भोपाल

अलग ‘ब्लड ग्रुप’ के बीच पहली बार सफल किडनी ट्रांसप्लांट, पिता ने बेटे को दी नई जिंदगी

MP News: विशेषज्ञों के मुताबिक, भारत में इस तरह के ट्रांसप्लांट कुल जीवित डोनर किडनी प्रत्यारोपण का केवल 5 से 10 प्रतिशत ही होते हैं।
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Apr 24, 2026
Kidney Transplant
Kidney Transplant (Photo Source- freepik)

MP News: एम्स भोपाल ने पहली बार एबीओ-इनक्पैटिबल किडनी ट्रांसप्लांट कर लिया है। इस जटिल प्रक्रिया में अलग-अलग ब्लड ग्रुप के बावजूद पिता ने अपने बेटे को किडनी दान कर नई जिंदगी दी। इस सफलता के बाद अब ऐसे मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी, जिन्हें ब्लड ग्रुप मैच न होने के कारण ट्रांसप्लांट में दिक्कत आती थी। यह तकनीक न सिर्फ डोनर की उपलब्धता बढ़ाएगी, बल्कि मरीजों का इंतजार भी कम करेगी। इस ट्रांसप्लांट में 47 वर्षीय पिता (एबी पॉजिटिव) ने अपने 22 वर्षीय पुत्र (ए पॉजिटिव) को किडनी डोनेट की। सामान्य तौर पर अलग ब्लड ग्रुप होने पर शरीर नई किडनी को स्वीकार नहीं करता, लेकिन आधुनिक तकनीकों और विशेष इलाज पद्धति से इस जोखिम को काफी हद तक कम किया गया।

देश में सिर्फ 5-10 प्रतिशत ही होते हैं ऐसे ट्रांसप्लांट

विशेषज्ञों के मुताबिक, भारत में इस तरह के ट्रांसप्लांट कुल जीवित डोनर किडनी प्रत्यारोपण का केवल 5 से 10 प्रतिशत ही होते हैं। यह प्रक्रिया तकनीकी रूप से बेहद जटिल और संसाधनों की दृष्टि से चुनौतीपूर्ण होती है। यह एम्स भोपाल में किया गया 20वां किडनी ट्रांसप्लांट भी है, जो संस्थान की बढ़ती चिकित्सा क्षमता और विशेषज्ञता को दशार्ता है। इस ऑपरेशन को नेफ्रोलॉजी, यूरोलॉजी, एनेस्थीसिया, ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन समेत कई विभागों की संयुक्त टीम ने अंजाम दिया।

विशेषज्ञों की टीम ने किया कमाल

इस जटिल सर्जरी में डॉ. महेंद्र अटलानी, डॉ. देवाशीष कौशल, डॉ. केतन मेहरा, डॉ. कुमार माधवन सहित कई विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम शामिल रही, जिन्होंने समन्वय के साथ इस चुनौतीपूर्ण प्रक्रिया को सफल बनाया। ए्स भोपाल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. विकास गुह्रश्वता और कार्यपालक निदेशक एवं सीईओ डॉ. माधवानंद कर ने इस उपलब्धि पर पूरी टीम को बधाई दी।

जानें क्यों खास है यह ट्रांसप्लांट

माना जाता है कि किडनी ट्रांसप्लांट के लिए डोनर और मरीज का ब्लड ग्रुप एक होना जरूरी होता है। अलग ब्लड ग्रुप से शरीर नई किडनी स्वीकार नहीं करता और उसे नुकसान पहुंचा सकता है। यही सबसे बड़ी चुनौती होती है। खून की विशेष सफाई की डॉक्टरों ने ट्रांसप्लांट से पहले मरीज के खून की विशेष प्रक्रिया से सफाई की, ताकि शरीर नई किडनी को अस्वीकार न करे। इसके साथ दवाओं से शरीर की प्रतिक्रिया को नियंत्रित किया गया। इसके बाद ट्रांसप्लांट किया गया।

भोपाल में फैल रहा डायरिया

भीषण गर्मी का असर अस्पतालों में नजर आने लगा है। इसके चलते हीट स्ट्रोक के मरीजों में तेजी से इजाफा हो रहा है। जेपी एवं हमीदिया अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन दर्ज होने वाले प्रकरणों में बच्चों की संख्या सर्वाधिक देखी जा रही है। बच्चों में हीट स्ट्रोक के चलते उल्टी दस्त के लक्षण देखने मिल रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग ने एडवाइजरी जारी कर लोगों को अधिक से अधिक पेय पदार्थ का इस्तेमाल करने धूप की सीधी किरणों से बचने एवं बच्चों को ओआरएस का घोल पिलाने की हिदायत दी है।

Updated on:
24 Apr 2026 11:54 am
Published on:
24 Apr 2026 11:54 am