cm mohan yadav interview- मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव से पत्रिका की खास बातचीत...। दिए बेबाकी से जवाब...।
छात्र राजनीति से कॅरियर शुरू करने वाले डॉ. मोहन यादव प्रदेश में सत्ता के शीर्ष पर पहुंचे। 13 दिसंबर 2023 को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। 22 मार्च को उनकी सरकार ने 100 दिन पूरे कर लिए। उतार-चढ़ाव के बीच सरकार की झोली में उपलब्धियां आईं तो विपक्ष ने घेराबंदी कर आरोप भी लगाए। पत्रिका ने उनसे कई मुद्दों पर खास बात की। मौजूदा दलबदल पर भी पूछा तो सीएम ने बेबाकी से जवाब दिया।
पत्रिका : निगम, मंडल और बोर्ड के कई पद खाली पड़े हैं। नियुक्तियां रद्द की गईं। कई जगह नियुक्ति अटकी हुई हैं। यह सब क्यों?
सीएम : समय और परिस्थिति को देखकर निर्णय लिया है। प्रक्रिया के अंतर्गत फैसले लिए गए हैं। जल्द नियुक्तियां की जाएंगी। इंतजार खत्म होगा।
पत्रिका: भाजपा में बड़ी संख्या में दूसरे दलों के लोग आ रहे हैं। क्या इससे भाजपा की मूल विचारधारा, मूल संगठन कायम रह पाएगा? क्या बाद में यह नुकसानदायक तो नहीं होगा?
सीएम: सनातन संस्कृति ने सबके समावेश की बात बहुत अच्छे से समझाई है। यदि किसी को भाजपा की विचारधारा से मेल लगता है, तभी तो वे यहां आते हैं। भाजपा अपने हर कार्यकर्ता का सम्मान करती है। उनका समावेश करती है। पार्टी संगठन इसका निर्णय लेता है। रही बात भाजपा की मूल विचारधारा की तो भाजपा की मूल विचारधारा है- रामराज और राष्ट्रप्रेम। जिन्हें इन दोनों से प्रेम है, उनका स्वागत है।
सरकार के 100 दिन पूरे होने पर सबसे बड़ी उपलब्धि क्या मानते हैं। कोई तीन उपलब्धि बतानी हों तो वे क्या होंगी?
पिछले 100 दिन में जनकल्याण, सुशासन और विकास के अति महत्त्वपूर्ण कार्य हुए हैं। तीन बड़ी उपलब्धियां बता पाना मुश्किल है, फिर भी मोटे तौर पर इंदौर की हुकुमचंद मिल के 4,800 श्रमिक परिवारों को उनका अधिकार दिलाना, खरगोन, सागर और गुना में विश्वविद्यालय भवनों का उद्घाटन, पीएमश्री एयर एंबुलेंस का शुभारंभ। श्रमिकों की मासिक मजदूरी में वृद्धि और पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक परियोजना के लिए मध्यप्रदेश, राजस्थान और केंद्र सरकार के बीच त्रिपक्षीय समझौता जैसे अहम कार्य हैं।
अफसरों के तबादले पर सरकार सवालों में घिरी है। भरपूर तबादले हुए और बारबार बदले भी गए, ऐसा क्यों?
ट्रांसफर प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है। जो अफसर जहां हैं, वहां अच्छे से काम करें। जनता की परेशानी का हल निकालें। यही सरकार का लक्ष्य है, यही उनका होना चाहिए।
सरकार ने कई बार कर्ज लिया। मुख्य बजट नहीं आ पाया, क्या इंतजाम होंगे?
पत्रिका देश का बड़ा और विश्वसनीय अखबार है। मैं आपके माध्यम से जनता को आश्वस्त करना चाहता हूं कि किसी भ्रम में न फंसे। जन-कल्याण और विकास कार्यों के लिए पैसों की कमी नहीं है। प्रदेश की गाड़ी को दो इंजन खींच रहे हैं। हमारे पास पावर बैंक है। मध्यप्रदेश ने हमेशा पूंजीगत कार्यों के लिए कर्ज लिया है। कभी डिफॉल्टर नहीं हुआ।
आपकी सरकार में सनातन फ्रंटफुट पर है, पर रोजगार, आर्थिक सशक्तीकरण, महिला सशक्तीकरण क्यों पीछे चला गया?
हम रामकाज कर रहे हैं, राष्ट्रकाज कर रहे हैं और राज्यकाज भी कर रहे हैं। हम धर्म और कर्म को माथे से लगाने वाले लोग हैं। 11 हजार को नौकरी के नियुक्ति-पत्र दिए। सात लाख युवाओं को पांच हजार करोड़ का स्वरोज गार ऋण दिया। 1.29 करोड़ बहनों के खातों में 3,728 करोड़ ट्रांसफर किए। महिला स्व-सहायता समूहों को 9,838 करोड़ दिए।
विपक्ष आरोप लगाता है कि मप्र अब केंद्र शासित प्रदेश हो गया, इस पर क्या कहेंगे?
विपक्ष के पास कोई काम बचा नहीं। व्यस्त रहने के लिए कुछ न कुछ कथा कहते हैं। डबल इंजन की सरकार में डबल स्पीड से कार्य हो रहे हैं। आरोप हास्यास्पद, निराधार हैं। जब लगेगा कि प्रदेश के विकास को केंद्र से सहायता चाहिए, अधिकारपूर्वक कहेंगे। मप्र केंद्र शासित नहीं, केंद्र का प्रिय राज्य है।