भोपाल

जूतों चप्पलों को लेकर सड़कों पर उतरी कांग्रेस, फिर ऐसे किया प्रदर्शन…

कैंसर वाले जूते चप्पल सहित कई मुद्दों पर लेकर कांग्रेस ने किया प्रदर्शन, जयस ने किया ये बड़ा ऐलान...
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Aug 27, 2018
congress protest
विरोध

भोपाल। मध्यप्रदेश में इन दिनों राजनीति जूते चप्पलों पर उतर आई है। इसी के चलते सोमवार को कांग्रेस ने सरकार की ओर से तेंदूपत्ता संग्राहकों को दिए गए जूते चप्पलों के विरोध में खूब नारेबाजी की।
दरअसल मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में सोमवार सुबह करीब 11 बजे, छ: नंबर बस स्टॉप पर विरोध प्रदर्शन किया गया। यह विरोध MP भाजपा सरकार द्वारा तेंदूपत्ता संग्राहकों को पहनाएं गए जूतों चप्पलों में खतरनाक रसायन होने के चलते किया गया।

सरकार की ओर से दिए गए इन जूतों चप्पलों के संबंध में कहा जा रहा है कि इन्हें पहनने से कैंसर होता है। विरोध के दौरान ही कुछ कार्यकर्ता एक चप्पल भी खरीद लाए और उसे हाथ में पकड़कर विरोध करने लगे। इसके साथ ही पेट्रोल डीजल को लेकर भी कार्यकर्ताओं ने विरोध जताया।

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इधर, जयस की इस घोषणा ने मचा दिया हंगामा...

वहीं दूसरी तरफ प्रदेश की 40 से ज्यादा विधानसभा सीटों पर सक्रिय 'जय आदिवासी युवा संगठन' यानि जयस ने ऐलान किया कि वे शिवराज सिंह चौहान द्वारा दिए गए कैंसर फैलाने वाले जूतों को वापस करेंगे और जयस की ओर से अब मुफ्त जूते चप्पल दिए जाएंगे। सूत्रों के अनुसार जयस की घोषणा के साथ ही कई पार्टियों में हडकंप की स्थिति बन गई है।

जयस ने कहा कि वे एक बड़ा प्रदर्शन करेंगे। जूते चप्पल लेकर वे कलेक्ट्रेट पहुंचेगे और उन्हें जमा करेंगें। यह शिवराज सरकार के खिलाफ प्रदेश स्तरीय प्रदर्शन होगा।

आपको बता दें कि सीएम शिवराज सिंह ने चरण पादुका योजना के अंतर्गत पुरूषों और महिलाओं को जूते चप्पल और 22 लाख तेंदूपत्ता संग्राहकों को पानी की बोतल बांटने का लक्ष्य तय किया था।

इसके अंतर्गत 8 लाख 14 हजार को पुरूषों को जूते व 10 लाख 20 हजार महिलाओं को चप्पल बांटी गई। कहा जाता है कि इन जूते चप्पलों के सोल में कैंसर फैलाने वाले रसायनों की पुष्टि हुई है। मध्यप्रदेश के लघु वनोपज संघ ने ही जूतों की जांच करवाई थी और जांच की रिपोर्ट आने से पहले ही यह जूते चप्पल बांट दिए गए।

यह भी आरोप है कि शिवराज सरकार ने इस योजना का नाम चरण पादुका योजना नाम जरूर दिया, पर इस योजना के तहत बांटी गई चरण पादुका का कोई बजट निर्धारित नहीं किया गया। तेंदूपत्ता संग्राहकों के बोनस के पैसे ही उन्हें खरीदा गया।

वहीं कुछ लोगों का कहना है कि तेंदूपत्ता संग्राहकों का बोनस का एक भाग बचा लिया गया था। जिसे इस तरह खर्च कर दिया गया और इस तरह बताया गया कि यह सरकार की तरफ से बोनस के अलावा दिया गया है।

Updated on:
27 Aug 2018 01:03 pm
Published on:
27 Aug 2018 01:01 pm