भोपाल

रमज़ान : कोरोना काल के बीच इस तरह रखें रोज़े, हर रोज़ेदार को ये बातें जानना जरूरी

कुछ सवाल ऐसे हैं, जो रोज़ेदारों की आम जिंदगी के लिए बेहद जरूरी हैं। आप भी जान लीजिए उन खास सवालों के जवाब।

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रमज़ान : कोरोना काल के बीच इस तरह रखें रोज़े, हर रोज़ेदार को ये बातें जानना जरूरी

भोपाल/ रमजान-उल-मुबारक का पाक महीना चल रहा है। रोज़ेदार बड़े अकीदे के साथ रोज़े और इबादत कर रहे हैं। आम दिनों में अगर रमजानों की बात करें, शहर की सड़कों पर चल पहल, बाजारों में रौनक दिखाई देती थी। लेकिन इस बार कोरोना महामारी के चलते चारों ओर सन्नाटा पसरा हुआ है। कोरोना संकट के चलते मुस्लिम समुदाय के लोग अपने अपने घरों में ही इबादत कर रहे हैं। वैसे तो हर मुसलमान को रोजे रखने के नियमों की जानकारी होती ही है। हालांकि, कुछ सवाल ऐसे हैं, जो रोज़ेदारों की आम जिंदगी के लिए बेहद जरूरी हैं। ऐसे ही कुछ सवालों के जवाब हमें दिये शहर की मशहूर हस्ती मुफ्ती फैय्याज आलम ने। आप भी जान लीजिए उन खास सवालों के जवाब।


रोज़े और इबादत से जुड़े कुछ खास सवाल

जवाब : घर में नमाज जमाअत से पढ़ी जा सकती है। हालांकि, मौजूदा हालात को देखते हुए, सिर्फ एक घर के लोग ही एक साथ नमाज़ अदा करें।

जवाब : सिर्फ डायबीटीज ही नहीं, किसी भी मर्ज में दवा की पाबंदी हो या थोड़ी थोड़ी देर में खाना खाने की जरूरत हो, तो रोज़ा छोड़ सकते हैं। हालांकि, उसका कफ्पारा अदा करना होगा।

जवाब : रोजे के दौरान खून की जांच कराने में कोई हरज नहीं है।

जवाब : अल्लाह ने कुरआन के दूसरे सूरह में रोजों के अनिवार्य होने का हुक्म दिया है।

जवाब : ऐसे व्यक्ति को रोजा रखना है।

जवाब : इससे रोजा मकरूह हो जाएगा। मिस्वाक किया जा सकता है।

जवाब : सहरी करना सुन्नत है। ऐसा न करने पर रोजा हो जाएगा, पर सुन्नत रह जाएगी। लेकिन, इसका ये मतलब नहीं कि, अगर सहरी न की हो तो रोज़ा छोड़ा जाए।

जवाब : रोजे की हालत में इत्र लगा सकते हैं, पर सुरमा नहीं।

जवाब : एक बार भी कर लेना काफी होगा।

जवाब : कोई भी इंसान जब तक बीमार है, तब तक उसे रोज़ा नहीं रखना चाहिए। ठीक होने पर कजा रोजे अदा करे।


जवाब : पैगंबर मोहम्मद साहब की हिदायत है कि अगर तुम बीमार हो तो इलाज कराओ। कलौंजी में हर बीमारी की दवा मौजूद है, सिवाए मौत के। इफ्तारी व सेहरी में कलौंजी का इस्तेमाल करें।

जवाब : ऐसे में पहली दस रकातों में इन सूरतों को पढ़ें और अगली दस रकातों में उन्हीं सूरतों को दोहरा लें।


जवाब : जी हां। असल में इससे कोई चीज़ हलक में नहीं जाती।

जवाब : तस्बीह वगैरा बिना वुजू पढ़ सकते हैं। पर, कुरआन बिना वुजू छूना जायज नहीं है।

Published on:
04 May 2020 05:35 pm