भोपाल में एक साल में करीब 16 हजार के लगभग डॉग बाइट की घटनाएं होती हैं। कुत्तों के काटने की सर्वाधिक घटनाएं दिसंबर और जनवरी माह में होती हैं।
भोपाल. राजधानी में एक साल में करीब 16 हजार के लगभग डॉग बाइट की घटनाएं होती हैं। कुत्तों के काटने की सर्वाधिक घटनाएं दिसंबर और जनवरी माह में होती हैं। इस साल सर्दियों का सीजन लंबा चल रहा है, इसलिए समस्या ज्यादा बढ़ गई है। शहर में बढ़ती डॉग बाइट की घटनाओं को लेकर गुरुवार को संभागायुक्त पवन शर्मा ने बैठक बुलाई। जिसमें नगर निगम और पशुपालन विभाग के अफसरों ने यह जानकारी दी। बैठक में तय हुआ कि नगर निगम और प्रशासन के अफसर रहवासी संघों के साथ बैठक कर समस्याओं के समाधान का रास्ता निकालेंगे।
तीन साल में हुईं घटनाओं की समीक्षा
बैठक पिछले तीन वर्षों में स्ट्रीट डॉग के आक्रामक होने और नागरिकों को काटने के आंकड़ों की समीक्षा की गई। इसमें आधा दर्जन गंभीर घटनाओं का जिक्रहुआ। उप संचालक पशु चिकित्सा ने बताया कि ठंड के अलावा, इन दिनों खाने की कमी और नवजात पिल्लों की सुरक्षा को लेकर भी मादा डॉग आक्रामक होती हैं। बताया गया है कि शहर में कुत्तों की आबादी का कोई अधिकृत आंकड़ा नहीं है। लेकिन एक अनुमान के अनुसार राजधानी में 1.70 लाख आवारा कुत्ते हैं।
संभागायुक्त ने दिए ये निर्देश
- सभी 8 डॉग स्क्वॉड टीमों को सक्रिय कर डॉग वैक्सीनेशन और नसबंदी में तेजी लाई जाए।
-अस्पतालों में एंटी रैबीज इंजेक्शन की पर्याप्त व्यवस्था हो। एक हजार नए इंजेक्शन खरीदने के निर्देश।
- रहवासी संघों के साथ बैठक कर कुत्तों की समस्याओं को जानने और निराकरण के निर्देश।
- नसबंदी सेंटरोंं की कमियां दूर कर पर्याप्त केज की व्यवस्था हो।
ये एडवाइजरी जारी
- कुत्ता काटने की घटनाओं या आतंक पर हेल्पलाइन 155304 पर कॉल करें।
- बच्चों को आवारा कुत्तों से दूरी बनाएं। बच्चे वाली मादा श्वान से बच्चों को दूर रखें।
- कुत्तों से अनावश्यक छेड़छाड़ न करें, पत्थर न मारें। परेशान न करें।
- तीव्र ध्वनि के पटाखे न छोड़े। ऐसे श्वानों का झुंड जिसमें मादा गर्मी में है तो दूर रहें।
- कुत्ता शेड या कार के नीचे बैठा है तो वह ठंड से बचने के लिए बैठा है, इसलिए उसे न मारें।
- पशु प्रेमी पेट एडॉप्शन मुहिम चलायें। पेट्स का सही ख्याल रखें।
- निश्चित स्थान पर ही कुत्तों को फीडिंग कराएं, ताकि किसी को परेशानी न हो।