गुरु पूर्णिमा पर रहेगा खग्रास चंद्रग्रहण, दोपहर 2:54 से शुरू हो जाएगा सूतक, इसलिए बंद हो जाएंगे मंदिरों के पट, शहर के पंडितों के अनुसार सूतक के पहले ही गुरु पूजा करना होगा फलदायी
भोपाल. गुरु पूर्णिमा पर शिष्य गुरुओं की दोपहर बाद तक ही पूजा कर सकेंगे। यह सब खग्रास चंद्रग्रहण पडऩे के कारण होगा। ग्रहण का सूतक काल दोपहर 2 बजकर 54 मिनट से शुरू हो जाएगा। इस दौरान मंदिरों के पट बंद हो जाएंगे। गुरु भी ध्यान, जप, तप, साधना आदि में लीन हो जाएंगे।
गुरु पूर्णिमा पर चंद्रग्रहण की स्थिति कई सालों के बाद बन रही है। गुरु पूर्णिमा 27 जुलाई को मनाई जाएगी। ग्रहण उत्तरा अषाढ़ और श्रवण नक्षत्र तथा मकर राशि में होगा। यह साल का दूसरा खग्रास चंद्रग्रहण होगा, जो पूरे देश में दिखाई देगा। इसके पहले 31 जनवरी को खग्रास चंद्रग्रहण पड़ा था।
चंद्रग्रहण शुरू होने के तीन प्रहर अर्थात 9 घंटे पहले ग्रहण का सूतक काल शुरू हो जाता है। यह दोपहर बाद से ग्रहण समाप्ति के बाद तक रहेगा। ग्रहण की अवधि 3 घंटा 55 मिनट रहेगी। ज्योतिषियों का कहना है कि इस सदी में यह सबसे लंबी अवधि वाला चंद्रग्रहण है, जो कई अनुसंधान का विषय भी बनेगा।
मंदिरों में दोपहर तक होंगे आयोजन
शहर के मंदिरों में गुरु पूर्णिमा के आयोजन दोपहर तक होंगे, इसके बाद पट बंद हो जाएंगे। गुफा मंदिर के पं. लेखराज शर्मा ने बताया कि सुबह से दोपहर तक गुरु पूजा की जाएगी। इसमें आश्रम के सभी शिष्य गुरु पूजा करेंगे। इसके बाद सूतक काल में मंदिर के पट बंद हो जाएंगे, और तप, साधना, मंत्र जाप, माला जाप आदि किया जाएगा। गायत्री शक्तिपीठ सहित शहर के अन्य मंदिरों में इसी दिन गुरु पूर्णिमा मनाई जाएगी।
18 साल बाद बना ऐसा संयोग
गुरु पूर्णिमा के दिन चंद्रग्रहण की स्थिति 18 साल बाद बनी है। ज्योतिषाचार्य पं. जगदीश शर्मा ने बताया कि इसके पहले गुरु पूर्णिमा पर चंद्रग्रहण की स्थिति 16 जुलाई 2000 में बनी थी। इसके बाद इस साल इस तरह की स्थिति बन रही है। ग्रहण के दौरान प्रतिमा स्पर्श, पूजा पाठ के साथ भोजन और शयन करना वर्जित माना गया है।
27 को ही मनाएं गुरु पूर्णिमा
ज्योतिष मठ संस्थान के पंडित विनोद गौतम ने बताया कि गुरु पूर्णिमा का पर्व 27 जुलाई को ही मनाना श्रेयकर रहेगा। क्योंकि ग्रहण का सूतक दोपहर 2 बजकर 54 मिनट से शुरू होगा, इसलिए सूर्योदय से लेकर दोपहर बाद तक यह पर्व मना सकते हैं। वैसे भी एक दिन पहले चतुर्दर्शी तिथि रहेगी, इसलिए 27 जुलाई को ही यह पर्व मनाना चाहिए।