भोपाल

2070 तक पृथ्वी पर प्रलय जौसे होंगे हालात, जीवों को रहना होगा मुश्किल

धरती का तापमान बढ़ने से जीवन पर बढ़ रहा है खतरा
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Jun 07, 2022
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भोपाल. धरती का तापमान 1.1 से बढ़कर 1.2 डिग्री सेंटीग्रेड हो गया है, साथ ही लगातार बढ़ रहा है। इसे रोकने के लिए वैश्विक और राष्ट्रीय स्तर पर कई योजनाएं चल रही हैं, लेकिन सभी समस्या के हिसाब से काफी नहीं हैं। इसी तरह यदि पृथ्वी पर जलवायु परिवर्तन में भी इसी तरह की वृद्धि हुई तो 2070 तक प्रलय के कारण जीवों के जीवन पर बड़ा खतरा उत्पन्न हो जाएगा। हाल ही में आपने अंतरिक्ष में रहने के विकल्प की तलाश में कई कार्यक्रमों के बारे में सुना होगा, कहीं न कहीं वे सभी इसी दिशा में इशारा करते दिख रहे हैं।

सरकार व आम जनता को भी करना होगा सहयोग
भारत के सामने अभी पर्यावरण संबंधी चुनौतियां हैं, जैसे भूमिक्षरण, भूजल में गिरावट, मिट्टी की उत्पादकता में कमी, वायु-जल प्रदूषण और जैव विविधता का नुकसान। जलवायु परिवर्तन इन चुनौतियों और समस्याओं को ओर बढ़ा देगा। जल संरक्षण और पौधरोपण ही इसके प्रभाव का मुकाबला करने के लिए सबसे जरूरी हथियार है। यह बात ‘जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए वैश्विक और राष्ट्रीय प्रयास’ विषय पर पांचवें बुच स्मृति व्याख्यान में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस बेंगलुरु के डॉ एनएच रवीन्द्रनाथ ने कही।

2030 तक CO2 का उत्सर्जन 40 प्रतिशत लाना होगा
डॉ. रवीन्द्रनाथ ने कहा कि पृथ्वी का तापमान 1.1 से 1.2 डिग्री सेंटीग्रेड बढ़ चुका है। जलवायु परिवर्तन के संकट से निपटने जरूरी है कि वैश्विक तापमान औसत 1.5 डिग्री सेंटीग्रेड पर स्थिर हो जाए। ऐसा करने के लिए 2030 तक ग्रीन हाउस गैसों और कार्बन डाई ऑक्साइड उत्सर्जन कम कर 40 प्रतिशत तक लाना होगा। ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन को कम करने और जलवायु परिवर्तन के अनुकूलन की दिशा में भारत ने स्वैच्छिक प्रतिबद्धता दर्शाई है।

डॉ. रवींद्रनाथ ने बताया कि जलवायु परिवर्तन मानव समाज और प्राकृतिक पारिस्थितिकी प्रणालियों के सामने सबसे बड़ी पर्यावरणीय और विकासात्मक चुनौतियों में से एक है। साथ ही वर्तमान नीतियां, कार्यक्रम और कार्य योजनाएं वर्तमान में होने वाले नुकसान को कम करने के लिए अपर्याप्त हैं। इसलिए राष्ट्रीय और राज्य जलवायु कार्य योजनाओं और मिशनों से परे बहुत गंभीर परिवर्तनकारी रणनीति की आवश्यकता है।

हरे पेड़ों को दिया जाए अधिक महत्व
डॉ रामप्रसाद ने कहा कि हमें पर्यावरण के अनुकूल खपत पैटर्न अपनाना होगा और पेड़ों की रक्षा करनी होगी ताकि वे कार्बन डाइ ऑक्साइड को अवशोषित कर सकें, जो ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन के प्रमुख कारणों में से एक है। उन्होंने वन विभाग की कार्य योजना में बदलाव पर जोर देते हुए कहा कि सदा हरे पेड़ों को दूसरे से अधिक महत्व दिया जाए।

Published on:
07 Jun 2022 07:57 pm