
Bhopal news: मौसम बदलते ही एमपी के भोपाल में स्वाइन फ्लू ने तेजी से पैर पसारना शुरू कर दिया है। मरीजों की संख्या बढ़कर 70 हो गई है। इनमें अकेले सितंबर में 48 संक्रमित मिले हैं। हमीदिया अस्पताल में 17 मरीज भर्ती है। इंदौर के बाद भोपाल में बढ़ते संक्रमण ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों के अनुसार नमी और दिन-रात के तापमान में गिरावट के कारण एच-1एन-1 वायरस ज्यादा सक्रिय हो गए है। विशेषज्ञों के अनुसार एच-1-एन-1 का संक्रमण सबसे ज्यादा उन लोगों के लिए चिंता का कारण है, जिन्हें पहले से सांस की बीमारी, डायबिटीज, हृदय रोग या अन्य गंभीर बीमारी है।
बुजुर्गों और कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों में संक्रमण के गंभीर होने का खतरा अधिक रहता है। बता दें, भोपाल में एच-1 एन-1 से राम सिंह (80) की मौत हुई है। स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, संक्रमण के चलते उन्हें गंभीर रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम और एक्यूट रेस्पिरेटरी फेल्योर की समस्या हो गई थी। इसके अलावा बुजुर्ग पहले से ही हृदय रोग, उच्च रक्तचाप और टाइप-2 डायबिटीज जैसी बीमारियों से पीड़ित थे। उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। सीएमएचओ डॉ. मनीष शर्मा ने बताया कि स्थिति को देखते हुए अस्पतालों को अलर्ट कर दिया गया है।
मरीज बढ़ने से सरकारी अस्पतालों में जांच और उपचार व्यवस्था पर भी दबाव बढ़ रहा है। केवल एम्स भोपाल में स्वाइन फ्लू की जांच हो रही है। मरीजों की संख्या बढ़ने से जांच रिपोर्ट मिलने में तीन से चार दिन लग रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के निर्देश के 15 दिन बाद भी गांधी मेडिकल कॉलेज में स्वाइन फ्लू की जांच शुरू नहीं हुई है। जांच किट उपलब्ध नहीं है। इससे बहुत से मरीज जांच के लिए निजी अस्पतालों का रुख कर रहे हैं।
-अचानक तेज बुखार
-ठंड लगना
-लगातार सूखी खांसी
-गले में दर्द, सिरदर्द, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द
-अत्यधिक कमजोरी तथा सांस लेने में तकलीफ
-सांस फूलने या छाती में भारीपन
भीडभाड़ में मास्क पहनें। खांसते-छींकते समय मुंह-नाक ढकें। हाथ बार-बार धोएं और संक्रमित व्यक्ति से दूरी रखें। बुखार या सांस संबंधी लक्षण होने पर खुद दवा लेने के बजाय डॉक्टर की सलाह लें। डॉ. मनीष शर्मा, सीएमएचओ भोपाल