मध्यप्रदेश की 230 सीटों पर 2907 उम्मीदवार आजमा रहे भाग्य
आलोक पण्ड्या @ भोपाल. विधानसभा चुनाव के रण में मंत्रियों के सामने ज्यादा उम्मीदवारों ने मैदान में उतरकर उनका संकट बढ़ा दिया है। सबसे ज्यादा 30 उम्मीदवार सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग के सामने हैं। वहीं, गृहमंत्री भूपेंद्र सिंह को 26 और उद्योग मंत्री राजेंद्र शुक्ला को 24 प्रत्याशियों का सामना करना पड़ रहा है। मंत्रियों में सबसे सहज मुकाबला ओमप्रकाश धुर्वे और अंतर सिंह आर्य के लिए है। उनके सामने 6-6 उम्मीदवार मैदान में हैं।
नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह की मुश्किलें भी कम नहीं है। चुरहट में 21 उम्मीदवार ताल ठोक रहे हैं। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरूण यादव समेत 14 उम्मीदवारों ने चुनौती दी है। प्रदेश में सबसे ज्यादा 34 उम्मीदवार भिंड जिले की मेहगांव सीट पर उतरे हैं। प्रदेश में कुल 2907 प्रत्याशी अपना भाग्य आजमा रहे हैं। प्रति सीट उम्मीदवारों का औसत 12.63 बैठता है।
मंत्री भूपेंद्र के सामने भूपेंद्र भैया, शुक्ला के सामने शुक्ला
गृहमंत्री भूपेंद्र ङ्क्षसह की मुश्किल यूं भी है, क्योंकि खुरई में उन्हीं के हम नाम भूपेंद सिंह (भूपेंद्र भैया) मैदान में उतर गए हैं। उधर, मंत्री राजेंद्र शुक्ला के सामने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में राजेंद्र शुक्ला हैं। सिलवानी से मंत्री रामपाल सिंह के खिलाफ भी निर्दलीय उनके एक हमनाम चुनावी रण में उतर गए हैं। नरसिंहपुर में मंत्री जालम सिंह पटेल के सामने जालम सिंह पटेल निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में हैं। ऐसे में उम्मीदवार को मिलने वाले कुछ वोट उनके हमनाम के खाते में चले जाते हैं।
चल रहे चुनावी चाल
सीटों पर ज्यादा प्रत्याशी चुनावी चाल का हिस्सा भी हैं। कई प्रत्याशियों ने डमी केंडीडेट उतारे तो दूसरे छोटे दलों के प्रत्याशियों से भी क्षेत्रीय गणित साधने की कोशिश की है। कई सीटों पर पार्टियों के बागियों ने संख्या बढ़ाई है। डमी उम्मीदवार उतारे जाने का एक लाभ यह भी है कि वाहनों की अनुमति और निर्वाचन एजेंट के तौर पर अतिरिक्त उपस्थिति मिल जाती है।
पिछली बार से ज्यादा प्रत्याशी मैदान में
इस बार पिछले चुनाव से 324 प्रत्याशी ज्यादा उतरे हैं। प्रदेश के पिछले सात चुनावों में सबसे अधिक 4216 उम्मीदवार 1990 के आम चुनाव में थे। वहीं, 2003 के चुनाव में सबसे कम 2171 प्रत्याशी ने भाग्य आजमाया था। सबसे अधिक 4066 पुरुष उम्मीदवार 1990 और सबसे अधिक 221 महिला उम्मीदवार 2008 के चुनाव में थीं। 1985 के चुनाव में सबसे कम 76 महिला उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा था।
प्रदेश की टॉप-10 सीटें
मेहंगाव में 34, अटेर में 33, नरेला में 31, सतना में 30, खुरई में 27, रीवा में 25, रामपुर बाघेलान में 23, देवतालाब में 23, सेमरिया में 22 और चुरहट सीट से 22 प्रत्याशी मैदान में हैं।