वेतन पर सबसे ज्यादा कुल बजट की 26.11 प्रतिशत राशि वेतन पर खर्च होती है। पेंशन पर 10.19 प्रतिशत राशि खर्च होती है। ब्याज भुगतान पर 10.02 प्रतिशत राशि खर्च होती है।
नए वित्तीय वर्ष के लिए राज्य का बजट तैयार कर रही सरकार को अधिक माथापच्ची करना पड़ रही है। यह इसलिए, क्योंकि राज्य में आमदनी कम है और खर्च ज्यादा हैं। सबसे ज्यादा खर्च कर्मचारियों के वेतन-भत्तों, पेंशन एवं ब्याज भुगतान पर होता है। राज्य का लगभग आधा बजट इन्हीं मदों में खर्च हो जाता है। बाकी बजट से अन्य खर्चों की पूर्ति करनी होती है। सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन, विकास कार्यों के लिए खर्च चाहिए होता है, इसलिए खजाने पर बोझ बढ़ा है। अब सरकार खर्चों को कम कर आय बढ़ाने के प्रयास में है। चालू वित्तीय वर्ष में बजट 3.14 लाख करोड़ का है। यह पिछले वर्ष की तुलना में 13 प्रतिशत ज्यादा है। अगले वित्तीय वर्ष में बजट और बढ़ेगा।
प्रमुख कारण
आमजन से जुड़ीयोजनाओं को पूरा किया जाना है। चुनावी घोषणा-पत्र में किए गए वादे भी पूरे करने हैं। नए वित्तीय वर्ष के बजट में घोषणाओं को पूरा करने के लिए बजट का प्रावधान भी किया जा रहा है। सात फरवरी से प्रस्तावित सत्र में सरकार जरूरी खर्चों के लिए राशि मांगेगी। बजट 4 माह का होगा। शेष आठ माह के लिए बजट जुलाई में पारित करने का प्रयास होगा।
बजट का आकार बढऩे के साथ ही राज्य पर कर्ज का बोझ भी बढ़ा है। कर्ज राज्य के बजट से अधिक हो गया है। ऐसा इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि राज्य का बजट 3.14 लाख करोड़ रुपए का है जबकि कर्ज 3.31 लाख करोड़ तक हो गया है। वर्ष 2023 की बात करें तो राज्य सरकार अब तक 17 बार कर्ज ले चुकी है। जबकि चालू वित्तीय वर्ष 2023-24 में 10 बार कर्ज लिया गया।
विधानसभा चुनाव आचार संहिता के चलते भी कर्ज लिया जाता रहा। आचार संहिता के दौरान तीन बार कर्ज लिया गया। मतगणना के चार दिन पहले भी 2000 करोड़ रुपए का कर्ज लिया गया था। हाल ही में फिर 2500 करोड़ का कर्ज लिया गया।