
भोपाल. एमपी के बुंदेलखंड का दतिया यूं तो श्री पीताम्बरा पीठ के लिए दुनियाभर में मशहूर है लेकिन यहां की शाही छतरियां भी बहुत विख्यात हैं। करनसागर तालाब के किनारे करीब 400 साल पुरानी इन छतरियों के रूप में दतिया का इतिहास और परंपराएं भी जीवित हैं। इन प्रसिद्ध छतरियां को देखने हर साल हजारों लोग यहां आते हैं। बुंदेली राजाओं द्वारा निर्मित की गईं इन छतरियों को अब और सुंदर बनाया जा रहा है। राज्य के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने इस संबंध में एक ट्वीट भी किया है।
ये राजसी छतरियां रियासतकालीन वैभव को बखूबी दर्शाती हैं। राज्य पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा संरक्षित इन छतरियों का निर्माण सत्रहवीं शताब्दी में कराया गया था। दतिया के तत्कालीन नरेश शुभकरण ने इन्हें बनवाया। राजा शत्रुजीत के शासन में इस बुंदेली चित्रकारी को राजा पारीछत ने भी खासा संरक्षण दिया।
शहर के करन सागर के पास बनी इन शाही छतरियां पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गयाब लेकिन अब इन्हें विकसित किया जा रहा है। इनका सौन्दर्यीकरण भी किया जा रहा है। गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने छतरियों के सौंदर्यीकरण के काम का निरीक्षण किया। इसके बाद उन्होंने ट्वीट कर बताया कि दतिया
जिले के चहुंमुखी विकास के अंतर्गत यहां पर्यटन की संभावनाओं को लगातार मूर्त रूप दिया जा रहा है। इसी क्रम में इन ऐतिहासिक छतरियों का कायाकल्प किया जा रहा है।
इन छतरियों को पुराने स्वरूप में ही रखकर और सजाया जा रहा है। इस काम में 4.32 करोड़ की राशि खर्च की जा रही है। इसके साथ ही पर्यटकों की सुविधा के लिए यहां विशेष इंतजाम भी किए जा रहे हैं।
अन्य प्रमुख स्थान
दतिया को 16 वीं सदी में बुन्देला राजा वीर सिंह जू देव ने बसाया था। मां पीताम्बरा देवी के मंदिर और शाही छतरियों के अलावा दतिया में अनेक अन्य महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल हैं। इनमें में राम सागर तालाब, राजा रवि सिंह देव पैलेस, गुप्तेश्वर धाम, बडोनी व सोनागिरि जैन मंदिर शामिल हैं।