Bats- राजधानी में फ़्लाइंग फॉक्स जैसे दुर्लभ चमगादड़ों की सबसे बड़ी कॉलोनी बड़ा तालाब, भोपाल में कट रहे पेड़ तो चमगादड़ों ने सीहोर में बनाया ठिकाना
Bats- राजधानी भोपाल के आसपास दुनिया के विशालकाय चमगादड़ों में से एक फ़्लाइंग फॉक्स का बसेरा है। बड़ा तालाब के आसपास का क्षेत्र इनका पसंदीदा ठिकाना है। हाल ही में आए एक शोध में सामने आया है कि प्रदेश के बाकी जिलों के मुकाबले राजधानी में इनकी संख्या सबसे ज्यादा है। हालांकि अब तालाब किनारे पेड़ों और खंडहरों में इनका आवास कम होता जा रहा है। खासकर हरियाली घटने के साथ ही इनकी संख्या भी कम हो गई है। चमगादड़ों के संरक्षण को लेकर स्टेट ऑफ इंडिया बैट्स रिपोर्ट में ये बात सामने आई है।
कमला पार्क अभी भी बड़ा बसेरा
रिपोर्ट के मुताबिक, देश में इनकी 135 प्रजातियां हैं। इनमें फ़्लाइंग फॉक्स का आकार सबसे बड़ा है। जीव वैज्ञानिकों के मुताबिक, ये चमगादड़ भोपाल में करीब 150-200 साल पहले से भी पहले से मौजूद हैं। ये कहीं बाहर से लाए नहीं गए, बल्कि भोपाल की भौगोलिक स्थिति ही ऐसी है कि यह इनका प्राकृतिक घर बन गया। शहर में कमला पार्क इनका सबसे बड़ा ठिकाना है। परंतु अब कम हो रही हरियाली से इनके प्राकृतिक आवास सिमटने लगे हैं।
चमगादड़ पूरी दुनिया में पाए जाते हैं। शहरी क्षेत्र में इनकी संख्या कम हो रही है, जिसके पीछे सबसे बड़ा कारण जलवायु परिवर्तन है। ये अधिक तापमान बर्दाश्त नहीं कर सकते हैं। वहीं दूसरी ओर हरियाली कम होने से तापमान दिनोंदिन बढ़ता जा रहा है।
शहरीकरण से पुराने खंडहर और मकान को कम हुए, साथ ही तेजी से पेड़ काटे जाने की वजह से भी इनके आवास में कमी
चमगादड़ घोंसले नहीं बनाते। वे ऊंचे व विशालकाय वृक्षों, खंडहरों और पुराने मकानों व गुफाओं में आवास बनाते हैं। ऐसे में शहरीकरण से पुराने खंडहर और मकान को कम हुए, साथ ही तेजी से पेड़ काटे जाने की वजह से भी इनके आवास में कमी आ गई। लिहाजा अब वे अपना आवास बदलने की तैयारी में हैं।
दिलचस्प बात यह है कि फ़्लाइंग फॉक्स अब सीहोर के आसपास के इलाकों में अपना डेरा जमाने लगे हैं। दरअसल राजधानी में जिन पेड़ों पर इनके आवास थे, उनमें से कई काटे जा चुके हैं।
पक्षी विशेषज्ञ मोहम्मद खालिक बताते हैं कि चमगादड़ पक्षी नहीं, बल्कि स्तनधारी जीव हैं। पानी के आसपास इनकी कॉलोनियां होती हैं। वे पानी के पास आवास इसलिए बनाते हैं, ताकि उनके शरीर का तापमान नियंत्रित रहे।