भोपाल. सोलर पावर जनरेशन सिस्टम, समुद्री लहरों से ऊर्जा पैदा करना, बिंड मिल जैसे प्रोजेक्ट लगाने पर वस्तु एवं सेवाकर (जीएसटी) घट गया है। पहले जहां इस तरह के प्रोजेक्ट लगाने पर 18 प्रतिशत जीएसटी लगता था, उसकी जगह अब अलग-अलग स्लैब बनाकर 5 प्रतिशत जीएसटी कर दिया गया है। इससे प्रोजेक्ट की लागत काफी घट जाएगी। हालांकि इससे सरकार के राजस्व पर जरूर असर देखने को मिलेगा लेकिन गैर परंपरागत ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देने की सरकार की मंशा का फायदा प्रोजेक्ट लगाने वाले व्यक्ति से लेकर आम आदमी को भी मिलेगा।
किन प्रोजेक्ट पर छूट
-बायो गैस प्लांट लगाना
-बिंड मिल का प्रोजेक्ट लगाना
-सौलर पावर जनरेशन सिस्टम लगाना
-समुद्री लहरों से ऊर्जा उत्पन्न करने वाले प्लांट
दो भागों में बांटी गई लागत
यदि कोई व्यक्ति 1 करोड़ का ऊर्जा संयंत्र लगाना चाहता है, तो उसकी कुल कास्ट (कीमत) पर अब तक 18 प्रतिशत की दर से जीएसटी लगता था। शासन ने 31 दिसंबर 2018 से एक अधिसूचना जारी इस प्रकार के वर्ष कांटेंक्ट से प्राप्त होने वाली राशि की 70 प्रतिशत राशि को प्रोजेक्ट में लगने वाले माल की कीमत मानते हुए उस पर 5 प्रतिशत की दर से जीएसटी लगाने तथा शेष 30 प्रतिशत राशि को सेवाओं की प्राप्ति मानते हुए 18 प्रतिशत की दर से जीएसटी लगाने का निर्णय लिया है।
यू समझें गणित
उदाहरणस्वरुप यदि उपरोक्त में से कोई एक प्रोजेक्ट जिसकी लागत एक करोड़ रुपए आ रही है। उसमें लगने वाला 70 लाख रुपए के माल की कीमत पर 5 प्रतिशत तथा 30 लाख रुपए पर 18 प्रतिशत जीएसटी लगेगा। अर्थात् 70 लाख रुपए पर लगने वाले टैक्स पर 13 प्रतिशत का फायदा मिलेगा। इस तरह एक करोड़ की लागत वाले प्रोजेक्ट पर करीब 9 लाख रुपए कम हो जाएंगे। यदि यह 9 लाख रुपए राजस्व प्राप्त होता तो इसमें से 50 प्रतिशत राशि केन्द्र को सीजीएसटी के रूप में और 50 प्रतिशत राशि राज्य को एसजीएसटी के रूप में प्राप्त होती।
गैर परंपरागत ऊर्जा को बढ़ावा देने की दृष्टि से सरकार ने यह निर्णय लिया है। इसका फायदा संयंत्र लगाने वाले व्यक्ति से लेकर आम आदमी को भी मिलेगा।
आरपी श्रीवास्तव, संयुक्त आयुक्त, राज्य कर