
Missing Pet Bird- मध्यप्रदेश के ग्वालियर से एक तोता गुम हो गया है, जिसे ढूंढने वाले को 50 हजार रुपए का इनाम दिया जाएगा। यह तोता किसी परिवार का सदस्य की तरह था। इसके लिए एक वाहन में विज्ञापन बनाकर लगाया गया है और माइक के जरिए ऐलान भी कराया जा रहा है। इसके अलावा जबलपुर में भी दो ऐसे मामले सामने आ चुके हैं, जिसमें तोते के गुम होने पर 15 हजार रुपए का इनाम घोषित किया था और पर्चे छपवाए गए थे। जबकि सबसे ज्यादा चर्चा हुई थी यूट्यूब के शौकीन तोते की। जो मोबाइल का लॉक खुद खोल लेता था और यूट्यूब का चैनल भी बदल लेता था।
ताजा मामला ग्वालियर के विश्वविद्यालय थाना क्षेत्र के अलकापुरी कलेक्ट्रेट रोड में रहने वाले शशांक ओझा का परिवार अपने पालतू तोते के गुम हो जाने से बेहद दुखी है। परिवार का कहना है कि यह हमारे लिए एक पक्षी नहीं, घर का सदस्य ही है। चार दिनों से लापता हुए इस तोते को ढूंढने के लिए कई स्थानों पर सर्चिंग भी की जा रही है, लेकिन वो अब तक कहीं नजर नहीं आया है। परिवार का हर सदस्य अपने तोते को ढूंढने के लिए अपने-अपने स्तर पर हर संभव कोशिश कर रहा है। ओझा परिवार ने तोते को ढूंढने के लिए उसकी पहचान और फोटो भी जारी किए हैं। उनका कहना है कि हरे रंग का तोता है और उसके सिर पर ग्रे और लाल रंग का तिलक जैसा निशान है।
मध्यप्रदेश के ग्वालियर में तोता गुम होने का पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी मध्यप्रदेश के कई शहरों से ऐसे ही दिलचस्प मामले सामने आ चुके हैं। खासकर जबलपुर में एक तोते का गुमशुदा होना, दूसरे का यूट्यूब चैनल देखना और एक तोते ने बंद पिंजरे में अंडे देने का मामला दिलचस्प है।
जबलपुर में नवंबर 2021 में रांझी मानेगांव में रहने वाले अमन चौहान का तोता गुम हो गया था। उन्होंने तीन माह के तोते को ढूंढने के लिए पम्पलेट छपवाए और 15 हजार रुपए का इनाम घोषित किया था। तोते का नाम बिट्टू रखा था। सॉफ्टवेयर अमन चौहान ने इसके लिए अखबार में विज्ञापन भी दिए थे। बिट्टू नाम के इस तोते के अचानक घर से गायब हो जाने से पूरा परिवार सदमे में रहा। बेंगलुरू कीएक कंपनी में साफ्टवेयर कंपनी में काम करने वाले अमन का तोता उस समय गायब हुआ था, जब वे कोरोना काल में जबलपुर आकर वर्कफ्रॉम होम कर रहे थे। यह तोता 2 नवंबर 2021 की सुबह पिंजरे से गायब हो गया था
जबलपुर में ही फरवरी 2020 को एक अनोखा मामला सामने आ चुका है, जब 6 साल से पिंजरे में बंद मादा तोते ने तीन अंडे दे दिए थे। यह देख घर वाले भी आश्चर्य में पड़ गए थे। लेकिन वन्य जीव विशेषज्ञ ने बताया था कि यह कोई अजूबा नहीं, ऐसा हजारों में एक मामला हो सकता है। जबलपुर के ब्राह्मण मोहल्ला पुरवा निवासी सतीश तिवारी के घर तोते (एलेक्जेंड्री पैराकीट) ने एक के बाद एक तीन अंडे दिए थे। विशेषज्ञ कहते हैं कि मादा पक्षियों का अंडे देना स्वाभाविक प्रक्रिया है। जैसा पोल्ट्री फॉर्म की मुर्गियों में होता है। वे बिना निषेचन के अंडे देती हैं, लेकिन उन अंडों से बच्चे पैदा नहीं होते। बच्चे देने के लिए पक्षियों में निषेचन प्रक्रिया होना जरूरी है। माता तोते ने जो अंडे दिए वे ठीक वैसा ही मामला है। इसलिए इनमें बच्चे नहीं होंगे।
जबलपुर के गौरीघाट रोड सुखसागर वैली में रहने वाले शर्मा परिवार के पास भी एक ऐसा तोता है जो यूट्यूब का बेहद शौकीन है। रितेश शर्मा का यह तोता भी गुम हो गया था। जिसके लिए अखबारों में विज्ञापन भी दिया गया था। तब उन्होंने तोते का वीडियो शेयर किया था। बकायदा उसका बर्थडे भी मनाया गया था और वो तोता मोबाइल पर यूट्यूब देखता था। वो यूट्यूब देखने के लिए मोबाइल स्क्रीन का लॉक भी खोल लेता था। वो अपनी चोंच से चैनल भी बदल लेता था।
वन्य जीव अधिनियम 1972 के तहत तोता पालना प्रतिबंधित है। इनका रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य है। गौरतलब है कि विदेशी पक्षी और देशी तोते को पालना गैर-कानूनी है। ऐसे पक्षी पालकों और विक्रेताओं की सूचना मिलने पर कार्रवाई की जा सकती है।