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मध्य प्रदेश में 6 महीने में यूसीसी! सीएम मोहन यादव ने कर दी बड़ी घोषणा

MP UCC: सीएम मोहन यादव ने प्रदेश में यूसीसी लागू करने स्पष्ट संकेत दे दिए हैं, उन्होंने मंत्रियों को साफ तौर पर निर्देश दिए हैं कि वे यूसीसी का अध्ययन करें ताकि यूसीसी को लागू किया जा सके, कमेटी गठित करने की तैयारी तेज, मानसून सत्र 2026 में आ सकता है बड़ा फैसला
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भोपाल

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Sanjana Kumar

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Updated: 8 Apr 2026, 10:55 AM IST

MP UCC CM Mohan Yadav Big Announcement

MP UCC CM Mohan Yadav Big Announcement(Photo:cm fb)

MP UCC: मध्य प्रदेश में अब समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की तैयारी है, असम और गुजरात के बाद मध्य प्रदेश भी इस दिशा में कदम बढ़ा रहा है। इसे लेकर प्रदेश के मुखिया डॉ. मोहन यादव ने मंत्रियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे यूसीसी का अध्ययन करें। उन्होंने कहा कि इसे मध्य प्रदेश में लागू करना है। सीएम के संकेत के बाद गृह विभाग में प्रक्रिया तेज कर दी गई है। दरअसल यूसीसी बिल पास करने की तैयारी इसी विभाग के पास है।

सूत्रों के मुताबिक राज्य स्तर पर जल्द ही एक उच्च स्तरीय कमेटी गठित की जाएगी। ताकि 6 महीने में ही राज्य में यूसीसी को लागू किया जा सके। इसके लिए मध्य प्रदेश को दिल्ली से भी संकेत मिल चुके हैं।

अन्य राज्यों के मॉडल का अध्ययन और अनुभव देख तैयार होगा प्रदेश का प्रारूप

मध्य प्रदेश सरकार इस विषय पर अन्य राज्यों के मॉडल का भी अध्ययन करेंगी। इसमें गोवा सिविल कोड का अधिकारी अध्ययन करेंगी। खास तौर पर उन राज्यों के अनुभवों को देखा जा रहा है, जहां इस तरह के कानून पर काम हो चुका है या प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है। इसके आधार पर प्रदेश के लिए उपयुक्त प्रारूप तैयार किया जाएगा। इसके बाद इसे कैबिनेट के सामने पेश किया जाएगा।

मानसून सत्र 2026 में कैबिनेट में लाने की तैयारी, आ सकता है बड़ा फैसला

यूसीसी बिल को लेकर मानसून सत्र 2026 में ही प्रस्ताव को कैबिनेट में लाया जा सकता है। सरकार की तैयारी है कि यूसीसी को मध्यप्रदेश में व्यावहारिक मॉडल को सोच-परख के साथ लाया जाए। किसी वर्ग की भावनाओं को ठेस पहुंचाए बिना इसे लागू किया जाएगा। इसके लिए बाकायदा कानूनी विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों से चर्चा की जाएगी और पूरी व्यावहारिकता के साथ इसे लागू किया जाएगा। कुल मिलाकर यदि सबकुछ सरकार के मुताबिक सही रहा तो मानसून सत्र 2026 में ही इस पर बड़ा फैसला आने की उम्मीद भी है।

यूसीसी लागू करने से क्या बदलेगा

यूसीसी के लागू होते ही प्रदेश में सभी धर्मों के लिए शादी, तलाक, विरासत और यहां तक कि गोद लेने की प्रक्रिया के लिए नियम एक समान होंगे। वहीं अलग-अलग मान्यताएं और पर्सनल लॉ खत्म हो जाएंगे। शादी और तलाक के लिए हर धर्म के अपने अलग-अलग नियम है। यूसीसी के बाद विवाह पंजीयन अनिवार्य हो जाएगा। न्यूनतम आयु समान होगी, तलाक के कानूनी आधार सभी के लिए एक समान होंगे।

जहां बहुविवाह वहां क्या बदलाव

कई पर्सनल लॉ में एक से अधिक विवाह की अनुमति या गुंजाइश रखी गई है। यूसीसी लागू होते ही ऐसे पर्सनल कानून खत्म या व्यवस्था खत्म हो जाएगी।

संपत्ति पर क्या दिखेगा असर

यूसीसी लागू होने के बाद बेटियों को भी परिवार के बेटों के बराबर संपत्ति लेने का अधिकार होगा। यूसीसी लागू होते ही यह नियम सभी के लिए समान रूप से मानने योग्य होगा।

मध्य प्रदेश के लिए सबसे बड़ी चुनौती क्या?

मध्य प्रदेश में बड़ी संख्या में जनजातीय और विशेष पिछड़ी जनजातियां निवास करती हैं। जहां पारंपरिक विवाह पद्धतियां चलन में हैं। इन परंपराओं को यूसीसी में शामिल करना या अलग प्रावधान बनाना प्रदेश सरकार के लिए बड़ी चुनौती साबित होगा। इन प्रथाओं और परंपराओं में दापा प्रथा (वधू का मूल्य देना), भगेली/लम्सना विवाह (युवक-युवती भाग कर शादी करते हैं और बाद में समाज मान्यता देता है), सेवा विवाह (वधू मूल्य न देने पर लड़का ससुराल में रहकर सेवाएं देता है), वहीं नातरा प्रथा (विधवा पुनर्विवाह या साथी बदलने की अनुमति) जैसी प्रथाएं बड़ी चुनौती साबित होंगी।

बता दें कि प्रदेश में आदिवासी जनजाति वर्ग की 47 फीसदी सीट आरक्षित हैं। वहीं सरकार हर वर्ग की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए यूसीसी लागू करने पर विचार कर रही है। ऐसे में यह सरकार के लिए बड़ी चुनौती होगी।

किन राज्यों में यूसीसी लागू, कहां चल रही प्रक्रिया

  • मध्य प्रदेश में गठित होने वाली है कमेटी, मंत्री शुरू करेंगे यूसीसी का अध्ययन।
  • गुजरात में मार्च 2026 में बिल पास हुआ है, अब इसे लागू करने की तैयारी चल रही है।
  • उत्तरप्रदेश में भी यूसीसी लागू करने की तैयारियां जारी हैं।
  • असम में नवंबर 2025 में यूसीसी लागू किया गया। यहां बहू विवाह निषेध कानून पास हुआ, यूसीसी की दिशा में कदम बढ़ाया।
  • उत्तराखंड में फरवरी 2024 में बिल पास होने के बाद, 27 जनवरी 2025 को लागू किया गया।
  • गोवा में 1867 के पुर्तगाली सिविल कोड के कारण यहां यूसीसी पहले से लागू है।

स्वतंत्र भारत का पहला राज्य जिसने लागू किया यूसीसी

बता दें कि गोवा के बाद और स्वतंत्र भारत की बात की जाए तो यूसीसी को अपने यहां लागू करने वाला देश का पहला उत्तराखंड था। यूसीसी लागू करने के बाद से यहां शादी और तलाक का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है। लिव इन रिलेशनशिप का 30 दिन में रजिस्ट्रेशन भी यहां अनिवार्य किया गया है। ऐसा न करने वालों पर 3 महीने तक जेल की सजा और जुर्माना या फिर दोनों का प्रावधान है।

उत्तराखंड का मॉडल गुजरात ने किया फॉलो

उत्तराखंड के मॉडल को ही गुजरात ने भी फॉलो किया। धोखे, दबाव या पहचान छिपाकर शादी को अपराध माना गया। इस पर 7 साल की सजा और जेल भी हो सकती है। 60 दिन में लिव इन रजिस्ट्रेशन कराना होगा। संपत्ति पर बेटे और बेटी का बराबर हक। एसटी को कानून से बाहर रखा गया है।

असम में पूरी तरह लागू नहीं यूसीसी

उधर असम ऐसा राज्य है जहां यूसीसी लागू है लेकिन पूरी तरह से नहीं। यहां बहु विवाह को अपराध घोषित किया गया है। वहीं छठी अनुसूचि क्षेत्र और एसटी को यूसीसी कानून के दायरे से बाहर रखा गया है।

बता दें कि सीएम डॉ. मोहन यादव प्रदेश में आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में कई बार घोषणा कर चुके हैं कि मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की बात कह चुके हैं। वहीं अब उन्होंने मंगलवार 7 अप्रैल को आयोजित कैबिनेट बैठक में मंत्रियों को अध्ययन के साथ ही इसे दिवाली 2026 से पहले 6 महीने में ही लागू करने की घोषणा भी कर दी है।