
Congress Leader Digvijaya Singh : मध्यप्रदेश के पूर्व सीएम और वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने रामभक्ति के नाम पर बीजेपी को एक बार फिर घेरा है। उन्होंने कहा है कि "रामभक्ति का आधार स्वार्थ नहीं, समर्पण है"। सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा निकाल रहे दिग्विजय सिंह ने कहा कि राम दान की लूट के खिलाफ यह कदम उठाया है। शुक्रवार को राजगढ़ जिले के करेड़ी स्थित श्रीमनकामनेश्वर परिसर से यात्रा का शुभारंभ हुआ। "सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा" का आज ग्यारहवां दिन है।
ऑफिस ऑफ दिग्विजय सिंह ने अपने एक्स हेंडल पर लिखा:
काम नहीं, क्रोध नहीं, लोभ नहीं, मोह नहीं,
भाव है प्रधान जहाँ, छल का तो प्रवेश नहीं।
यह विषय नहीं शोध का, है विषय आत्मबोध का।
इन्हीं सनातन मूल्यों के साथ हमारी “सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा” शिवधाम उज्जैन से रामधाम अयोध्या की ओर अग्रसर है। यह यात्रा न सत्ता के लोभ की है, न किसी के प्रति क्रोध या द्वेष की। यह सत्य के आग्रह, धर्म के स्वाभिमान और प्रभु श्रीराम के प्रति निष्कलंक आस्था की यात्रा है।
राम के नाम पर समर्पित चंदे और चढ़ावे में अनियमितताओं के आरोपों पर प्रश्न उठाना रामभक्त का धर्म है।
हमारा संकल्प धर्म की आड़ में छल और भ्रष्टाचार के विरुद्ध जन-जागरण करना, आस्था की पवित्रता बनाए रखना और सनातन के वास्तविक मूल्यों को जन-जन तक पहुँचाना है।
क्योंकि सनातन का आधार छल नहीं, सत्य है।
रामभक्ति का आधार स्वार्थ नहीं, समर्पण है।
स्वाभिमान का आधार अहंकार नहीं, आत्मबोध है।
जय सियाराम!
दिग्विजय सिंह पत्नी सहित उज्जैन से अयोध्या की पैदल यात्रा कर रहे हैं। 930 किमी लंबी सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा करीब 70 दिनों में पूरी होगी। इसमें बड़ी संख्या में दिग्विजय समर्थक भी साथ चल रहे हैं।
सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा के संबंध में दिग्विजय सिंह का कहना है कि यह राम दान की लूट के खिलाफ है। पैम्फलेट में अयोध्या के श्रीराम मंदिर के लिए एकत्रित चंदे और चढ़ावे की चोरी, मंदिर निर्माण तथा जमीनों की खरीद-फरोख्त में भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े गंभीर सवालों का व्यवस्थित विवरण प्रस्तुत किया गया है। हम इसी उद्देश्य से उज्जैन के शिवधाम से अयोध्या के रामधाम तक पैदल जनजागरण यात्रा पर निकले हैं, ताकि जन-जन तक ये सवाल पहुँचें और लोगों को तथ्यों के आधार पर सच्चाई जानने का अवसर मिले।
दिग्विजय सिंह ने खुद को रामप्रेमी बताया और कहा है कि प्रभु श्रीराम हमारी आस्था, श्रद्धा और मर्यादा के प्रतीक हैं। हमारा विरोध धर्म से नहीं, बल्कि धर्म और आस्था के नाम पर होने वाले किसी भी प्रकार के भ्रष्टाचार, अनियमितता और विश्वासघात से है। उन्होंने दोहराया कि राम के नाम पर दिया गया दान श्रद्धालुओं की पवित्र आस्था का प्रतीक है। उसकी प्रत्येक पाई का पारदर्शी हिसाब होना चाहिए। आस्था के नाम पर उठने वाले गंभीर सवालों का जवाब देना भी उतना ही आवश्यक है।
पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने कहा: हमारा संकल्प है -भगवान के नाम पर प्राप्त दान में पारदर्शिता, सनातन के नाम पर जवाबदेही और धर्म के नाम पर सत्य की प्रतिष्ठा। सत्य के लिए हमारे कदम निरंतर आगे बढ़ते रहेंगे।