आइएएस अधिकारियों को अब प्रत्येक 5 साल में अपना बायोडाटा अपडेट करके सरकार को देना होगा। शुरूआती दौर के बायोडाटा में यह बताना होगा कि नौकरी में आने के बाद क्या नया सीखा।
भोपाल। आइएएस अधिकारियों को अब प्रत्येक 5 साल में अपना बायोडाटा अपडेट करके सरकार को देना होगा। शुरूआती दौर के बायोडाटा में यह बताना होगा कि नौकरी में आने के बाद क्या नया सीखा। इसके बाद के बायोडाटा में उन्हें बताना होगा कि उन्होंने ऐसा क्या नया सीखा, जो जनता के हित में नीतियां बनानेे के काम आ सकता है।
अप्रैजल के दो प्रारूप
केन्द्र सरकार आइएएस अफसरों के वार्षिक प्रतिवेदन (अप्रैजल) के प्रारूप में बदलाव करने जा रही है। इसका मसौदा सभी राज्यों को इस मंशा के साथ भेजा है कि उन्हें इस बदलाव पर कोई आपत्ति नहीं होगी। अप्रैजल के दो प्रारूप होंगे। एक फार्म केवल सचिव और अतिरिक्ति सचिव स्तर के अधिकारियों के लिए होगा और दूसरा फार्म इससे निचले स्तर के अधिकारियों के लिए होगा। अप्रैजल में उनकी कार्यक्षमता, निर्णय लेने की शक्ति, काम करने की गति सहित अन्य बातों को ध्यान में रखा जाएगा।
अफसर बताएंगे क्या किया बदलाव
प्रस्तावित प्रारूप के अनुसार सचिव और अतिरिक्त सचिव स्तर के अधिकारियों को बताना होगा कि उनकी कमजोर वर्ग को लेकर सोच क्या है और इस दिशा में क्या काम किया है। उन्हें यह भी बताना होगा कि उनके कार्यकाल में क्या सकारात्मक बदलाव आया है। उनमें निर्णय लेने की क्षमता कितनी रही। अप्रैजल अधिकारी को 50 शब्दों में बताना होगा कि उनके मातहत आइएएस ने प्रतिकूल परिस्थितियों में कैसे काम किया। क्या किसी क्षेत्र में नवाचार किया। अप्रैजल में अधिकारियों की कार्यक्षमता, निर्णय लेने की शक्ति, काम करने की गति सहित अन्य बातों को ध्यान में रखा जाएगा।
चार पंसदीदा विषय
सभी आइएएस को अप्रैजल भरते समय अपने चार पंसदीदा ऐसे विषय बताना होंगे जिनमें वे काम करना चाहते हैं। इनमें कृषि एवं ग्रामीण विकास, सामाजिक विकास, प्राकृतिक संसाधन प्रंबंधन, ऊर्जा और पर्यावरण, संचार व्यवस्था और कनेक्टिविटी अधोसंरचना, वित्तीय प्रबंधन, उधोग एवं व्यापार, आवास एवं नगरीय प्रशाासन, कार्मिक और विज्ञान एवं तकनीकी क्षेत्र शामिल हैं।