राजधानी में आ रहे अवैध हथियार, चंद मामलों ने खोली पोल...
भोपाल@दिनेश भदौरिया की रिपोर्ट...
चुनाव से ठीक पहले रजधानी में अवैध हथियारों का जखीरा जमा हो रहा है! नाजायज असलहों के सौदागर बाहर से असलहा व गोला-बारूद लाकर शहर में बेच रहे हैं। हाल ही में एक राजनीतिक पार्टी के पदाधिकारी द्वारा तमंचे से गोली मारकर खुद को खत्म करने के बाद पुलिस का ध्यान शहर में आ रहे अवैध असलहों पर गया है।
चुनावी वर्ष होने के कारण इसे आगामी चुनावों से भी जोड़कर पुलिस देख रही है। सूत्रों के अनुसार पिछले कुछ समय से जैसे जैसे चुनाव नजदीक आता जा रहा है राजधानी में अवैध असलहों की आवक बढ़ती जा रही है। पिछले कई मामलों में पुलिस ने अवैध असलहों को अपराधियों से बरामद किया है। हाल ही में अरेरा कॉलोनी निवासी भाजयुमो के मंडल उपाध्यक्ष अतुल लोखंडे के कट्टे से खुद को गोली मारने के बाद पुलिस की परेशानी और बढ़ गई है।
एक बड़ी राजनीतिक पार्टी के जिम्मेदार पदाधिकारी तक कट्टा कैसे पहुंचा, इसका अभी तक खुलासा नहीं हो सका है। चुनावी वर्ष होने के कारण पुलिस अवैध असलहों को लेकर बहुत परेशान है। पुलिस इस लाइन पर भी जांच की जा रही है कि शहर में अवैध असहलों के जखीरा का संबंध कहीं आगामी विधानसभा चुनावों से तो नहीं?
सीमावर्ती इलाकों से आते हैं हथियार...
पुलिस के अनुसार महाराष्ट्र बॉर्डर से सटे बुरहानपुर, खंडवा, खरगौन, बड़वानी जिलों में सिकलगर समुदाय के लोग कट्टे/तमंचे, रिवॉल्वर, पिस्टल आदि बनाते हैं। इन जिलों में घने जंगल हैं, जो महाराष्ट्र के सीमावर्ती जलगांव, भुसावल आदि जिलों तक फैले हैं। यहां जंगलों में अवैध असलहे बनाने के अड्डे चलाए जाते हैं।
मप्र पुलिस का दबाव पडऩे पर ये सिकलीगर बने-अधबने असलहों व औजारों को वहीं छोड़कर जंगल के छिपे रास्तों से महाराष्ट्र सीमा में चले जाते हैं। इन जिलों के जंगलों में पुलिस जहां पहुंच सकी है, वहां से पूर्व में बड़ी तादात में असलहे, कारतूस व असलहे बनाने के औजार बरामद किए जा चुके हैं।
मप्र में यूपी व राजस्थान के बॉर्डर से भी अवैध असलहों की सप्लाई होती है। भिंड, मुरैना, ग्वालियर, शिवपुरी जिलों में भी अवैध असलहों का धंधा जोरों पर रहता है। यहां तक कि सूत्रों के अनुसार कई घरों में इनके कारखाने लगे होने की सूचना तक समय समय पर सामने आती रहती है। इसके अलावा राजस्थान के धौलपुर, कोटा, भरतपुर, दौसा आदि जिलों से भी अवैध असलहे यहां तक आते हैं। यूपी के आगरा, इटावा मथुरा, फिरोजाबाद व मैनपुरी जिलों में भी अवैध असलहों का बड़े पैमाने पर काम होता है। वहां से भी असलहे यहां आते हैं। बुरहानपुर, खंडवा, खरगौन व बड़वानी जिलों के असलहे दूसरे राज्यों में भी बरास्ते भोपाल सप्लाई किए जाते हैं।
आसानी से मिल जाते अवैध असलहे-कारतूस
राजधानी के कई इलाकों में इन दिनों अवैध हथियारों के सौदागर सक्रिय हैं। कहा जा रहा है कि ये एक तमंचे को वहां से ढाई-तीन हजार से लेकर पांच हजार रुपए तक में खरीदकर यहां 10 से 20 हजार रुपए तक में बेचते हैं।
इसके साथ ही कारतूस भी आसानी से मिल जाते हैं। सूत्रों का कहना है कि लाइसेंसी हथियार वालों से भी अवैध असलहा बेचने वाले कारतूस खरीदकर अधिक कीमत पर बेचते हैं। यह भी आरोप लगते रहते हैं कि आम्र्स डीलर भी दूसरों के कारतूस की बिक्री में हेरफेर कर कारतूस बेच देते हैं, जिन्हें अवैध असलहों के साथ अधिक कीमत पर बेचा जाता है।
लाइसेंसी से पांच गुना अवैध असलहा
सूत्रों के अनुसार राजधानी में करीब 9 हजार लाइसेंसी हथियार हैं। इनमें 3000 राइफल, 4000 शॉट गन और 2000 हजार के लगभग हैंडगन (रिवॉल्वर/पिस्टल) हैं। शहर में अवैध असलहा करीब 45—50 हजार के बीच होने का अनुमान है। सबसे ज्यादा अवैध असलहा पुराने शहर क्षेत्र में माना जाता है।
राजधानी में पकड़े गए अवैध असलहों के कुछ मामले
- प्रेम प्रसंग में नाजुक मोड़ आ जाने पर भाजपा युवा मोर्चा के अरेरा मंडल उपाध्यक्ष अतुल लोखंडे ने प्रेमिका के घर पर जाकर कट्टे से खुद को शूट कर लिया था। प्रमुख राजनीतिक दल के पदाधिकारी के पास अवैध असलहा होने से चुनावी वर्ष में पुलिस की चिंता बढ़ गई है।
- 10 जून 2018 को मुखबिर की सूचना पर हबीबगंज जीआरपी ने झेलम एक्सपे्रस के कोच बी-3 में सफर कर रही एक महिला से कट्टा बरामद किया था। महिला को लाल रंग के सलवार सूट के चलते आसानी से पहचाना था।
- 31 जनवरी 2018 को कुख्यात बदमाश रईस रेडियो के घर पर पत्थर फेंकते हुए एक बदमाश ने कट्टे से हवाई फायर कर दिया था। आरोपी इस बात से नाराज था कि रईस के बेटे ने नमस्ते नहीं की थी। कोहेफिजा पुलिस ने केस दर्ज किया है।
- 15 अगस्त 2017 से पहले चेकिंग के दौरान हनुमानगंज पुलिस ने जनता नगर, पीपल चौराहा, करोद निवासी अजय मीणा को गिरफ्तार कर उसके पास से .315 बोर का लोडेड कट्टा और चोरी की बाइक बरामद की।
नक्सलियों से भी जोड़कर देखना जरूरी...
वहीं कुछ जानकारों का मानना है इस पूरे मामले को नक्सलियों से भी जोड़ कर देखना जरूरी है। उनका मानना है कि नक्सली लगातार अपने क्षेत्र में इजाफे का प्रयास कर रहे हैं। इसके अलावा में कई जगह अपने हथियार भी बनाते है। कुछ वर्ष पहले भी भोपाल में ही नक्सलियों की हथियारों की एक अवैध फैक्ट्री पकड़ी जा चुकी है।
ऐसे में राजधानी में आ रहे अवैध हथियारों के संबंध नक्सलियों से भी देखने जरूरी है। वहीं इस मामले में जानकार कहते हैं चुकिें नक्सलियों ने मप्र को सेफ जोन के रूप में डेबलप कर रखा है। और वे बालाघाट सहित कई क्षेत्रों में अधिकतर केवल आराम करने व पुलिस से बचने के लिए शरण लेते हैं। ऐसे में वे हथियार भी मध्यप्रदेश में बनाने का कार्य कर सकते हैं।
अवैध असलहों पर पुलिस पैनी निगरानी कर रही है। चुनावी वर्ष होने के मद्देनजर भी ज्यादा सतर्कता बरती जा रही है। अनुभवी व तेज तर्रार पुलिसकर्मियों के साथ मुखबिर तंत्र को अधिक सक्रिय किया गया है।
- रश्मि मिश्रा, एडिशनल एसपी-क्राइम
अवैध असलहा पकड़े जाने पर आम्र्स एक्ट की धारा 25, कारतूस के साथ पकड़े जाने पर धारा 27 व किसी का लाइसेंसी हथियार अवैध रूप से पकड़ जाने पर धारा 30 के तहत कार्रवाई की जाती है। इसमें तीन से दस वर्ष तक की सजा का प्रावधान है। पुलिस अवैध असलहा बरामद करने के बाद कलेक्टर से अनुमति लेकर अभियोजन चलाती है।
- जीपी माली, एडीएम