
Retd IPS Rajesh Hingankar : मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश के सीमावर्ती इलाके में डकैत ललित पटेल का खूब आतंक था। लोग उसके नाम से ही कांप उठते थे। 6 अगस्त 2017 की शाम को इस कुख्यात और इनामी डकैत ललित पटेल को मार गिराया गया। सतना जिले के नयागांव थाना क्षेत्र के पोखरवार के जंगल में उसका एनकाउंटर हुआ था। सतना के तत्कालीन एसपी आईपीएस राजेश हिंगणकर के नेतृत्व में पुलिस टीम ने ये कार्रवाई की थी। आईपीएस हिंगणकर इससे पहले और बाद में भी अपनी बहादुरी और कर्तव्यनिष्ठा के बल पर आमजन की दहशत कम करते रहे थे। यही वजह है कि रिटायरमेंट के बाद भी प्रदेश सरकार उनकी सेवाएं लेती जा रही है।
रिटायर्ड आईपीएस राजेश हिंगणकर को मुख्यमंत्री कार्यालय में विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी (ओएसडी) बनाया गया था। अब उन्हें सेवावृद्धि दी गई है। राज्य सरकार ने रिटायर आइपीएस राजेश कुमार हिंगणकर की संविदा नियुक्ति एक साल के लिए बढ़ा दी है। सामान्य प्रशासन विभाग ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिए हैं।
मुख्यमंत्री कार्यालय में विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी (ओएसडी) के रूप में रिटायर्ड आइपीएस राजेश हिंगणकर की नियुक्ति 31 अक्टूबर को समाप्त हो रही थी। सामान्य प्रशासन विभाग के ताजा आदेश के बाद अब वे 31 अक्टूबर 2027 तक सेवाएं देंगे।
रिटायर्ड आइपीएस राजेश हिंगणकर को मध्यप्रदेश में स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया यानि एसआईएमआई (SIMI) के नेटवर्क को सफलतापूर्वक ध्वस्त करने के लिए जबर्दस्त ख्याति मिली थी। इसी के साथ उन्होंने स्थानीय आतंकवादी गतिविधियों पर लगाम लगा दी थी।
कुख्यात डकैत ललित पटेल की दहशत खत्म करने के लिए रिटायर्ड आइपीएस राजेश हिंगणकर को हमेशा याद किया जाता है। करीब 9 साल पहले पुलिस ने एनकाउंटर में उसे मार गिराया था। ललित पटेल को पकड़ने के लिए सतना के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक राजेश हिंगणकर की टीम ने जबर्दस्त साहस दिखाया था। पुलिस ने चारों तरफ से जंगल की घेराबंदी की। घिर जाने पर डकैत गोलियां चलाने लगे जिसके बाद पुलिस ने जवाबी कार्रवाई की। इस मुठभेड़ में डकैत ललित पटेल मारा गया था।
पुलिस अधिकारी राजेश हिंगणकर ने बाद में एक इंटरव्यू में इस मुठभेड़ का जिक्र करते हुए बताया था कि डकैत ललित पटेल को पहले आत्मसमर्पण करने के लिए कहा गया था। वह बेहद क्रूर था। आईपीएस राजेश हिंगणकर का यह भी कहना है कि जनता के समर्थन से आत्मविश्वास प्राप्त होता है।