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एमपी में इतने बाघ कि संभालना हो रहा मुश्किल, कम पड़ रहे जंगल और रिजर्व टाइगर

Tiger- हमारे बाघों को चाहिए 50 वर्ग किमी जंगल, टेरेटरी के लिए संघर्ष में गंवा रहे जान

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Forests and Tiger Reserves Are Proving Insufficient for Tigers in MP

Forests and Tiger Reserves Are Proving Insufficient for Tigers in MP

Tiger- हरिचरण यादव, भोपाल. टाइगर स्टेट मप्र ने बाघ संरक्षण की दिशा में ऐतिहासिक काम किए हैं। नतीजा, बाघों का कुनबा लगातार बढ़ रहा है। बाघ आकलन- 2022 के अनुसार 785 बाघ थे। अब यह संख्या एक अनुमान के मुताबिक 1000 पहुंच गई है। तेजी से बढ़ते बाघों ने प्रदेश के सामने कई चुनौतियां पैदा कर दी हैं। टाइगर रिजर्वों में बाघ व तेंदुओं के बीच आपसी संघर्ष पहले से बढ़ा है। बीते 10 वर्षों में 50 से ज्यादा बाघ व तेंदुए जान गंवा चुके हैं। आपसी संघर्ष के कारण कमजोर बाघ व तेंदुए कई बार जंगल छोड़कर आबादी तक पहुंच रहे हैं, जहां इनका सामना इंसानों से हो रहा है, जिसमें सैंकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है। विशेषज्ञों के मुताबिक एक बाघ को अपनी टेरेटरी के लिए न्यूनतम 50 व अधिकतम 100 वर्ग किमी का क्षेत्रफल चाहिए। इस आधार पर 1000 बाघों को न्यूनतम 50 हजार व अधिकतम 1 लाख वर्ग किमी सुरक्षित जंगल की जरूरत है लेकिन मप्र के सभी 9 टाइगर रिजर्वों का कुल क्षेत्रफल ही 16 हजार 233.939 वर्ग किमी है, जो बाघों की टेरेटरी के लिए न्यूनतम जरूरत से 33766.061 वर्ग किमी और अधिकतम जरुरत से 83766.061 वर्ग किमी कम है। इस वजह से बाघों का आपस में व तेंदुओं के साथ संघर्ष बढ़ रहा है। शिकार के लिए शाकाहारी वन्यजीव भी कम पड़ रहे हैं, यह भी रिजर्व छोडऩे की वजह बन रही है।

बाघों की क्षमता को आंक पाना मुश्किल

बाघ मामलों के विशेषज्ञ डॉ. अनिरूद्ध मजूमदार कहते हैं कि वैसे तो बाघों की क्षमता का आकलन करना बहुत ही मुश्किल है। फिर भी विभिन्न अध्ययनों से पता चलता है कि नर बाघ न्यूनतम 50 से अधिकतम 100 वर्ग किमी व मादा बाघ का न्यूनतम 15 से लेकर अधिकतम 20 वर्ग किमी के दायरे में टेरेटरी बना सकते हैं। कई बाघों के लिए क्षेत्रफल की जरूरत कम या ज्यादा हो सकती है।

रिजर्व व एरिया दोनों बढ़ाना चाहिए

पूर्व वन अधिकारी एवं वन मामलों के जानकार आरके दीक्षित कहते हैं कि प्रदेश में वर्षों से बाघ, तेंदुए की संख्या बढ़ रही, लेकिन उसके अनुरूप रिजर्व और उनका क्षेत्रफल नहीं बढ़ाया। हाल के वर्षों में मोहन सरकार ने दो नए रिजर्व दिए हैं, लेकिन बढ़ती आबादी के सामने वह संख्या पर्याप्त नहीं है। रिजर्व व उनका क्षेत्रफल दोनों बढ़ाया जाना चाहिए।

ये होना चाहिए

मादा बाघ के लिए जरूरी न्यूनतम भ्रमण क्षेत्र 15 वर्ग व अधिकतम 20 वर्ग किमी होना चाहिए।
नर बाघ के लिए जरूरी न्यूनतम भ्रमण क्षेत्र 50 वर्ग किमी व अधिकतम 100 वर्ग किमी होना चाहिए।
785 बाघ 2022 के अनुसार न्यूनतम भ्रमण क्षेत्र 39250 वर्ग किमी व अधिकतम 78500 वर्ग किमी है। उपलब्ध क्षेत्र 16233.939 वर्ग किमी है।
1000 बाघ 2026 में अनुमानित न्यूनतम भ्रमण क्षेत्र 50 हजार वर्ग किमी व अधिकतम 1 लाख वर्ग किमी होना चाहिए।

प्रदेश में टाइगर रिजर्व की स्थिति
टाइगर रिजर्व- क्षेत्रफल वर्ग किमी- वर्तमान में बाघ (संभावित)

डॉ. विष्णु वाकणकर- 1271.463- 121 से 151
सतपुड़ा टाइगर रिजर्व- 2133.31- 120 से 172
माधव टाइगर रिजर्व- 1651.387- 8 से 10
रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व- 2339.12- 19 से 25
कान्हा टाइगर रिजर्व 2162.48 155 से 180
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व- 1536.938- 170 से 202
पेंच टाइगर रिजर्व- 1,179.63- 70 से 90
पन्ना टाइगर रिजर्व- 1598.10- 100 से 110
संजय टाइगर रिजर्व- 2361.511- 50 से 60
कुल रिजर्व 9
कुल क्षेत्रफल 16233.939
संभावित बाघ 1000

प्रमुख बिंदु

बाघों के साथ चुनौतियां भी बढ़ रहीं
टाइगर स्टेट में 5 साल पहले 785 बाघ थे,
अब 1000 होने का अनुमान
इन्हें न्यूनतम 50 हजार वर्ग किमी क्षेत्रफल की जरूरत