आगामी 24 घंटों के दौरान प्रदेश के कई जिलों में पाला पड़ने से फसलों को नुकसान होने की संभावना जताई जा रही है।
उत्तर भारत से आ रही सर्द हवाओं के कारण मध्य प्रदेश में कड़ाके की ठंड का दौर जारी है। सोमवार को मध्य प्रदेश के सभी संभागों के जिलों में मौसम शुष्क रहा। हालांकि, सूबे के दतिया में शीत लहर देखने को मिली तो वहीं धार रीवा छतरपुर के साथ साथ दतिया में कोल्ड डे रहा। वहीं भोपाल समेत प्रदेश के 16 जिलों में अचानक न्यूनतम तापमान 8 डिग्री से नीचे आ गया। वहीं आगामी 24 घंटों के दौरान प्रदेश के कई जिलों में पाला पड़ने से फसलों को नुकसान होने की संभावना जताई जा रही है। साथ ही मौसम विभाग ने ठंड को लेकर अलर्ट जारी करते हुए इससे बचाव के दिशा निर्देश भी दिए हैं।
मध्यप्रदेश कड़ाके की ठंड से ठिठुर रहा है। सोमवार की सुबह भोपाल, दतिया, सतना, टीकमगढ़ में शीतलहर और घना कोहरा देखने को मिला। यहां कई क्षेत्रों में विजिबिलिटी 50 मीटर से भी कम रह गई थी। ग्वालियर, भिंड, नर्मदापुरम, रायसेन, विदिशा और दूसरे शहरों में भी कोहरे-धुंध की वजह से विजिबिलिटी काफी कम रही।
प्रदेश के 5 सबसे कम न्यूनतम तापमान वाले शहर
मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के अंतर्गत आने वाले बिजावर का न्यूनतम तापमान सबसे कम दर्ज किया गया। यहां रात का पारा 2.1 डिग्री सेल्सियस पर आ गया था, जबकि अशोकनगर के आंवरी में न्यनतम तापमान 2.5 डिग्री रहा, शाजापुर के गिरवर का न्यूनतम तापमान 2.8 डिग्री दर्ज हुआ, दतिया का तापमान 2.8 डिग्री रहा, शहडोल जिले के कल्याणपुर का तापमान 3.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
प्रदेश के 5 सबसे कम अधिकतम तापमान वाले शहर
मध्य प्रदेश के दतिया में दिन का सबसे कम तापमान दतिया में रहा। यहां 17.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, इसके अलावा रीवा में 18 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज हुआ, रायसेन में 18.4, टीकमगढ़ में 19 छतरपुर के खजुराहों का अधिकतम तापमान 19.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
कोई सिस्टम नहीं, फिर सर्दी का सितम
मौसम विभाग के अनुसार, इस बार ठंड की बिल्कुल असामान्य स्थिति है। पहाड़ों पर बर्फ़बारी भी नहीं हुई है। बावजूद इसके प्रदेश के बड़े हिस्से का तापमान तेजी से नीचे जा रहा है। ना ही ऐसा कोई मौसम में सिस्टम है, जिससे मौसम पर असर आ रहा हो। इसकी वजह ये है कि सर्दियों में हिमालय के आसपास जेट हवा (तेज रफ्तार से चलने वाली बर्फीली हवाएं) उत्तर भारत से लेकर मध्य भारत के मैदानी इलाकों में 12 किलोमीटर ऊंचाई तक पहुंच गई है।