावृष्टि के चलते किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। इस पर किसान कांग्रेस के अध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह चौहान ने किसानों को हुए नुकसान का तत्काल सर्वे कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि ओलावृष्टि से प्रभावित किसानों को 50000 प्रति हेक्टेयर की दर से तत्काल राहत राशि दी जाए।
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भी किसानों को मुआवजे की मांग की है। प्रदेश के विभिन्न जिलों में हाल ही में हुई असमय वर्षा, आंधी एवं ओलावृष्टि से किसानों को हुई क्षति को लेकर त्वरित कार्यवाही के लिए उन्होंने सीएम मोहन यादव को पत्र लिखा है। उमंग सिंघार ने मांग की है कि प्रभावित जिलों में राजस्व एवं कृषि विभाग के माध्यम से जल्द सर्वेक्षण कर वास्तविक क्षति का आकलन कराया जाए। आकलित क्षति के अनुसार किसानों को जल्द मुआवजा दिया जाए। वर्षा से प्रभावित उपज के संदर्भ में गुणवत्ता मानकों में आवश्यक एवं व्यवहारिक शिथिलता प्रदान की जाए, ताकि किसानों को उपार्जन से वंचित न होना पड़े।