शहर में अवैध रूप से 50 और 100 रुपए की पुडियां में गांजा बेचा जा रहा है। आसानी से गांजा उपलब्ध होने के चलते युवा वर्ग बड़ी संख्या में इस नशे की चपेट में आ रहे है।
बैतूल. शहर में अवैध रूप से 50 और 100 रुपए की पुडियां में गांजा बेचा जा रहा है। आसानी से गांजा उपलब्ध होने के चलते युवा वर्ग बड़ी संख्या में इस नशे की चपेट में आ रहे है। गांजा पीने के लिए बाजार में गो-गो नाम का फिल्टर भी खुलेआम पान ठेले में बिक रहा है। पत्रिका ने मंगलवार को शहर के इंदिरा वार्ड में गांजा सप्लायर एक महिला के घर पर स्टिंग ऑपरेशन किया तो साढ़े चार ग्राम गांजे की एक पुडिय़ां 100 रुपए की दी गई। जब पुडिय़ां के रेट को लेकर पूछा गया तो महिला सप्लायर का कहना था कि 50 ग्राम 1500 रुपए का आ रहा हैं। इसलिए इतना महंगा है, लेना है तो लो.....। शहर में गांजे का एक सप्लायर नहीं हैं बल्कि दो-तीन सप्लायर हैं जो चोरी-छुपे गांजा बेच रहे हैं। सप्लायरों को पैड्लर्स के जरिए शहर में गांजा सप्लाई किया जाता है।
प्लास्टिक के पैकेट में सप्लाई
शहर में गांजे की सप्लाई प्लास्टिक के छोटे-छोटे पैकेट (पुडिय़ां)में की जाती है। यह पैकेट 50 से 100 रुपए में वजन के अनुसार आते हैं। 100 रुपए के पैकेट में गांजे की मात्रा महज साढ़े चार ग्राम होती है। पैकेट में गांज को भरकर स्टेप्लर लगाकर सील कर बेचा जाता है। बताया गया कि शहर में गांजा सप्लाई करने वाले करीब तीन से चार लोग हैं जो अलग-अलग तरीकों से इसकी सप्लाई करते हैं।
गांजा पीने के लिए गो-गो की डिमांड बड़ी
गांजा पीने के लिए बकायदा बाजार में गो-गो नाम का एक बटर पेपरनुमा फिल्टर भी मिल रहा हैं। यह फिल्टर आसानी से किसी भी पान की दुकान पर उपलब्ध हो जाता है। एक फिल्टर की कीमत करीब 10 रुपए हैं। इस फिल्टर के साथ प्लास्टिक का पाइप भी आता हैं। जिसकी मदद से गांजे को मसकर(बनाकर) फिल्टर में भरा जाता है। इसके बाद इसे जलाकर पीया जाता है। एक पान विक्रेता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उनके दुकान से प्रतिदिन दस से पंद्रह गो-गो बिक जाते हैं।
तीन वैरायटी का गांजा उपलब्ध
बैतूल जिले में जो गांजा सप्लाई हो रहा हैं वह तीन अलग-अलग वैरायटी का होता है। इनमें पहला देशी गांजा हैं जो हरा रंग का होता हैं और लोकल में ही कुछ जगहों पर इसकी पैदावार होती है। वहंी उड़ीसा का गांजा भूरे रंग का उच्च क्वालिटी का होता है। जिसकी गंजेडिय़ों में खासी डिमांड होती है। वहीं बारंगल महाराष्ट्र से आने वाला गांजा कैमिकल युक्त होता है। जो काफी नशीला होता है।
सड़क मार्ग और ट्रेन से भी होती है गांजा की तस्करी
बैतूल जिला दिल्ली-चैन्नई रेलवे ट्रेक के बीच में स्थित हैं। इसलिए गांजे की तस्करी के लिए पैड्लर्स इस रूट का इस्तेमाल ज्यादा करते हैं। पिछले साल जुलाई 2022 में दक्षिण एक्सप्रेस से उड़ीसा से भोपाल ले जाई जा रही गांजे की बड़ी खेप जीआरपी ने पकड़ी थी। इस खेप में तीन महिलाओं और दो पुरुषों को 37 किलोग्राम गांजा जब्त किया गया था। एनडीपीसी एक्ट के तहत तस्करों पर कार्रवाई की गई थी। वहीं फरवरी 2019 में भी बैतूल पुलिस ने नाकेबंदी के दौरान भारतभारती के पास एक जीप से गांजे की एक बड़ी खेप पकड़ी थी। करीब 60 लाख का गांजा पकड़ा था जो नागपुर से आ रहा था। वहीं 2020 में कोतवाली पुलिस ने पाढर के ग्राम उमरवानी में गांजे की खेती की सूचना पर कार्रवाई कर गांजे के पौधे बड़ी मात्रा में जब्त किए थे। हाल ही में जून 2022 में उड़ीसा से भोपाल ले जा रहे 160 किलो गांजे की खेप को मिलानपुर टोल प्लाजा के पास नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो इंदौर की टीम ने जब्त किया था।
प्रशासन नशा मुक्ति के लिए चला रहा अभियान
जिले में नशा मुक्ति के लिए प्रशासन लगातार अभियान चला रहा हैं, लोगों को नशे से दूर रहने और इसके दुष्परिणामों के बारे में बताया जा रहा हैं, लेकिन इसके बाद भी नशे का कारोबार खुलेआम चल रहा है। आसानी से लोगों को नशे की चीजें उपलब्ध हो रही है। वर्तमान में स्वास्थ्य विभाग कोप्पा एक्ट के तहत जिले भर में कार्रवाई की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक कोप्पा एक्ट के तहत बीते पांच महीनों में दो सैकड़ा लोगों पर कार्रवाई की जाकर 20 हजार रुपए का चालान वसूला गया है। इनमें सार्वजनिक स्थानों पर नशा करने वाले और तंबाकू उत्पाद बेचने वालों के विरूद्ध कार्रवाई की गई है। वहीं सामाजिक न्याय विभाग भी नशा मुक्ति के लिए अभियान चलाता है लेकिन उनके पास कोई डाटा उपलब्ध नहीं है।