
भोपाल। भगवान श्रीराम के परमभक्त बजरंग बली को माता सीता ने अमर रहने का वरदान इसी दिन दिया था। मान्यता है कि जहां भी सुंदरकांड का पाठ विधि-विधान से किया जाएगा वहां हनुमानजी अदृश्य रूप में जरूर पहुंचते हैं। हनुमानजी श्रीराम के भक्तों की परेशानियां दूर करते हैं और इस दिन भी हनुमानजी को सिंदूर का चोला चढ़ाने का विशेष महत्व है।
mp.patrika.com आपको बताने जा रहा है दीपावली के एक दिन पहले चतुर्दशी के दिन भी हनुमान जयंती मनाई जाती है। भोपाल के कथा वाचक पं. वल्लभानंद शुक्ल के मुताबिक श्रीराम के परम भक्त हनुमानजी की जयंती वर्ष में दो बार मानी गई है।
छोटी दीपावली के दिन मानी गई है हनुमान जयंती
लक्ष्मीपूजन वाले दिन से एक दिन पहले चतुर्दशी के दिन जब माता सीता श्रंगार कर रही थी, जब माता सीता अपनी मांग में सिंदूर लगा रही थी, तो हनुमानजी ने उन्हें सिंदूर लगाते हुए देख लिया। हनुमानजी ने जिज्ञासावश उनसे पीछ लिया कि माता आप अपनी मांग में सिंदूर क्यों लगा रही हैं। इस पर माता सीता ने हनुमानजी से कहा कि सिंदूर को मांग में लगाने से मेरे स्वामी की आयु और सौभाग्य बढ़ता है।
माता सीता ने बताया सिंदूर लगाने का कारण
यह सुन हनुमानजी उत्साहित हो गए। उन्होंने सोचा कि यदि सीता माता की मांग में इतना-सा सिंदूर लगाने से भगवान श्रीराम की आयु और सौभाग्य बढ़ सकता है तो मैं भी पूरे शरीर पर सिंदूर लगाउंगा तो मेरे श्रीराम हमेशा के लिए अमर हो जाएंगे और उनकी कृपा मुझ पर हमेशा-हमेशा के लिए बनी रहेगी।
तो पूरे शरीर पर लगा आए सिंदूर
यह बात हनुमानजी को इसके बाद हनुमानजी अपने पूरे शरीर पर सिंदूर लगाकर पहुंच गए। यह नजारा देख सभी हैरान रह गए। जब माता सीता ने पूरे शरीर पर सिंदूर लगाने का कारण पूछा तो हनुमानजी बोले- माता, आप ही ने तो कहा था कि सिंदूर लगाने से स्वामी की उम्र बढ़ जाती है और सौभाग्य भी बढ़ जाता है। तो मैंने पूरे शरीर पर सिंदूर लगा लिया है। अब मेरे श्रीराम की भी अमर हो जाएंगे और सौभाग्य हमेशा-हमेशा के लिए रहेगा।
तो हनुमान को मिला अमर रहने का वरदान
श्रीराम के प्रति इतनी भक्ति देख सीतामाता भी प्रसन्न हो गई। उन्होंने तुरंद ही हनुमान को अमर रहने का वरदान दे दिया। हनुमानजी को यह वरदान दीपावली के दिन ही मिला था। तभी से हनुमानजी को अमर माना गया है। तभी ससे दीपावली के दिन उनका दूसरा जन्म भी कहा जाता है यानी हनुमान जयंती के रूप में भी इस दिन विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। तभी से हनुमानजी की वर्ष में दो बार हनुमान जयंती मनाई जाती है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार हनुमानजी को सिंदूर चढ़ाने की यह कहानी कुछ धार्मिक पुस्तकों में भी मिलती है। यह भी बताया जाता है कि वायु पुत्र हनुमानजी को सिंदूर अर्पित करने से वे बेहद प्रसन्न हो जाते हैं।