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गाय या भैंस? भोपाल स्लॉटरहाउस विवाद में उलझी जांच, नया ट्विस्ट चौंकाने वाला

Bhopal Slaughterhouse Controversy: एमपी की राजधानी भोपाल का चर्चित स्लॉटर हाउस विवाद अब नए मोड़, पुलिस ने कोर्ट में पेश की चार्जशीट में कहा 26.5 टन मांस लौटाया, अब प्रभावित हो सकती है जांच और कानूनी प्रक्रिया

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bhopal slaughter house controversy new twist

bhopal slaughter house controversy new twist (photo:patrika creative )

Bhopal Slaughterhouse Controversy: मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में नगर निगम से जुड़े चर्चित स्लॉटरहाउस विवाद में अब एक नया मोड़ आ गया है। पुलिस ने कोर्ट में दाखिल की चार्जशीट में अहम सबूत को लेकर साफ कह दिया है कि जब्त किया गया 26.5 टन मांस अब भरोसेमंद नहीं रह गया, क्योंकि इसे आरोपियों को वापस सौंप दिया गया था।

यह है पूरा मामला

बताते चलें कि भोपाल का स्लॉटरहाउस विवाद तब सामने आया था, जब दिसंबर में एक 'मां भवानी' संगठन ने आरोप लगाया था कि भोपाल के जिन्सी स्थित पब्लिक पब्लिक पार्टनरशिप मॉडल पर एक स्लॉटरहाउस संचालित किया जा रहा है, इस स्लॉटरहाउस में गायों का वध किया जा रहा है। आरोप यह भी था कि गायों का वध कर उनका मांस भैंसे के मांस के रूप में बेचा जा रहा है।

रेफ्रिजरेटेड ट्रक से मिला था मांस

शिकायत के आधार पर अलर्ट हुई मध्यप्रदेश पुलिस ने एक रेफ्रिजरेटेड ट्रक से करीब 26.5 टन मांस जब्त भी किया। शुरुआती जांच में जब्त किए इस मांस के कुछ सैंपल जांच के लिए मथुरा भेजे गए थे। मथुरा से जारी रिपोर्ट में मांस के सैंपल गाय का मांस होने की पुष्टि की गई थी।

CCTV में नजर आईं सिर्फ भैंसें

मथुरा से आई जांच रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने आगे की कार्रवाई शुरू की। जब पुलिस ने स्लॉटरहाउस के CCTV खंगाले तो फुटेज में केवल भैंसों के वध की ही तस्वीरें नजर आईं। पुलिस ने इसा आधार पर कोर्ट में पेश की गई अपनी चार्जशीट में स्पष्ट बताया कि यहीं से इस मामले की जांच में विरोधाभास पैदा हो गया।

हैदराबाद टेस्ट भी हुआ फेल

मामले की पुष्टि के लिए बाद में मांस के और सैंपल हैदराबाद भेजे गए। लेकिन जब तक वहां सैंपल पहुंचे तब तक मांस के सैंपल खराब हो चुके थे। डिकंपोज होने के कारण एक्सपर्ट्स उसकी जांच नहीं कर सके।

जो सबूत मिला, वह आरोपियों को सौंपा

इस बीच पुलिस ने जब्त किए गए मांस को ट्रक चालक को वापस सौंप दिया। यह सुपुर्दगी की वह प्रक्रिया है, जिसमें कानूनी प्रावधान के तहत जब्त सामान को सड़ने से बचाने के लिए अस्थायी रूप से मालिक को लौटा दिया जाता है।

अब उठे सवाल

पुलिस का कहना है कि मुख्य सबूत के कमजोर पड़ने से मामले की जांच और कानूनी स्थिति पर असर दिख सकता है। एक तरफ शुरुआती रिपोर्ट में गाय के मांस की पुष्टि और दूसरी तरफ CCTV और दूसरी जांचों में स्पष्ट निष्कर्ष नहीं निकल पाया है। जिसके बाद अब इस केस पर ही सवाल उठने लगे हैं।