
भाजपा प्रदेश संगठन महामंत्री चंद्रशेखर ने छिंदवाड़ा में कार्यकर्ताओं से की चर्चा- Image X @BJP4MP
MP BJP : मध्यप्रदेश में कांग्रेस का आखिरी गढ़ ढहाने की तैयारी की जा रही है। बीजेपी की छिंदवाड़ा पर नजर है जिसे कमलनाथ ने अभी तक बचा रखा है। जिले की ज्यादातर विधानसभा सीटों पर अभी भी कांग्रेस का कब्जा है। छिंदवाड़ा सीट से तो खुद कमलनाथ ही विधायक हैं। बीजेपी, जिले में कांग्रेस के इस वर्चस्व को हर हाल में समाप्त करना चाहती है। इसके लिए छिंदवाड़ा के लिए विशेष प्लान बनाया गया है। शुक्रवार को तो खुद संगठन मंत्री चंद्रशेखर वहां पहुंचे। जिले के सभी वरिष्ठ नेताओं के साथ कार्यकर्ताओं से चर्चा की।
मध्यप्रदेश का छिंदवाड़ा जिला आदिवासी बाहुल्य है। यहां शुरु से ही कांग्रेस का वर्चस्व है। यहां तक कि आपातकाल के बाद जब 1977 में लोकसभा चुनावों में कांग्रेस की देशभर में बुरी हार हुई थी तब भी छिंदवाड़ा सीट से उसे जीत हासिल हुई थी। कांग्रेस के गार्गीशंकर मिश्र ने भारतीय लोकदल के उम्मीदवार प्रतुलचंद्र द्विवेदी करीब 2369 वोटों से हराया था। बाद में कमलनाथ के नेतृत्व में छिंदवाड़ा जिला कांग्रेस का गढ़ बन गया। हालांकि पिछले लोकसभा चुनावों में बीजेपी ने इसमें सेंध लगा दी। बीजेपी के बंटी साहू ने कांग्रेसी उम्मीदवार कमलनाथ के पुत्र नकुलनाथ को मात देकर यह सीट छीन ली थी।
मूल छिंदवाड़ा जिले में कुल 7 विधानसभा सीटें थीं। इनमें से 6 पर कांग्रेस काबिज है। सन 2023 के विधानसभा चुनाव में जब बीजेपी की पूरे प्रदेश में आंधी चली थी तब भी कमलनाथ का यह गढ़ सुरक्षित बचा रहा था। बाद में अमरवाड़ा के विधायक कमलेश शाह, कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए थे। जुलाई 2024 में उपचुनाव में जीत गए जिससे यह सीट भाजपा की झोली में चली गई।
अमरवाड़ा को छोड़कर छिंदवाड़ा जिले की सभी सीटों पर कांग्रेस के विधायक हैं। जुन्नारदेव (ST) से सुनील उइके, चौरई से चौधरी सुजीत मेरसिंह, सौंसर से विजय चौरे, छिंदवाड़ा से खुद कमलनाथ, परासिया (SC) से सोहनलाल बाल्मीक और पांढुर्ना (ST) से नीलेश उइके विधायक हैं। वैसे पांढुर्ना अब स्वतंत्र जिला बन चुका है।
लोकसभा चुनाव में हार के बाद भी छिंदवाड़ा को कांग्रेसी गढ़ के रूप में ही जाना जाता है। इसे ढहाने की बीजेपी पुरजोर कोशिश कर रही है। शुक्रवार को प्रदेश संगठन मंहामंत्री चंद्रेशेखर ने जिलेभर के कार्यकर्ताओं से बातचीत की। बीजेपी के प्रदेश महामंत्री सुमेर सिंह सोलंकी भी उनके साथ थे। दोनों नेताओं ने सांसद विवेक बंटी साहू, जिलाध्यक्ष शेषराव यादव और प्रभारी बबला शुक्ला से भी मंत्रणा की।
Updated on:
16 Oct 2026 03:52 pm
Published on:
16 Oct 2026 03:25 pm
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