
टि्वशा शर्मा केसः सीबीआई की हिरासत में गिरिबाला और समर्थ सिंह से 2 जून तक चलेगी पूछताछ। (विजुअल एआई जनरेटेड)
Bhopal Twisha Sharma Case- टि्वशा शर्मा केस में आरोप और प्रत्यारोप का दौर बहुत चला। टि्वशा की सास और पूर्व जिला जज गिरिबाला और क्रिमिनल लॉयर समर्थ सिंह ने भी अपने आप को बचाने के लिए भरसक प्रयास कर लिए। अब मां और बेटे टि्वशा शर्मा आत्महत्या मामले में सीबीआई की हिरासत में हैं। अब जो कुछ भी कहानी आएगी वो सभी को हैरान करने वाली होगी। क्योंकि सीबीआई को पहली ही पूछताछ में कई झोल नजर आए हैं। समर्थ सिंह बार-बार अपने बयान बदल रहा है। गिरिबाला सिंह भी सीबीआई को सहयोग नहीं कर ही है। ऐसा कोर्ट में भी सीबीआई ने रिमांड लेते समय कहा था।
शुक्रवार 29 मई की दोपहर 2 बजे से 2 जून की दोपहर 2 जून तक रिटायर्ड जज गिरिबाला और टि्वशा का पति समर्थ सिंह दोनों ही सीबीआई की हिरासत में हैं। शुक्रवार शाम से ही दोनों से अलग-अलग स्तर पर पूछताछ शुरू हो गई थी। लेकिन, हिरासत में लेने से पहले और हिरासत में आने तक दोनों ही सीबीआई को सहयोग नहीं कर रहे हैं। क्योंकि एक सेवानिवृत्त भोपाल जिले की प्रधान न्यायाधीश रह चुकी हैं। कानून से लेकर क्राइम की जानकार हैं। वहीं बेटा समर्थ सिंह भी क्रिमिनल लॉयर है। ऐसे दोनों ही लोगों के जेहन से कोई 'राज' उगलवाना CBI के लिए भी चुनौती बन गया है। इसलिए सीबीआई ने दोनों ही मां-बेटे से सच उगलवाने के लिए त्रिस्तरीय प्लान बनाया है। इस प्लान के जरिए सीबीआई 360 डिग्री एंगल से दोनों को घेरेगी और हर वो राज उगलवा लेगी जो वे अपने सीने में छुपाए हुए हैं।
सूत्रों के मुताबिक जब कानून के इतने बड़े जानकारों से सीबीआई के अफसरों का सामना हो रहा है तो सीबीआई को भी व्यूह रचना बनाना पड़ी है। जिस पर काम शुरू हो गया है।
क्राइम थ्योरी में किसी आरोपी या अपराधी से सच उगलवाने के बहुत सारे तरीके होते हैं। पूछताछ इनमें से सबसे सामान्य व्यवस्था है। कानून के दो जानकार यदि कुछ छुपा रहे हैं तो उनसे सच उगलवाना आसान नहीं होता है। सीबीआई का यह प्लान सारे सच उगलवा देगा।
एकांतः दोनों ही आरोपियों को पहले से ही अलग-अलग रखा है क्योंकि वे आपस में विचारों और तथ्यों का आदान-प्रदान नहीं कर पाएं। इसलिए दोनों को एकांत में रखा गया है। जहां उनसे पूछताछ शुरू कर दी गई है। एकांत में पूछे गए सवालों की रिकॉर्डिंग रखी जाती है।
क्रॉस चेकिंगः गिरिबाला और समर्थ के रिकार्ड होने वाले बयान को या जवाब का वैज्ञानिक आधार पर एनालिसिस किया जाएगा। घटना वाली रात से लेकर टि्वशा को अस्पताल पहुंचाने तक का समय मैच किया जाएगा। घटना से जुड़े सभी सवाल और उनके जवाबों को क्रॉस चेक किया जाएगा।
आमना-सामनाः पूछताछ और क्रॉस एग्जामिंग के बाद जवाबों में यदि अंतर नजर आता है तो या विरोधाभास मिलता है, उन प्वाइंट पर गिरिबाला और समर्थ को आमने-सामने बैठाकर पूछताछ की जाएगी।
किसी आरोपी से पूछताछ के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण भी अपनाया जाता है। सवालों को घुमा-फिराकर या अचानक पूछने की जगह लॉजिकल (तार्किक) और साइकोलोजिकल (मनोवैज्ञानिक) तरीकों से पूछताछ करती है। इसमें हाव-भाव, वॉडी लैंग्वेज और आवाज में उतार-चढ़ाव पर भी गौर किया जाता है।
किसी आरोपी से पूछताछ के पहले उनके डिजिटल उपकरणों की पहले ही जांच कर ली जाती है, जैसे कॉल डिटेल, वाट्सअप चैट, सोशल मीडिया चैट आदि।
यदि आरोपी झूठ बोलता है या अपने बयानों से विरोधाभास पैदा करता है तो बार-बार सवालों पर सवाल पूछकर सच तक पहुंचने की यह भी कारगर तकनीक है।
शारीरिक यातना या थर्ड डिग्री के इस्तेमाल की मनाही होती है। जरूरत पड़ने पर सीनियर अधिकारियों या विशेषज्ञों या फॉरेंसिक एक्सपर्ट की मदद भी पूछताछ में ली जाती है।
Updated on:
2 Jun 2026, 7:08 PM IST
Published on:
30 May 2026, 5:08 PM IST
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