भोपाल

MP ELECTION 2018: हमनाम डमी प्रत्याशी भी मैदान में, कहीं वोट काटने की जुगत तो नहीं

चुनावी गणित: 2008 के मुकाबले 2013 में कम हुई लेकिन अब बढ़ गई प्रत्याशियों की संख्या....
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Nov 20, 2018
news
nikay chunav

भोपाल। राजधानी में पिछले दो विधानसभा चुनावों के प्रत्याशियों पर नजर डालें तो इस बार सबसे ज्यादा 111 प्रत्याशी मैदान में हैं। नरेला और गोविंदपुरा विधानसभा सीट पर प्रत्याशियों का औसत भी बढ़ा है। इन दो सीटों पर इस चुनाव में सबसे ज्यादा प्रत्याशी हैं।


समीकरण बिगाडऩे के लिए खडे़ किए जाते उम्मीदवार...
इस वर्ष नरेला से 31 प्रत्याशी मैदान में हैं, जिसमें 20 निर्दलीय हैं, बाकी अन्य दलों से। नरेला और गोविंदपुरा एेसी सीटें है जिन पर हर पार्टी का एक-एक उम्मीदवार मैदान में है।

जानकार बताते हैं कि ऐसे प्रत्याशी समीकरण बिगाडऩे के लिए खडे़ किए जाते हैं। कई बार प्रमुख पार्टियां जिनमें सीधा मुकाबला होता है, वे भी एक-दूसरे की काट के लिए एक नाम के कई डमी प्रत्याशी मैदान में उतारती हैं।

नरेला सीट पर इसका उदाहरण देखने को मिला। यहां से राष्ट्रीय पार्टी के प्रत्याशी को पटखनी देने के लिए उनके ही हमनाम दो निर्दलीय प्रत्याशी मैदान में हैं। कई बार इसका नुकसान भी उठाना पड़ता है।

चुनावी वादे पूरे नहीं होने की नाराजगी भी...
राजनीति के जानकार केसी मल्ल बताते हैं पिछले चुनावों में वादे कर वोट लेने के बाद जब प्रत्याशी खरे नहीं उतरते तब ये स्थिति बनती है। कुछ डमी प्रत्याशी दूसरी पार्टी के प्रत्याशी के हमनाम भी होते हैं। ये किसी के इशारे पर वोट काटने के लिए आते हैं।


नरेला में 20 निर्दलीय हैं तो निश्चित ही इनमें से 12 तो एेसे होंगे जो पिछले चुनाव में किए गए वादों से खफा हैं। एेसे प्रत्याशी पक्ष और विपक्ष दोनों की रणनीति पर पानी फेरने का काम करते हैं।


क्षेत्र के छोटे मुद्दे बन रहे बड़ी परेशानी...
जिले में परिसीमन के बाद सातों विधानसभा सीटों पर खड़े होने वाले प्रत्याशियों का गणित भी बदलता रहा है। लोगों के छोटे-छोटे मुद्दे बड़ा रूप ले लेते हैं। हुजूर में श्याम मीणा और रामेश्वर शर्मा के बीच झगड़ा। ऐसे में श्याम ने कांग्रेस का दामन थाम लिया है।


उधर, बैरसिया में भाजपा से टिकट न मिलने पर खफा ब्रह्मानंद रत्नाकर अब बागी होकर निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं। इससे भाजपा के प्रत्याशियों का गणित गड़बड़ा रहा है।

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कांग्रेस से बाहर होंगे सत्यव्रत......

उधर कांग्रेस पूर्व सांसद सत्यव्रत चतुर्वेदी के खिलाफ अनुशासन का डंडा चलाने जा रही है। सत्यव्रत को पार्टी के खिलाफ बयानबाजी करने के आरोप में प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने एआइसीसी को निष्कासित करने की अनुशंसा की है। सत्यव्रत छतरपुर जिले की राजनगर सीट से समाजवादी उम्मीदवार के रुप में खड़े हुए पुत्र नितिन चतुर्वेदी का खुलकर प्रचार कर रहे हैं। सत्यव्रत प्रचार में कांग्रेस के खिलाफ भी खुलकर बोल रहे हैं।

Published on:
20 Nov 2018 09:43 am