मध्य प्रदेश सरकार सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी पर राज्य सूचना प्रकोष्ठ शुल्क बढ़ाने जा रही है। नए प्रस्ताव के तहत सरकार सूचना प्रकोष्ठ शुल्क में 90 फीसदी की बढ़ोतरी की गई है।
भोपाल/ सूचना का अधिकार कानून (RTI) के जरिये जिस तरह एक आम व्यक्ति विभागों से इच्छुक जानकारी की मांग करता है। उस जानकारी को अब हासिल कर पाना महंगा फैसला होने वाला है। दरअसल, मध्य प्रदेश सरकार सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी पर राज्य सूचना प्रकोष्ठ शुल्क बढ़ाने जा रही है। इसके लिए प्रस्ताव भी तैयार किया जा चुका है, जिसे विधि विभाग को परीक्षण के लिए भेजा गया है। नए प्रस्ताव के तहत सरकार सूचना प्रकोष्ठ शुल्क में 90 फीसदी की बढ़ोतरी की गई है। यानी फिलहाल, आरटीआई के तहत जिस आवेदन के लिए अब तक 10 रुपए शुल्क देना पड़ता है, प्रस्ताव पारित होने के बाद उसी स्थान पर आवेदक को 100 रुपए शुल्क चुकाना होगा।
छोटी छोटी बातों पर लगती है RTI
हालांकि, प्रति पेज शुल्क में फिलहाल किसी तरह की बढ़ोतरी नहीं की गई है। उसके लिए मौजूदा समय की तरह आगे भी दो रुपए प्रति पेज की दर से ही शुल्क चुकाना होगा। मिली जानकारी के अनुसार, पिछले कुछ सालों में सूचना के अधिकार के तहत विभागों से जानकारी मांगने का चलन काफी तेजी से बढ़ा है। इसमें देखा जा रहा है कि, कोई लोग बेहद छोटी छोटी बातों के बारे में जानकारी हासिल करने के लिए आरटीआई आवेदन लगा देते हैं। इससे विभागीय कामकाज बढ़ गया है। सरकार का मानना है कि, शुल्क बढ़ाने से छोटी छोटी बातों पर पूछे जाने वाले सवाल नियमित होंगे।
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अपील के शुल्क में भी होगी बढ़ोतरी
इसके अलावा अब तक पहली अपील के लिए 50 रुपए शुल्क लिया जाता है, जिसे आगामी समय के लिए 500 रुपए प्रस्तावित किया जा रहा है। ऐसे ही दूसरी अपील के लिए आवेदक को 100 रुपए की बजाय एक हजार रुपए शुल्क देना पड़ सकता है। सामान्य प्रशासन विभाग के डिप्टी सेक्रेटरी धरणेंद्र जैन ने शुल्क वृद्धि का प्रस्ताव तैयार किए जाने की पुष्टि की है। साथ ही कहा कि, आवेदन शुल्क 50 रुपए किए जाने पर विचार किया जा रहा है।
RTI एक्टिविस्ट ने फैसले को बताया गलत
वहीं, आरटीआई कार्यकता अजय दुबे ने सरकार द्वारा बढ़ाए जा रहे आरटीआई शुल्क को सही नहीं माना है उनका कहना है कि, एक्ट में सरकार सिर्फ आवेदन शुल्क ले सकती है। जबकि अपील के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाना चाहिए। 2005 में मनमोहन सरकार ने आवेदन शुल्क 10 रुपए तय किया है। मध्य प्रदेश सरकार को भी आवेदन शुल्क नहीं बढ़ाते हुए अपील का प्रावधान नि:शुल्क करना चाहिए।