भोपाल

अज़ब-ग़जब : कब्र में दफ़न मुर्दा 9 साल के बाद हो गया जिंदा! आस-पास के लोगों में मचा हडकंप

जमीन के एक मामले में गवाही देने मुर्दा आया पुलिस के सामने,विशेष अदालत में पेश किए गए बयान...

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Jan 21, 2018

भोपाल। कई मामलों में झूठ बोलना फरेब या अन्य जालसाजी सहित झूठी गवाही के बारे में भी आपने सुना ही होगा, लेकिन क्या कभी ये सुना है कि कोई अपनी मौत के बाद गवाही दे गया है। नहीं न, लेकिन ऐसा ही एक मामला भोपाल में आया है।

जहां एक डीसीपी ने 9 साल पहले मर चुके किसान का बयान लेकर भोपाल की विशेष अदालत में तक पेश कर दिया। वहीं इस बारे में जब मृतक के गांव के सरपंच व आसपास वालों को पता चला, तो वहां हड़कंप Kudrat ka karisama Mara hua insan Jinda hua मंच गया। दरअसल, भोपाल की हुजूर तहसील में एक अजीबो-गरीब मामला सामने आया है, जहां भूमि घोटाले की जांच कर रहे डीसीपी ने 9 साल पहले मर चुके किसान का 20 अप्रैल 2013 को बयान लिया ।

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साथ ही उस बयान को भोपाल की विशेष अदालत में पेश कर दिया, जबकि जिस राधेलाल के ये बयान दिखाए गए उसकी मौत अगस्त 2004 में ही हो चुकी है। लेकिन अधिकारियों ने मौत के बाद भी उसे चैन से नहीं रहने दिया।

ये है पूरा मामला:

एक रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 141 किसानों के पास 800 एकड़ जमीन थी, जिसको कथित तौर पर बिना किसी की सहमति के नीलाम कर दिया गया, नीलामी का कारण उस जमीन पर करोड़ों रुपए का कर्ज था, जो जिला सहकारी कृषि और ग्रामीण विकास, भूमि विकास बैंक से लिया गया था, नीलाम की गयी जमीन की कीमत 1600 करोड़ थी, जबकि वसूल सिर्फ 1.5 करोड़ रुपए ही हो सका।
वहीं पीड़ितों ने जब अधिकारियों और जमीन खरीदने वालों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई, तब लोकायुक्त ने 4 जुलाई 2013 को एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की।

लोकायुक्त के अनुसार भोपाल की हुजूर तहसील में रहने वाले राधेलाल का बयान 20 अप्रैल 2013 को ले लिया गया था और कोर्ट में भी पेश कर दिया गया था, राधेलाल ने अपने बयान में साफ कर दिया था कि उसने बैंक से 8000 का लोन लिया था, लेकिन वापस नहीं कर पाया था, बाद में उसकी 7.10 एकड़ जमीन को उससे पूछे बिना अधिकारियों ने बेच दिया।

मुर्दे को विशेष अदालत में किया पेश!
इस पूरे मामले में सबसे दिलचस्प बात ये रही कि जिस राधेलाल के बयान 20 अप्रैल 2013 को लेना दिखाया गया था। उसके संबंध में सगोनी गांव की पंचायत ने राधेलाल का मृत्यु प्रमाण पत्र Mara hua insan Jinda Kese hua सौंपा था, जिसमें लिखा था कि राधेलाल की मृत्यु अगस्त 2004 में ही हो चुकी है।

लोकायुक्त और सरपंच के बयानों को 13 दिसंबर 2015 को विशेष अदालत में पेश भी किया गया था।

इस कैस के सामने आने के बाद जानकारों व मृतक के गांव वालों का कहना है कि 'एमपी अजब है सबसे गजब है', वाला स्लोगन MP के कई अधिकारियों के कारनामों Kudrat ka karisama Mara hua insan Jinda Kese hua पर फिट बैठता है क्योंकि यहां मुर्दे भी बोलते हैं, जिनका बयान भी कोर्ट में पेश कर दिया जाता है।

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Published on:
21 Jan 2018 12:59 pm
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