- कमलनाथ सरकार का एक साल :
भोपाल। कमलनाथ सरकार के एक साल में यदि सबसे बड़ी बाधा कोई रही है, तो वह आर्थिक मोर्चे की चुनौतियां रही हैं। सरकार को खाली खजाना मिला, जिसके चलते वचनों को पूरा करने और विकास का नया रोडमैप लिखने में दिक्कतें आईं। सरकार ने इनमें रास्ता निकालकर आर्थिक हालात को संभालने में पूरी ताकत लगाई। इस मोर्चे पर कही सरकार ठिठकी, तो कही रास्ता निकालकर आगे बढ़ गई।
कभी कलेक्टर गाइडलाइन में 20 फीसदी की कमी करके राजस्व बढ़ाने के रास्ते ढूंढे, तो पेट्रोल-डीजल पर टैक्स और कभी हीरे की नीलामी से राजस्व बटोरने की कोशिश की गई। अब सरकार के पास आगे के चार साल वित्तीय हालात को संभालने और आगे बढऩे के लिए महत्वपूर्ण हैं। जनता को उम्मीद है कि सरकारी खजाना अच्छी हालत में आए, ताकि वचन पूरे हो और जनता को सौगातों पर सौगातें मिलें।
बजट के ऐसे हालत-
- 2.14 लाख करोड़ का बजट इस बार कमलनाथ सरकार ने पेश किया
- 1.83 लाख करोड़ का कर्ज है सरकार पर (कैग के मुताबिक)
- 13600 करोड़ का कर्ज अभी तक कमलनाथ सरकार ने लिया
ये हैं बड़ी उम्मीदें-
- सरकारी खजाने की स्थिति राजस्व बढ़ाकर सुधारी जाए। इसके लिए सरकार नए टैक्स की बजाए टैक्स लीकेज व रिकवरी बढ़ाकर हालात सुधार सकती है।
- रोजगार को बढ़ावा देने की उम्मीद भी अर्थ व्यवस्था से की जाती है, क्योंकि रोजगार में बढ़ोत्तरी होने पर अर्थ व्यवस्था सुधरती है। सरकार ने एक लाख लोगों को रोजगार देना तय किया है। इससे भी अर्थ व्यवस्था सुधरेगी।
- सरकारी खजाने की हालात सुधरने से योजनाओं के लिए अधिक पैसा मिलेगा। सबसे ज्यादा फायदा किसानों की कर्ज माफी के लिए आएगा, क्योंकि सरकार पर इस सेक्टर में 36 हजार करोड़ का बोझ है। इसके लिए पैसा मिलेगा।
- सरकार स्व-सहायता समूहों के कर्ज माफ करना चाहती है। इसके लिए भी पैसा मिल पाएगा। इसके अलावा स्व-सहायता समूहों के सुदृद्धीकरण के लिए योजनाएं लाई जा सकेगी।
- सरकार के करीब 100 ऐसे बड़े वचन हैं, जिनको पूरा करने के लिए वित्तीय स्थिति का सुधरना जरूरी है। वित्तीय स्थिति सुधरने पर सरकार इन वचनों को बेहतर तरीके से पूरा कर पाएगी।
- प्रदेश में 91 किमी से ज्यादा सड़कें उखड़ी पड़ी हैं, इनकी मरम्मत व दोबारा निर्माण सरकारी खजाने के हालात सुधरने से हो सकेंगे। इसके अलावा नई सड़कों के निर्माण काम तेजी से हो पाएंगे।
- राम वनगमन पथ, वैदिक सिटी, स्मार्ट सिटी, मेट्रो, रेपिड रेल सिस्टम, स्मार्ट विलेज, आईटी हॅब निर्माण सहित अनेक विकास प्रोजेक्ट सरकारी खजाने की हालत सुधरने पर पूरे हो पाएंगे।
- सरकारी विभागों में खाली पदों पर सौ फीसदी भर्ती का रास्ता तभी खुलेगा, जब सरकारी खजाने की स्थिति सुधरेगी। अभी सरकार खाली पदों पर भर्ती कर रही है, लेकिन सभी पदों पर भर्ती के हालात अर्थ व्यवस्था सुधरने से बनेंगे।
- सरकारी खजाने की हालत सुधरने पर सरकार बिजली, स्वास्थ्य और पानी सहित अन्य मूलभूत आवश्यकताओं के लिए भी सबसिडी व योजनाओं का दायरा बढ़ा सकेगी।
राजस्व के ये नए रास्ते-
- टैक्स चोरी को रोकने के जतन। टैक्स संबंधित आनलाइन सिस्टम होगा।
- रियल एस्टेट पॉलिसी, लैंड पूलिंग से राजस्व में बढ़ोत्तरी होगी
- नगरीय निकायों के स्तर पर राजस्व वृद्धि। प्रॉपटी-जल कर में वृद्धि।
- खर्च में कटौती। केंद्रीय प्रोजेक्ट से ज्यादा पैसा लाने पर जोर दिया जाएगा।
- सरकारी जमीन व अन्य संसाधनों से राजस्व बढ़ाने की नीति पर फोकस
- नए टैक्स की बजाए टैक्स लीकेज रोकने व वसूली बढ़ाने की नीति पर काम।
- औद्योगिक निवेश बढऩे से रोजगार व अर्थ व्यवस्था में मजबूती के आसार।
इसलिए आर्थिक चुनौती बढ़ी-
- जीएसटी से टैक्स के अधिकार सीमित, केंद्रीय शेयर भी अटक रहा
- केंद्र से मिलने वाले बजट व राहत में लगातार कटौती हुई
- बारिश के कहर से 17 हजार करोड़ से ज्यादा का नुकसान
- पिछली सरकार के 2300 करोड़ से ज्यादा बकाया का बोझ
- विधानसभा चुनाव के समय पिछली सरकार ने खजाना खाली किया
- केंद्र ने नई योजनाओं के लिए पैसा नहीं दिया, अपनी किश्त नहीं दी
- पिछली सरकार ढ़ेरों घोषणाएं कर गई, उनका बोझ उठाना पड़ा
अब तक ये जतन किए-
- योजनाओं का दोहरीकरण को खत्म किया
- पीपीपी मोड पर ज्यादा काम, ताकि सरकारी पैसा कम लगे
- सरकारी धन के लीकेज पर रोकथाम के प्रयास
- मितव्ययता अपनाकर फिजूलखर्ची पर लगाम के प्रयास
- नए निर्माण काम व नई योजनाओं से दूरी बनाई
- अधिक वर्ग को प्रभावित करने वाली योजनाओं पर फोकस
- वित्तीय खर्च वाले वचनों को अभी दूर रखा गया
किसका क्या कहना-
पिछली भाजपा सरकार ने खस्ताहाल सरकारी खजाना दिया था, लेकिन हमने अर्थ व्यवस्था को संभाला है। बिना कोई नया टैक्स लगाए हमने जनता को राहत पहुंचाने का काम किया। केंद्र ने भी आर्थिक मदद व पूर्व से मंजूर बजट देने में भेदभाव किया, लेकिन कमलनाथ सरकार ने जनता के हित में अपने स्तर पर बजट की कमी नहीं आने दी। अब आने वाले चार साल में भी हम अपने सभी वचन पूरे करेंगे और विकास का नया इतिहास रचेंगे।
- तरूण भनोत, वित्त मंत्री
जब से देश आजाद हुआ, तब से लेकर अब तक मध्यप्रदेश के हालात इतने कभी खराब नहीं हुए। किसानों के दो लाख रुपए तक कर्ज माफी को तो छोडि़ए, वित्तीय मामलों से जुड़े दूसरा कोई भी वादे सरकार पूरे नहीं कर पाई है। न कोई शासन है और न कोई प्रशासन, सरकार के वित्तीय प्रबंधन व घोषणाओं में अंतर है। इसलिए वह कभी वचन पूरे नहीं कर पाएगी।
- जयंत मलैया, पूर्व वित्त मंत्री, मप्र