
IAS Anurag Jain- भोपाल में कलेक्टर-कमिश्नर कॉन्फ्रेंस में मुख्य सचिव (सीएस) अनुराग जैन CS Anurag Jain ने अफसरों की लंबी क्लास ली। वीडियो कांफ्रेंस में गुरुवार को सीएस और अपर मुख्य सचिवों (एसीएस) ने पिछड़े जिलों के कलेक्टर, कमिश्नर व एसपी से चालान समय पर पेश नहीं करने, एनीमिया से पीडि़त गर्भवती महिलाओं के इलाज में पिछडऩे और स्कूलों में कम दाखिले जैसे विषयों पर सवाल पूछे। स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के एसीएस अशोक बर्णवाल ने कलेक्टर शिवम वर्मा से पूछा कि इंदौर में एनीमिया से जूझ रही महिलाओं में से 27 फीसद का ही इलाज क्यों हुआ ? बाकी का क्यों नहीं किया? क्या दिक्कत आ रही थी? कलेक्टर वर्मा को सटीक जवाब देने थे लेकिन वे नियम आधारित बातें करने लगे। जिस पर सीएस अनुराग जैन ने कलेक्टर वर्मा को फटकारते हुए कहा कि पहले सवाल सुनो और फिर जवाब दो। ऐसा नहीं चलेगा कि जो पूछा जा रहा है वह दिए जा रहे जवाब से मेल न खाए।
सूत्रों के मुताबिक मुख्य सचिव अनुराग जैन ने अन्य कलेक्टरों व संभागायुक्तों को भी नसीहत दे डाली कि वीसी को गंभीरता से लें। जो पूछा जाए उसका सटीक जवाब दें।
असल में भोपाल, सिंगरौली और इंदौर ने गर्भवती एनीमिक महिलाओं में से क्रमश: 25, 26 व 27 फीसदी का ही बेहतर इलाज किया है। तीनों जिलों की यह स्थिति प्रदेश में सबसे पिछड़ी है।
वीसी की शुरुआत कानून व्यवस्था की समीक्षा से शुरू हुई। रीवा जिला तय दिवस में चालान पेश करने में सबसे पिछड़े जिलों में शामिल है। जिस पर सीएस ने एसपी डॉ. गुरुकरण सिंह से कहा कि 60 दिन व 90 दिन के भीतर चालान पेश होने चाहिए। पिछडऩा किसी भी स्तर पर स्वीकार नहीं करेंगे। अन्य जिलों के एसपी से भी कहा कि जिनका काम ठीक नहीं है, वे सुधार लें।
भोपाल जिला सबसे कम नामांकन व ड्राप आउट में सबसे अव्वल बना हुआ है। सीएस ने कलेक्टर प्रियंक मिश्रा से वजह पूछी तो उन्होंने कई कारण बताए। जिस पर सीएस ने सुधार के निर्देश दिए। बता दें कि उक्त श्रेणी में भोपाल 47 फीसदी ही काम कर पाया है। उज्जैन की स्थिति भी अच्छी नहीं है। 5 जिलों वाला भोपाल संभाग 63 फीसदी पर अटका है।
वैसे तो प्रदेश भर में कुत्तों के काटने के प्रकरणों में वृद्धि हो रही है। दतिया भी इससे अछूता नहीं है। सूत्रों के मुताबिक नगरीय विकास एवं आवास विभाग के एसीएस संजय दुबे ने दतिया कलेक्टर से लंबी पूछताछ कर डाली। हालांकि कलेक्टर भी पीछे नहीं रहे। उन्होंने सटीक जवाब दिए।
भूमि अधिग्रहण के प्रकरण जल्द निपटाएं, पांडुलिपियों को डिजिटल करने के काम पूरे हों, जिन जिलों में कुत्तों के काटने के प्रकरण बढ़ रहे हैं, उसकी बार-बार समीक्षा करें, अवैध उत्खनन बर्दाश्त नहीं होगा। ई-साक्ष्य जुटाने पर फोकस बढ़ाएं, ड्रग मुक्त मप्र के लिए मिलकर काम हो, शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने और स्कूलों में बच्चों के नामांकन में कमी नहीं रहनी चाहिए।
मुख्य सचिव ने 25 बिंदुओं पर बुलाई थी वीसी
रीवा चालान पेश करने में सबसे पीछे
भोपाल भी स्कूली बच्चों के नामांकन में पिछड़ा
जिलों के पिछडऩे पर कलेक्टरों से मांगा जवाब
सीएस, एसीएस ने किए सवाल
कई अधिकारी जवाब नहीं दे पाए
पिछड़े जिलों के लिए तय की नई डेडलाइन