
MP UCC Bill- उत्तराखंड के बाद अब मध्यप्रदेश भी समान नागरिक संहिता कानून लागू करने वाले राज्यों की सूची में शुमार होने जा रहा है जिसका फाइनल ड्राफ्ट तैयार हो गया है। रविवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव (mp cm dr mohan yadav) की कैबिनेट में उसे मंजूरी मिल जाएगी। ऐतिहासिक फैसला राजधानी के पास स्थित जगदीशपुर में होगा। वहीं, 20 जुलाई को मानसून सत्र में विधेयक के रूप में उसे पेश किया जाएगा।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की कैबिनेट बैठक रविवार को भोपाल के पास जगदीशपुर में होने जा रहा है। फरवरी 2026 में मोहन सरकार ने भोपाल के पास स्थित 'इस्लाम नगर' का नाम बदलकर 'जगदीशपुर' किया था। रविवार को यूसीसी जैसे बड़े और ऐतिहासिक ड्राफ्ट पर वहां के महल में फैसला होगा। मध्यप्रदेश के यूसीसी ड्राफ्ट में कई अहम और बड़े बदलाव किए गए हैं, जिसमें राज्य की अनुसूचित जनजातियों को बाहर रखा गया है।
नए कानून के लागू होने के बाद राज्य में बिना कानूनी तलाक के एक से अधिक विवाह करने पर पूरी तरह से पाबंदी लग जाएगी। ड्राफ्ट में पहली बार लिव-इन रिलेशनशिप को एक स्पष्ट कानूनी ढांचे के तहत लाने का प्रस्ताव है। उत्तराधिकार और पैतृक संपत्ति के मामले में अब बेटियों को भी बेटों के बराबर समान कानूनी अधिकार दिए जाएंगे। कानून को बनाने में जनता की राय का भी पूरा ख्याल रखा गया है। समिति को मप्र यूसीसी पोर्टल और जिला- स्तरीय बैठकों के माध्यम से जनता और विभिन्न संगठनों से 9.58 लाख से अधिक सुझाव और प्रतिक्रियाएं प्राप्त हुई थीं, जिन्हें इस ड्राफ्ट में समाहित किया गया है।
0-आदिवासी रहेंगे दायरे से बाहर
0-बहुविवाह पर पूर्ण रोक
0-लिव-इन रिलेशनशिप का अनिवार्य रजिस्ट्रेशन
0-बेटियों को संपत्ति में बराबर का हक
0-विवाह और तलाक के नियम होंगे समान
0-गोद लेने की पारदर्शी प्रक्रिया
0-बुजुर्ग माता-पिता को बेसहारा छोडऩे पर एक्शन
मध्यप्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र अगले माह 20 जुलाई से 24 जुलाई तक चलेगा। सत्र के दौरान राज्य सरकार कई महत्वपूर्ण विधेयक पेश कर सकती है। इनमें मध्यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम 1993 (संशोधन) अध्यादेश 2026 और मप्र उपकर (संशोधन) अध्यादेश 2026 को विधेयक के रूप में सदन में प्रस्तुत कर पारित कराने के लिए सरकार ने इसकी तैयारियां भी शुरू कर दी है। मानसून सत्र में प्रथम अनुपूरक बजट भी पेश होगा। इसके लिए सरकारी विभाग नए वाहन खरीदी के लिए प्रस्ताव नहीं दे सकेंगे। नए मदों के प्रस्ताव भी शामिल नहीं किए जाएंगे। इस बारे में वित्त विभाग ने सभी विभागों को निर्देश भी जारी कर दिए हैं।