
भोपाल। राजधानी के तालाब और डेम में प्रवासी पक्षियों की आमद शुरू हो गई लेकिन जो स्थिति यहां के तालाबों की बन रही है वह इनके लिए खतरनाक है। शाहपुरा तालाब सहित यहां के दूसरे तालाबों में कुछ दिन पहले हजारों मछलियां मर गई थी। कचरे से पटने, कई नालों का गंदा पानी मिलने के साथ केमिकल को इसका इसका कारण बताया गया। बावजूद इसके जिम्मेदारों ने ध्यान नहीं दिया। इस अनदेखी से यहां भी राजस्थान की सांभर झील में हजारों पक्षियों की मौत की तरह किसी हादसे की आशंका है।
शहर के बड़ा तालाब, छोटा तालाब, शाहपुरा तालाब, मोतिया तालाब सहित आसपास के डेम में कई प्रवासी पक्षी आते हैं। इनमें साइबेरियन सहित नॉर्थेर्न पिनटेल, रेड क्रेस्टेड पोचार्ड, कॉमन कूट, रडी शेल्डक आदि प्रमुख हैं। एक्सपर्ट बताते हैं कि करीब 60 प्रजाति के पक्षी अभी तालाब और डेम पर चिन्हित किए जा चुके हैं। इनकी संख्या हजारों में हैं। बावजूद इसके तालाबों को प्रदूषण मुक्त रखने की दिशा में घोर लापरवाही सामने आई। शहर के तीन तालाबों में तो ये स्थिति सबसे खराब है।
मरी हुई मछलियां खाने से भी संक्रमण
जिन तालाबों में पानी ज्यादा है उनकी मछलियां मरने के मामले सामने आए। कारण केमिकल बताया जा रहा है लेकिन कई पक्षियों का ये भोजन होती हैं। इन्हें खाने से इन प्रवासी पक्षियों को भी असर हो सकता है। पर्यावरणविद् के मुताबिक सबसे ज्यादा प्रजनन क्षमता पर प्रभाव पड़ रहा है।
एक्सपर्ट कमेंट
शहर में तालाबों के हालात बहुत खराब हो गए। मानवजनित गतिविधियों के चलते यहां की परिस्थिति प्रवासी पक्षियों के अनुकूल नहीं रह गई। कचरा, कीचड़ ज्यादा होने से उन्हें खाने की समस्या आ सकती है। प्रजनन पर भी असर पड़ रहा है। यहां भी राजस्थान की सांभर झील में जो हादसा हुआ उस तरह के हालात बन रहे हैं। फिर भी कोई ध्यान नहीं दे रहा।
सुभाष सी पांडे, पर्यावरणविद्