भोपाल

अस्पतालों का संक्रमण भी ले रहा है स्वाइन फ्लू के मरीजों की जान

लापरवाही: इंदौर में स्वाइन फ्लू पीडि़तों की मौत के लिए जिम्मेदार कारण राजधानी के अस्पतालों में भी मौजूद

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Apr 27, 2019
अस्पतालों का संक्रमण भी ले रहा है स्वाइन फ्लू के मरीजों की जान

भोपाल. इंदौर में स्वाइन फ्लू से हुई मौतों का कारण जानने हाल ही में हुई जांच में 10 अस्पताल संक्रमित मिले। खुलासा हुआ कि मौत के लिए एन-1 एच-1 वायरस के अलावा अस्पताल के बैक्टीरिया और फंगल इंफेक्शन भी जिम्मेदार हैं। राजधानी में स्वाइन फ्लू के 200 मरीजों में से 29 की मौत हो चुकी है। चार साल में 150 से ज्यादा की मौत हुई है। पत्रिका ने पड़ताल में पाया कि हमीदिया व अन्य अस्पतालों के आइसीयू वर्षों से संक्रमणमुक्त नहीं किए गए। नियमानुसार हर दो से छह माह में ऐसा किया जाना जरूरी है। जानकारों की मानें तो आइसीयू के साथ वेंटीलेटर में भी इंफेक्शन होते हैं। वहीं अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि आइसीयू या अन्य जगहों को संक्रमण मुक्त रखने के लिए एयर फिल्टर का उपयोग करते हैं।
फ्यूमीगेशन पर्याप्त नहीं
हमीदिया अस्पताल के पूर्व माइक्रोबायलॉजिस्ट डॉ. दीपक दुबे बताते हैं कि फ्यूमीगेशन पुराना तरीका है। आइसीयू और वार्ड के लिए सैंपल रीडिंग होनी चाहिए। आइसीयू के हर उपकरण, साफ -सफ ाई में उपयोग होने वाले कैमिकल, कैथेटर, वेंटीलेटर आदि के सैंपल लेकर जांच होनी चाहिए। इसे दो से छह माह में किया जाना चाहिए।

ऐसे फैलता है संक्रमण
आइसीयू या आइसोलेशन वार्ड में ऑक्सीजन मास्क नहीं बदले जाते हैं। ये खतरनाक है।
डॉक्टर के साथ स्टाफ हैंड ग्लब्स और एप्रिन का उपयोग
नहीं करते हैं।
परिजन के मरीजों के पास आने से भी संक्रमण फैलता है।
साफ -सफ ाई के लिए पुराने तौर तरीकों का इस्तेमाल किया जाता है, जो सुरक्षित नहीं है।
ये उपाय हैं जरूरी
ऑपरेशन थिएटर की तरह समय-समय पर आइसीयू को संक्रमण रहित करते रहना चाहिए।
आइसीयू में एयर फि ल्टर बेहद जरूरी है, जिससे हवा स्वच्छ बनी रहे। संक्रमण मुक्त रहे।
आइसीयू दो हिस्सों में हो ताकि एक-एक कर संक्रमण रहित किया जा सके।
नियमानुसर एक रिजर्व आइसीयू होना चाहिए।


कल्चर टेस्ट के लिए अस्पताल को पूरी तरह खाली संभव नहीं है।
डॉ. एके श्रीवास्तव, अधीक्षक, हमीदिया अस्पताल

Published on:
27 Apr 2019 04:04 am
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