
Hokey Player Nausheen Naaz struggle story: हॉकी खिलाड़ी नौशीन नाज(photo:patrika)
Success Story: कहते हैं हौसला हो तो दुनिया का कोई काम ऐसा नहीं जो नामुमकिन हो… ऐसे कई उदाहरण हमें मिल भी जाएंगे जिनसे हम सीख सकते हैं हौसलों को कभी झुकने न दो, टूटने न दो, क्योंकि यही सिखाता है संघर्ष बस पल भर के हैं, जीत हमारी ही होगी। आज ऐसा ही एक एग्जाम्पल सेट किया है मध्य प्रदेश के सिवनी जिले की नौशीन नाज ने। गरीबी के दलदल में फंसी ये युवती आज हॉकी के राष्ट्रीय कैंप में ट्रेनिंग ले रही है। उसकी यह ट्रेनिंग उसे जापान में होने वाले हॉकी एशिया कप के लिए तैयार करेगी।
कभी टूटी हुई हॉकी स्टिक से अपनी खेल प्रतिभा को निखारने वाली नौशीन दूसरे खिलाड़ियों से उधार मांग कर अपने को खेल में माहिर बना चुकी है। नौशीन नाज के हॉकी प्लेयर बनने की कहानी में ऐसे संघर्ष हैं, जो बताते हैं सीमित संसाधन कभी आपकी प्रतिभा को नहीं रोक सकते, अगर आपमें जज्बा है, लगन है और एक जिद कि आपको हर हाल में अपने सपनों को पूरा करना है, तो आप हर कमी से लड़ते हुए जरूर जीत जाएंगे। बड़ी रोचक है नौशीन नाज के सपने देखने से लेकर उसे पूरा करने की कहानी…
मध्यप्रदेश के सिवनी की रहने वाली 15 साल की हॉकी खिलाड़ी नौशीन नाज इन दिनों भोपाल में हैं। वे यहां राष्ट्रीय कैंप में ट्रेनिंग ले रही हैं।
नौशीन बताती हैं कि उनके पिता अहफाज खान एक दिहाड़ी मजदूर हैं, जिनकी रोजाना की कमाई करीब 250 रुपए है। इतनी सीमित आय में वे उनके लिए हॉकी स्टिक और जरूरी सामान भी नहीं खरीद पा रहे हैं।
नौशीन बताती हैं कि उन्होंने अपने खेल की शुरुआत एक टूटी हुई हॉकी से की थी। इस टूटी हुई हॉकी को उन्होंने कपड़े और कीलों से जोड़कर सही किया था। उसके बाद उसी से प्रैक्टिस शुरू कर दी थी। संसाधनों की कमी के बावजूद नौशीन ने न कभी हार मानी और न ही कभी पिता से जिद की कि वो उसे नई हॉकी स्टिक दिलाएं। उसे पता था कि उसके पिता उसके लिए यह जरूरी सामान नहीं खरीद पाएंगे। इसीलिए नौशीन ने उसी टूटी हुई स्टिक से अपने हुनर और सपनों को तराशना शुरू कर दिया।
साल 2023 में मध्य प्रदेश हॉकी अकादमी ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और उन्हें प्रशिक्षण, खेल सामग्री और बेहतर सुविधाएं दीं। इससे उनके खेल में बड़ा सुधार आया। उनके पिता का कहना है कि अकादमी ने उनकी बेटी के सपने को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
नौशीन ने हाल ही में बिहार के राजगीर में आयोजित सब-जूनियर राष्ट्रीय हॉकी प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने 9 गोल कर न सिर्फ टॉप स्कोरर का खिताब जीता, बल्कि फाइनल में भी खुद को बेहतरीन खिलाड़ी साबित किया।
नौशीन सात भाई-बहनों में से एक हैं। घर की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण कई बार उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। लेकिन उनका हौसला कभी कम नहीं हुआ। नौशीन की छोटी बहन भी अब अकादमी में प्रशिक्षण ले रही है।
कमियों के बाद भी नौशीन लगन और मेहनत के बल पर आगे बढ़ती रही। अपने शानदार प्रदर्शन के दम पर नौशीन को अंडर 18 एशिया कप के लिए संभावित खिलाड़ियों के राष्ट्रीय कैंप में जगह मिल गई है। जापान में होने वाले इस टूर्नामेंट के लिए वह भारत की टीम में चयनित हो सकती है।
नौशीन कहती है कि उसके जीवन का सिर्फ एक ही लक्ष्य है कि वह भारत के लिए नेशनल और इंटरनेशनल गेम्स में खेलना चाहती है। वह चाहती हैं कि उसकी प्रतिबा से देश का नाम रोशन हो।
अगर आपमें भी है टेलेंट तो उसे जरूर निखारे, नौशीन का जज्बा और हौसला उसकी कहानी से उधार लें और आगे बढ़ें, आप भी जरूर जीत जाएंगे।
Published on:
25 Apr 2026 11:20 am
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