
भोपाल. राजधानी में सरकारी आवासों के रखरखाव के नाम पर 12 करोड़ की गड़बड़ी सामने आई है। डेढ़ साल में पीडब्ल्यूडी की संपदा शाखा ने यह राशि खर्च की। इसके बावजूद 3000 से अधिक आवासों के मेन्टेनेंस की फाइल अपनी बारी का इंतजार कर रही हैं। सवाल उठ रहा है कि राशि कहां खर्च की गई।
पीडब्ल्यूडी ने आवासों के रखरखाव व निर्माण निजी एजेंसी और ठेकेदारों को दे रखा है। एकमुश्त छह करोड़ का काम दिया। ठेकेदारों को 17.50 लाख तक के काम दिए गए। फिर भी मेन्टेनेंस नहीं हुआ। आठ हजार से अधिक आवासों में कर्मचारी रहते हैं। 30 से 40 साल पुराने 30त्न आवासों के मेन्टेनेंस की फाइलें संपदा शाखा में अटकी हैं। बजट की कमी का बहाना बना कर काम टाले जा रहे हंै।
सूची से बाहर करने पड़े 113 जर्जर आवास
मेन्टेनेंस के इंतजार में शासकीय आवासों की लंबी होती सूची के बाद अफसर मामले की जांच कराने की बात कह रहे हैं, पर प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। आशंका जताई जा रही है कि मेन्टेनेंस के लिए आए बजट को मिलीभगत करके खुर्द-बुर्द कर दिया गया है। विभाग की अनदेखी के कारण 113 आवास जर्जर घोषित कर आवंटन सूची से बाहर करने पड़े हंै।
जून में बजट खत्म,अब टुकड़ों में काम
संपदा शाखा से आवास मेन्टेनेंस पर 12 करोड़ खर्च करने का दावा है। अब राशि नहीं होने की बात कहकर फाइलें रोक दी हैं। बारिश में खराब दीवारों और दरवाजों तक को दुरुस्त नहीं किया जा रहा है। तुलसी नगर, 1100 क्वाटर्स के कई आवासों में सीलन से करंट फैल रहा है। विभाग को जानकारी है,पर सुनवाई नहीं की। 1100 क्वार्टर के 60 रहवासियों ने मेन्टेनेंस के लिए चार महीने पहले आवेदन दिया था।
राजधानी में शासकीय आवासों पर एक नजर
105 बी श्रेणी
61 सी श्रेणी
255 डी श्रेणी
483 ई श्रेणी
1981 एफ श्रेणी
3649 जी श्रेणी
2159 एच श्रेणी
2509 आई श्रेणी
11202 कुल आवास
(नोट- इसमें से टीटी नगर के काफी आवास तोड़े जा चुके हैं।)
सरकारी आवासों के रखरखाव के मामले में समीक्षा कर स्थिति स्पष्ट की जाएगी। यदि मेन्टेनेंस की आवश्यकता है, तो कराया जाएगा।
आरके मेहरा, इंजीनियर इन चीफ, पीडब्ल्यूडी