कोविड के दौरान पर्यावरण संकट देख इलेक्ट्रिक साइकिल बनाने का आया आइडिया
पर्यावरण में तेजी से हो रहे बदलाव हम सभी को प्रभावित कर रहा है। कोरोना के दौरान हमने देखा कि पर्यावरण को सुरक्षित नहीं किया तो हमें इसके परिणाम भुगतने होंगे। तब हमने इलेक्ट्रिक साइकिल साइकिल बनाने का आइडिया आया। हम चार दोस्तों ने मिलकर स्टार्टअप शुरू किया, आज हमारी कंपनी 400 करोड़ की बन चुकी है। ये कहना है आदित्य ओझा का, आदित्य ने बताया कि बिजनेस और मार्केटिंग के प्रति शुरू से ही लगाव था तो गुजरात जाकर पढ़ाई की।
कॉलेज के दिनों में भी शुरू किया था स्टार्टअप
आदित्य ने बताया कि पढ़ाई के बाद दुबई जाकर नौकरी की। मेरा सपना खुद का बिजनेस स्थापित करने का था, 2020 में नौकरी छोड़कर बिजनेस शुरू करने का जोखिम लेने का फैसला लिया। यहां आकर राजीव गंगोपाध्याय, कुणाल गुप्ता, सुमेध बट्टेवार और मैंने ईमोटार्ड की नींव डाली। कॉलेज के दिनों में ऑन बाइक्स स्टार्टअप सफलतापूर्वक स्थापित कर चुके थे। अब तक 80 हजार से ज्यादा इलेक्ट्रिक साइकि बेच चुके हैं।
एक कमरे से शुरू किया था बिजनेस
इमोटराड के सह-संस्थापक राजीव ने बताया कि कोरोना काल में एक कमरे में हमने बिजनेस शुरू किया था। हम न केवल इलेक्ट्रिक साइकिल बना रहे थे, बल्कि हम एक समय में एक पैडल के ध्येय के साथ भविष्य का निर्माण भी कर रहे थे। वहीं, सीइओ कुणाल ने बताया कि हमारे स्टार्टअप को कई बार रिजेक्शन का सामना करना पड़ा। हर रिजेक्शन ने हमारे संकल्प को ओर मजबूत बनाया। पंथेरा ग्रोथ पार्टनर्स से 164 करोड़ की फंडिंग हासिल की। हमने चुनौतियों को अवसरों में बदला।