भोपाल मास्टर प्लान का दायरा 1000 वर्ग किलोमीटर तक फैलाने के बाद सरकार अब वर्टिकल डेवलपमेंट यानी ऊंचाई वाले विकास की बात कर रही है। यानी कम जगह में अधिक लोगों के लिए स्थान निकलना।
भोपाल. भोपाल मास्टर प्लान का दायरा 1000 वर्ग किलोमीटर तक फैलाने के बाद सरकार अब वर्टिकल डेवलपमेंट यानी ऊंचाई वाले विकास की बात कर रही है। यानी कम जगह में अधिक लोगों के लिए स्थान निकलना। पत्रिका ने जब विशेषज्ञों से चर्चा की और पूछा कि विकास विस्तार या ऊंचाई में, कौन सा बेहतर है? बताया गया कि यदि सरकार एक ही क्षेत्र में केंद्रित वर्टिकल डेवलपमेंट को बढ़ाती है तो उसे मौजूदा अधोसंरचना में आमूलचूल बदलाव करना होगा। कम जगह में अधिक लोगों के रहने, आने-जाने, काम की सहूलियत के लिए 10 लेन की सड़कें बनानी होंगी। इसी अनुपात में पानी, सीवेज और अधोसंरचना के अन्य काम मजबूत करने होंगे। मास्टर प्लान के मौजूदा प्रावधानों और दायरे के अनुसार अगर विस्तार में विकास होता है तो सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करना होगा, जिससे सभी क्षेत्र आपस में जुड़े रहें। फिलहाल भोपाल दोराहे पर है। यहां की मौजूदा प्लानिंग शहर के विस्तार को बढ़ाने के लिए की गई है और मौजूदा सरकार क्षेत्र विशेष में ऊंचाई वाले विकास करने पर जोर दे रही हैं।
ये है मॉडल
वर्टिकल डेवलपमेंट: इनमें छोटी जगह पर अधिक लोगों को समायोजित करने बहुमंजिला भवन बनाए जाते है। डेंसिटी बढ़ाते हैं, ताकि लोगों को अधिक आवाजाही न करना पड़े। निवास क्षेत्र में ही कार्यस्थल और अन्य सुविधाएं मिल जाएं।
हॉरिजेंटल डेवलपमेंट: विकास विस्तार में होता है। अधिक जमीन पर कम सुविधाएं होती हैं। लोग दूर रहते हैं, और कार्यस्थल से आवास तक की दूरी अपेक्षाकृत अधिक रहती है। बहुमंजिला भवनों की बजाय कम ऊंचाई के मकान होते है।
एक्सपर्ट व्यू...
मौजूदा एफएआर मददगार नहीं
वर्टिकल डेवलपमेंट में अधोसंरचना हेवी होना चाहिए। क्योंकि डेंसिटी को संभालना होगा। ट्रैफिक, सीवेज, पानी, सड़क जैसी सहूलियत पर्याप्त और मजबूत होगी तभी छोटे क्षेत्र में बड़ी आबादी को संभाला जा सकेगा। आज मुम्बई जैसे शहरों में 10 लेन रोड भी छोटी पड़ती है। वर्टीकल में मौजूदा अधोसंरचना को देखना होगा, कि वो बढऩे वाले भार को वहन कर पाएगा या नही। हॉरिजेंटल विकास में शहर बंट जाता है, लेकिन सार्वजनिक परिवहन मजबूत न हो तो शहरवासी एक दूसरे से कट भी सकते है। किसी एक क्षेत्र विकसित सुविधा का लाभ दूसरे क्षेत्र को मिलने में दिक्कत आ सकती है।
अवनीश सक्सेना, पूर्व चीफ आर्किटेक्ट बीडीए
दोनों बेहतर हैं, लेकिन मजबूत अधोसंरचना हो तो फिर शहर को वर्टिकली ही विकसित करना चाहिए। इसका सीधा फायदा खेतों को और शहर के किनारे पर्यावरण को होगा। खेती की जमीन बच जाएगी और नए विकास के लिए पेड़ भी नहीं कटेंगे। वर्टिकली डेवलपमेंट में मजबूत अधोसंरचना पर अधिक ध्यान देना होगा और प्लानिंग भी मजबूत करना होगी। शहर की सीमा से बाहर विकास हो गया है। आवासीय इकाइयों के साथ व्यवसायिक गतिविधि, अन्य संस्थान भी बन गए हैं और इनकी शहर के अन्य हिस्सों से कनेक्टिविटी की इस समय व्यवस्था नहीं है। ऐसे में लोग शहरी सुविधाओं का लाभ नहीं ले पाते। इसके लिए विशेष प्लानिंग की जरूरत है। सरकार को वर्टिकली डेवलपमेंट के लिए मौजूदा एफएआर मददगार नहीं है। कुछ दायरे तक निर्माण में एफएआर से पूरी छूट देना चाहिए।
राजेश चौरसिया, प्लानर- स्ट्रक्चरल इंजीनियर
मौजूदा मास्टर प्लान और उसके प्रावधानों को देखते हुए तो शहर के वर्टिकली डेवलपमेंट की बात ही नहीं की जा सकती। शहर का विस्तार सीहोर तक कर दिया गया है। कोलार से आगे तक कॉलोनियां प्लान में है। इंदौर रोड से लेकर होशंगाबाद रोड और नरसिंहगढ़ रोड के आगे तक शहर को फैला दिया गया है। ऐसे में वर्टिकली डेवलपमेंट का औचित्य नहीं है। अब सरकार वर्टीकल डेवलपमेंट की बात करती है तो प्लानिंग एरिया और उससे बाहर जो विकास हो गए हैं उनके बारे में भी सोचना होगा। वर्टिकल और हॉरिजेंटल दोनों ही डेवलपमेंट बेहतर हैं।
अमोघ गुप्ता, आर्किटेक्ट