आनुवंशिक कारण के अलावा खराब लाइफस्टाइल और गलत खान-पान भी इसका बड़ा कारण है। इससे हार्ट अटैक से लेकर लिवर डैमेज और आंखों की रोशनी जाने का खतरा बढ़ जाता है।
भोपालः आज के भागदौड़ भरे जीवन में एक बड़ी आबादी अवसाद और तनाव ( hypertension ) से ग्रस्त हो गई है। धीरे धीरे ये कब हाइपरटेंशन का रूप ले लेती है पीड़ित को पता भी नहीं चल पाता। इसके कारण मानसिक उलझन, शारीरिक रोग में बदल जाता है। इसका सीधा संबंध हमारे हृदय से है। एक सर्वे के मुताबिक, प्रदेश के ग्रामीण इलाकों के मुकाबले शहरों में ह्रदय रोगी 30 से 40 फीसदी ज्यादा हैं, जबकि ग्रामीण इलाकों में ये सिर्फ 15 फीसदी ही हैं। आनुवंशिक कारण के अलावा खराब लाइफस्टाइल और गलत खान-पान भी इसका बड़ा कारण है। इससे हार्ट अटैक से लेकर लिवर डैमेज और आंखों की रोशनी जाने का खतरा बढ़ जाता है। शहर के मनोरोग चिकित्सक डॉ. राकेश मिश्रा के मुताबिक, इसे साइलेंट किलर ( silent killer ) भी कहा जाता है, जो बिना लक्षण के ही जानलेवा होती है। इसमें कुछ लोगों में सिर दर्द, धड़कनों का तेज होना, चलते समय सांस फूलना, थकान और असहजता की समस्या बढ़ जाती है।
किडनी और आंखों पर पड़ता है असर
तनाव, लकवा ( paralysis ) और हार्ट अटैक ( heart atteck ) का प्रमुख कारण है। साथ ही, इसका काफी असर किडनी और आंखों पर पड़ता है। इससे बचाव के लिए नियमित जांच जरूरी है। उच्च रक्तचाप ( high bloodpreasure ) के कारण हर साल लाखों लोग जीवन से संघर्ष करते करते हार मान लेते हैं और उनकी मृत्यु हो जाती है। हृदय शरीर के सभी अंगों को नलीकाओं द्वारा रक्त को पहुंचाता है। रक्त प्रवाह के समय हृदय दबाव पैदा करता है, जो नलीकाओं के अंदरूनी भाग पर पड़ता है। इसे रक्तचाप कहा जाता है।
शरीर में संतुलित ढंग से रक्त के संचालन का काम रक्तचाप के संतुलन पर निर्भर करता है। धमनियों में रक्त के दबाव के बढ़ने को उच्च रक्तचाप कहते हैं। एक सेहतमंद आदमी के लिए रक्तचाप 120/80 mm hg होना चाहिए। जब आपका सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर (ऊपरी रक्त चाप ) 140 mm hg और डायास्टोलिक ब्लड प्रेशर (नीचे का रक्त चाप) 90 mm hg या इससे ऊपर हो, तो तब उसे उच्च रक्तचाप या हाइपरटेंशन कहते हैं। बल्डप्रेशर की जांच कराते समय कुछ बातें ध्यान रखें जैसे : जांच से तीन घंटे पहले तक रोगी ने चाय, काफी या सिगरेट का सेवन न किया हो। जांच से तीन से पांच मिनट पहले तक शांति से बैठे हुए हों, ताकि धमनियों की गति सामान्य रहे और स्पष्ट सामने आ सके।
दिमाग पर लोड बढ़ने से होती है शुरुआत
हाइपरटेशन का एक कारण शारीरिक श्रम कम करके मानसिक श्रम के दबाव में उलझे रहना भी है। जब रक्तचाप 140/90 से बढ़ने लगे, तो सतर्क हो जाना चाहिए। खान-पान को सुधारने के साथ ही मेडीटेशन और शारीरिक व्यायाम आदि तुरंत किसी विशेषज्ञ ( health expert ) की सलाह से शुरू कर देना चाहिए। इसके साथ ही मॉर्निंग/इवनिंग वाक, साइकिलिंग और स्वीमिंग का सहारा लेना भीबेहद लाभकारी होगा।
रक्त गाढ़ा होने से भी होता है हाइपरटेंशन
रक्त गाढ़ा होने से धमनियों में इसकी पर्याप्त आपूर्ति नहीं हो पाती है। रक्त में थक्के बनने शुरू हो जाते हैं, जो हार्ट अटैक का कारण बन सकते हैं। इससे बचने के लिए रोजाना हल्का व्यायाम करने, सकारात्मक सोच रखने, धूम्रपान छोड़ने, क्रोध कंट्रोल करने और पर्याप्त नींद लेने से इसे कंट्रोल किया जा सकता है।
मोटापा भी है प्रमुख कारण
हमारे खून में तीन चीजों का महत्व बहुत ज्यादा है-जल, ग्लूकोज और ऊर्जा। ग्लूकोज भोजन से मिलता है और ऊर्जा ऑक्सीजन से। शुद्ध वायु से हमें प्राण शक्ति मिलती है और पानी से हमारा खून पतला रहता है। जब हमारी जीवनचर्या बिगड़ जाती है और भोजन संतुलित नहीं रह जाता, तो मोटापा उसका सहज परिणाम होता है और मोटापा हाइपरटेंशन का एक प्रमुख कारण है।
गुर्दों को पहुंचाता है नुकसान
मोटापे से रक्तचाप तो बढ़ता ही है। इसका असर व्यक्ति के गुर्दों पर भी पड़ता है। हाइपरटेंशन के रोगी को चाहिए कि वह अपने वजन को शीघ्रता से नियंत्रित करें। प्रत्येक किलो अतिरिक्त वजन से लगभग 300 किलोमीटर अतिरिक्त रक्त वाहिनियां बन जाती हैं, जिससे हृदय पर काम का बोझ बढ़ जाता है और मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं। वजन बढ़ने का बीपी बढ़ने से सीधा संबंध है। हमेशा दायीं करवट लेटें। उनकी बायीं ओर की नासिका ही अधिक समय चलनी चाहिए।
- बीपी और थॉयराइड की जांच कराते रहें।