
दवाओं को फोटो (Photo Source- magnific)
Bhopal news: मध्यप्रदेश के भोपाल शहर में हमीदिया अस्पताल में इलाज कराने वाले मरीज के परिवार वाले परेशान हो रहे हैं। यहां पर डॉक्टर की लिखी पूरी दवा अस्पताल की फार्मेसी से नहीं मिल पा रही है। कई मरीजों को पर्ची की आधी दवाएं ही मिलती है, जबकि बाकी दवाएं बाहर से खरीदनी पड़ रही हैं। कैंसर, टीबी, डायबिटीज और हृदय रोग जैसी गंभीर बीमारियों के मरीजों की परेशानी ज्यादा है। लंबे इलाज में बार-बार बाहर से दवा खरीदने पर परिवार पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
अस्पताल में नहीं मिलने वाली दवाओं की कमी है उनमें कैसर की एबिराटेरोन, कैपेसिटाबाइन, इमैटिनिब और डासाटिनिब, टीबी की बेडाक्विलिन, क्लोफाजिमिन और डेलामानिड जैसी दवाएं शामिल है। हृदय रोग व ब्लड प्रेशर के लिए एटोरवास्टेटिन और क्लोपिडोग्रेल, जबकि डायबिटीज के लिए डैपाग्लिफ्लोजिन और इंसुलिन शामिल है। समय पर दवाओं के न मिलने से मरीजों के इलाज में लेट हो रहा है। कई बाद शिकायतों के बावजूद व्यवस्था जस की तस बनी हुई है।
मरीजों के मुताबिक डॉक्टर जो दवाएं लिखते हैं, उनमें से कई फार्मेसी में नहीं मिलतीं। ऐसे में मरीजों के परिजना अस्पताल के बाहर दवा दुकानों के चक्कर काटने को मजबूर हो रहे हैं। कई बाद घंटों लाइन में लगने के बावजूद मरीज के परिजन परेशान होते रहते हैं।
अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि खरीद प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। दवाओं की आपूर्ति होने के बाद फार्मेसी में उपलब्धता बढ़ेगी। हालांकि मरीजों को वास्तविक राहत नियमित आपूर्ति और वितरण शुरू होने के बाद ही मिलेगी। थोड़े समय बाद इस समस्या से मरीजों के परिजनों को राहत मिलेगी।
दवाओं की कमी दूर करने के लिए गांधी मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने करीब 2 करोड़ रुपए की खरीद का फैसला किया है। इसके लिए टेंडर जारी किया गया है, जिसमें 4189 प्रकार की दवाएं शामिल है। टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद आपूर्ति शुरू होने की उम्मीद है। ये जल्द ही पूरा कर लिया जाएगा। नई खेप आने से अस्पताल में मरीजों को जरूरी दवाएं आसानी से मिल सकेंगी और उपचार व्यवस्था में भी सुधार होगा। अधिकारियों के अनुसार टेंडर की प्रक्रिया जल्द पूरी कर दवाओं की आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी।
Updated on:
18 Sept 2026 07:40 am
Published on:
18 Sept 2026 07:40 am
