
Digvijaya Singh- उज्जैन स्थित वीर भारत न्यास ट्रस्ट को एक रुपए की लीज पर जमीन दिए जाने के मामले में अब प्रदेश के दोनों प्रमुख दलों- बीजेपी और कांग्रेस के भीतर अंत:कलह मच गई है। पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने सोमवार को बड़वानी प्रवास के दौरान एक बार फिर अपने बयान को दोहराते हुए जीतू पटवारी Jitu Patwari के द्वारा भूमि आवंटन में लगाए आरोपों को खारिज किया। दिग्विजय ने कहा, उन्होंने दस्तावेजों की खुद जांच कराई। इतना ही नहीं, उन्होंने मामले में बीजेपी की भी पोल खोल दी। दिग्विजय सिंह ने साफ कहा कि ट्रस्ट से जुड़े दस्तावेज सत्ताधारी दल के ही एक विधायक ने मुझे उपलब्ध कराए थे। हालांकि उन्होंने विधायक का नाम नहीं बताया, लेकिन उनके बयान से आलोट विधायक चिंतामणी मालवीय का नाम चर्चा में आ गया। बीजेपी संगठन में भी इस बयान को लेकर विचार विमर्श किया जा रहा है।
सांसत में राज्य सरकार
बता दें कि कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष जीतू पटवारी ने वीर भारत न्यास ट्रस्ट को जमीन देने पर एमपी सरकार को घेरा है। उन्होंने आरोप लगाया कि 500 करोड़ की जमीन को एक रुपए की लीज पर दे दिया गया है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने कहा कि जिस न्यास को भूमि आवंटित हुई, वह सरकारी ट्रस्ट है। उसके पदेन अध्यक्ष स्वयं मुख्यमंत्री, उपाध्यक्ष प्रदेश के संस्कृति मंत्री और सचिव सरकारी अधिकारी होते हैं। दिग्विजय सिंह ने कहा, यह जानकारी जीतू पटवारी को नहीं थी इसलिए उन्होंने ऐसा बयान दिया था। दिग्विजय के इस बयान के बाद पार्टी में मुद्दों को लेकर खींचतान उभरकर सामने आई।
पूर्व सीएम दिग्विजय ने मीडिया को दिए अपने बयान में बड़ा खुलासा कर भाजपा के खेमे में भी हलचल बढ़ा दी। उन्होंने कहा, सरकार से नाराज एक भाजपा विधायक ने ही उन्हें ट्रस्ट से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध कराए थे। हालांकि उन्होंने विधायक का नाम नहीं बताया, लेकिन सियासी गलियारे में भाजपा से आलोट विधायक चिंतामणी मालवीय का नाम चर्चा में आ गया। बता दें कि चिंतामणी और राज्य सरकार के बीच अदावत किसी से छिपी नहीं है। सूत्रों के अनुसार, बीजेपी संगठन में इस बयान पर मंथन भी चल रहा है।
जीतू पटवारी के बयान को निराधार करार देने के बाद से दिग्विजय सिंह और जीतू पटवारी के बीच अनबन की हलचलें तेज होने लगी। इसी बीच कांग्रेस अलाकमान ने जीतू पटवारी के एक बयान को आगे बढ़ाकर उनका समर्थन किया। पटवारी द्वारा एक्स पर किए एक पोस्ट को जयराम रमेश ने आगे बढ़ाते हुए कहा कि मध्यप्रदेश में हुए भूमि घोटाले पर जवाबदेह ठहराने के लिए कांग्रेस लगातार संघर्ष करती रहेगी। एक ओर दिग्विजय बयान को नकार रहे तो आलाकमान समर्थन में है।