
भोपाल। प्रदेश में निरस्त किए गए ३ लाख ६० हजार आदिवासियों के वन अधिकार पत्र के लिए आवेदन एक बार फिर बुलाने की तैयारी की जा रही है।
सरकार यह आवेदन अब ऑफ लाइन नहीं, बल्कि ऑन लाइन बुलाएगी, जिसके लिए केन्द्र सरकार ने वन मित्र के नाम से एक मोबाइल एेप लांच किया है।
इस एेप के माध्यम से वनवासी आवेदन कर सकेंगे और पोर्टल पर सभी दस्तावेज भी अटैच कर सकें। हालांकि ऑन लाइन आवेदन भी विभिन्न समितियों के पास ही भेजा जाएगा, लेकिन अब इन पर राज्य और केन्द्र सरकार भी सीधे निगरानी रखेगी। इस व्यवस्था को प्रदेश में होशंगाबाद में पायलेट प्रोजेक्ट के तरह लागू की जा रही है।
वनवासियों को ऑन लाइन आवेदन करने तथा दस्तावेज अटैच करने में कियोस्क के संचालक मदद करेंगे। इसके लिए एमपी ऑन लाइन कियोस्क आदिवासियों से कोई शुल्क नहीं लेंगे।
आवेदन के बाद ही आदिवासियों को एक आइडी कोड दिया जाएगा, जिसके माध्यम से वे अपने आवेदन की वर्तमान स्थिति के संबंध में जान सकेंगे। आवेदन में उन्हें यह बताना पड़ेगा कि कितनी वन भूमि पर उनका कब्जा है और यह कब्जा कब से है। आवेदन के साथ अदिवासियों को अपना आधार नम्बर भी देना पड़ेगा।
21 सौ से ज्यादा कर्मचारी-व्यापारी
वनवासी के नाम पर जंगल में जमीन लेने वालों में सरकारी कर्मचारी और व्यापारी भी शामिल हैं। २० जिलों की जांच में तरकीबन २१०० से ज्यादा एेसे आवेदन सामने आए हैं।
वन अधिकार पट्टे के लिए आन लाइन आने वाल एक-एक आवेदनों की फिर से समीक्षा की जाएगी। इसमें यह देखा जाएगा कि समितियों ने जिन आदिवासियों के पट्टे निरस्त किए हैं, उसका कारण सही था अथवा किसी कमी अथवा दुर्भावना के चलते निरस्त किए गए हैं।
साक्ष्य के अभाव में निरस्त
हजारों आदिवासियों के आवेदन इसलिए निरस्त कर दिए हैं क्योंकि उन्होंने अपने उक्त वन क्षेत्र में रहने के संबंध में कोई सबूत समितियों के सामने पेश नहीं कर पाए हैं। उन्हें एक बार फिर से 13 दिसम्बर 2005 के पहले से वहां रहने के संबंध में सबूत देने के लिए कहा है। इस तरह के मौके आदिवासियों को वन अधिकार समितियों द्वारा कई बार दिए जा चुके हैं।