भोपाल

एमपी के पांच बड़े शहरों की आबोहवा चिंताजनक, राष्ट्रीय संस्थानों की स्टडी में हुआ खुलासा

Pollution- शहरों में प्रदूषकों की सोर्स अपॉर्शनमेंट स्टडी में खुलासा बड़े शहरों की आबोहवा बिगाड़ रहे वाहन और खराब सड़कें

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Apr 06, 2026
Madhya Pradesh Pollution Control Board Commissions Source Apportionment Study

Pollution- मध्यप्रदेश के पांच बड़े शहरों की आबोहवा चिंताजनक स्थिति में है। इन शहरों में हवा को दूषित करने वाले सबसे बड़े कारण खराब सड़कों की धूल, वाहनों का प्रदूषण, कचरा और अन्य बायोमास को जलाना और निर्माण कार्य से उडऩे वाली धूल पाए गए हैं। राष्ट्रीय स्तर के संस्थानों से कराई गई सोर्स अपॉर्शनमेंट स्टडी के प्रारंभिक आकलन में यह स्थिति सामने आई है। अकेले भोपाल में ही साल में 10309 टन पीएम-10 कण हवा में मिल रहे हैं। खास बात यह है कि शासन-प्रशासन को इसकी रिपोर्ट मिलने के बाद भी इस प्रदूषण को रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। इससे प्रदूषण घटने की बजाय और बढ़ता जा रहा है।

मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा सोर्स अपॉर्शनमेंट स्टडी का काम भोपाल में ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया पुणे, ग्वालियर में आइआइटी कानपुर और उज्जैन में मैनिट भोपाल की सहायता से कराई जा रही है। जबकि इंदौर में यह स्टडी वर्ल्ड रिसोर्स इंस्टीट्यूट नई दिल्ली तथा जबलपुर शहर में मैनिट के माध्यम से कराया जा रहा है। नगर निगम देवास और सागर द्वारा भी इसके लिए मैनिट से अनुबंध किया गया है।

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इस स्टडी के अंतर्गत मुख्य वायु प्रदूषकों के स्रोतों की पहचान की जाती है ताकि उनके प्रबंधन पर समय रहते कार्य किया जा सके।

यह सुझाव दिए

  1. सड़क ठीक करें, उनके किनारों को खुला न छोड़ें।
  2. डीजल वाहन कम कर, पुराने वाहनों में रोक लगाएं।
  3. घरेलू कचरे को जलाने पर सख्ती से रोक लगाई जाए।
  4. भवन निर्माण स्थलों पर टीन-ग्रीन नेट की स्क्रीन लगे।
  5. किसानों द्वारा नरवाई जलाने पर रोक लगाएं।
  6. सड़कों के किनारे घास, पेड़-पौधे या पेविंग ब्लॉक लगाने की व्यवस्था हो।

प्रदेश के दोनों प्रमुख शहरों की स्थिति चिंताजनक

भोपाल
राजधानी की अपॉर्शनमेंट स्टडी के अनुसार, भोपाल शहर में कुल पीएम- 10 कणों के उत्सर्जन का भार 10,309.30 टन प्रति वर्ष है। पीएम-10 बढ़ाने में सबसे ज्यादा योगदान धूल (62.2प्रतिशत), वाहन (13 प्रतिशत), निर्माण कार्य ( 12.1 प्रतिशत) और खुले में कचरा जलाना (2.9 प्रतिशत) है। इन्हें बढ़ाने में सबसे ज्यादा योगदान धूल (37.7 प्रतिशत), परिवहन (29.3 प्रतिशत), निर्माण (7.6 प्रतिशत) और खुले में कचरा जलाना (6.7 प्रतिशत) है। यातायात कंजेशन से प्रदूषण बढऩे वाले 5 हॉटस्पॉट में हमीदिया रोड, बैरागढ़, कोलार रोड, नर्मदापुरम रोड और एमपी नगर शामिल हैं।

इंदौर
इंदौर शहर में चल रही निर्माण गतिविधियों, कचरे के खुले में जलाने, वाहनों से निकलने वाले धुएं और यातायात जाम को प्रदूषण का मुख्य स्रोत बताया गया है। वहीं निर्माण और विध्वंस कचरे का अनुचित प्रबंधन, पाल्दा और सांवेर रोड जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में जर्जर सड़क और सड़क निर्माण से संबंधित गतिविधियां, जिनमें कच्चा डायवर्जन व मेट्रो परियोजना प्रदूषण बढ़ा रही हैं।

40 फीसदी कम करने का था लक्ष्य

केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा देश के 131 शहरों को नॉन अटेनमेंट सिटी घोषित किया गया है। इनमें मध्यप्रदेश के 7 शहर भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन, सागर और देवास शामिल हैं। वर्ष 2025- 26 तक पीएम-10 के स्तर में 40 प्रतिशत तक कमी या राष्ट्रीय मानक 60 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर करने का लक्ष्य तय किया गया था लेकिन इन शहरों में भी घटने की बजाय एक्यूआई का स्तर बढ़ता जा रहा है।

वायु प्रदूषण नियंत्रण में उपयोगी स्टडी मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के द्वारा विभिन्न संस्थानों के माध्यम से यह स्टडी कराई जा रही है। इसका प्रमुख उद्देश्य मुख्य वायु प्रदूषकों जैसे- पीएम 10 और 2.5), सल्फर डाइ ऑक्साइड, नाइट्रोजन के ऑक्साइड और कार्बन डाई ऑक्साइड के स्रोतों की पहचान करना है। इस स्टडी की मदद से सोर्स आइडेंटिफिकेशन जैसे पॉइंट सोर्स, लाइन सोर्स, एरिया सोर्स के माध्यम से किया जाता है, ताकि प्रदूषकों के स्रोत की जानकारी के आधार पर वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए उपाय किए जा सकेंगे।

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Published on:
06 Apr 2026 08:34 am
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