
भोपाल। इतिहास के पन्नों में वो इबारत दर्ज है, जिसे आज भी मिसाल के तौर पर लिया जाता है। भोपाल रियासत की नींव रखने वाले नवाब दोस्त मोहम्मद खान ( dost mohammad khan ) ने भी राखी के वचन को निभाया था।
mp.patrika.com पर पेश है वो ऐतिहासिक किस्सा...।
इस देश में असंख्य किंवदंतियां हैं। उनमें से एक है रानी कमलापति और दोस्त मोहम्मद खान का यह किस्सा। जब गिन्नौरगढ़ के गौंड राजा निजाम शाह को जहर देकर मार डाला गया, तो उनकी विधवा पत्नी रानी कमलापति अपने बेटे को लेकर कुछ समय तो गिन्नौरगढ़ किले और आसपास के जंगलों में छुपी रहीं, लेकिन जब दोनों को भी जान का खतरा हुआ तो वे यहां-वहां भटकते हुए भोपाल के नवाब से मदद मांगने पहुंच गई। रानी कमलापति के सहृदय व्यवहार से दोस्त मोहम्मद खान काफी प्रभावित हो गए थे। उस दौर की बात है मुसीबत में डरी-सहमी रानी कमलापति ने दोस्त मोहम्मद खान को भाई कहकर संबोधित किया था।दोस्त मोहम्मद खान भी वचन के पाबंद थे। उन्होंने कमलापति की जान बचाने के लिए सुरक्षित ठिकाना देने का भरोसा दिलाया। कोलांस नदी के डैम पर यह महल बनाकर दे दिया था। यह महल छोटे तालाब और बड़े तालाब के बीच में आज भी मौजूद है। कहा जाता है कि रानी कमलापति जब तक जीवित रहीं दोस्त मोहम्मद को राखी जरूर भेजती थी। किंवदंती भी है कि वे उस समय एक हिन्दू रानी से राखी बंधवाने वाले पहले शासक थे।
भोपाल से 55 किमी दूर है गिन्नौरगढ़ किला
भोपाल से 55 किलोमीटर दूर है गिन्नौरगढ़ का किला। उस समय 750 गांवों से मिलकर गिन्नौर राज्य बनाया गया था। बात उस वक्त की है जब मुगल साम्राज्य का पतन हो चुका था। गोंड़ राजा निजाम शाह का राज था। वे सात रानियों के साथ रहते थे। इनमें कृपाराम गोंड़ की बेटी कमलापति भी थीं। सभी रानियों में कमलापति सबसे खूबसूरत थीं। कमलापति वीर और बुद्धिमान भी थी। निजाम शाह का भतीजा चैनशाह का बाड़ी में राज्य था। वह अपने चाचा से नफरत करता था। उसने चाचा की हत्या करने के लिए काफी प्रयास भी किए थे। चैन शाह ने धोखे से निजाम शाह को जहर देकर मार दिया था। चैन शाह के षड्यंत्र से बचने के लिए विधवा हुई कमलापति और उसका बेटा नवलशाह गिन्नौरगढ़ किले में ही छुप गए थे।
कई विद्रोह और आक्रमणों से बचते-बचते पति के हत्यारों से बदला लेने के लिए उसने इस्लामनगर के नवाब, जो बाद में भोपाल के नवाब दोस्त मोहम्मद से मदद की पेशकश की। कमलापति के लिए बड़े तालाब किनारे जो महल बनावाया था, जो 18वीं शताब्दी के शुरुआत में वास्तु का अनोखा उदाहरण है। यह महल दो मंजिला ऊपर है, जबकि तालाब के भीतर इसकी पांच मंजिलें हैं। लखौरी ईंटों और मिट्टी से इसे बनाया गया है। इस महल के नीचे के हिस्से में भारी-भरकम पत्थरों का बेस तैयार किया गया था। यह महल कोलांस नदी के डैम पर बनाया गया है, जिसका निर्माण राजा भोज ने किया था। अब भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने 1989 से इसे अपने संरक्षण में रख रखा है। इस महल के परिसर को सुंदर बगीचे में तब्दील किया गया है।